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हत्यारों ने बुरी तरह बिगाड़ दिया था चेहरा, नई तकनीक से हुई मृतक की पहचान

मुंबई पुलिस शव की शिनाख्त के लिए सभी पारंपरिक तरीके आजमा चुकी थी. इनमें मुंबई और आसपास के सभी गुमशुदा व्यक्तियों के रिकॉर्ड को खंगाला जा चुका था. कहीं से कोई सुराग नहीं मिला तो नवघर पुलिस ने KEM अस्पताल के फॉरेन्सिक विशेषज्ञों से मदद मांगी.

इस नई तकनीक से पुलिस को चेहरों की शिनाख्त में काफी मदद मिलेगी (फोटो- आजतक) इस नई तकनीक से पुलिस को चेहरों की शिनाख्त में काफी मदद मिलेगी (फोटो- आजतक)

मुंबई पुलिस ने एक शव की शिनाख्त के लिए उन्नत फॉरेन्सिक टेक्नोलॉजी की मदद की ज़रूरत जताई है. पुलिस को 27 जनवरी को मुलुंड में ईस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे पर ये शव मिला था जिसका चेहरा पूरी तरह क्षतविक्षत था. जिन अज्ञात लोगों ने इस शख्स की हत्या की, उन्होंने चेहरे को इस कद्र बिगाड़ दिया कि वो कहीं से भी पहचाना ना जा सके.

मुंबई पुलिस शव की शिनाख्त के लिए सभी पारंपरिक तरीके आजमा चुकी है. इनमें मुंबई और आसपास के सभी गुमशुदा व्यक्तियों के रिकॉर्ड को खंगाला जा चुका है. कहीं से कोई सुराग नहीं मिला तो नवघर पुलिस ने KEM अस्पताल के फॉरेन्सिक विशेषज्ञों से मदद मांगी.

डॉ हरीश पाठक की अगुआई में KEM अस्पताल का फॉरेन्सिक डिपार्टमेंट ने हत्यारों की ओर से बुरी तरह बिगाड़ दिए गए मृतक के चेहरे को री-कंस्ट्रक्ट करने के लिए सुपर इंपोजिशन टेक्नोलॉजी का सहारा लिया. एडवांस टेक्नोलॉजी की मदद से फॉरेन्सिक टीम ने चेहरा री-कंस्ट्रक्ट करके भेजा है. इसके लिए जबड़े और हड्डियों की पैमाइश, ठुड्डी की बनावट, नाक की जगह और त्वचा के विश्लेषण का सहारा लिया गया.

वीडियो सर्विलांस सिस्टम से 2D-3D सुपर इंपोजिशन की तकनीक को शव की शिनाख्त के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है. लेकिन अब ये नई टेक्नोलॉजी खोपड़ी और हड्डियों की पैमाइश की मदद से चेहरों की री-कंस्ट्रक्ट कर रही है. मुलुंड में नवघर पुलिस ने हत्या का केस दर्ज किया. उसके बाद से ही वो मृतक के चेहरे की पहचान के लिए तमाम कोशिश कर रही थी.

लेकिन आखिर उसने 3-D सुपर इंपोजिशन टेक्नोलॉजी की मदद से डा पाठक की फॉरेन्सिक टीम से शव का चेहरा री-कंस्ट्रक्ट कराया. अब इस चेहरे की तस्वीर मुंबई और आसपास के क्षेत्रों के सभी पुलिस स्टेशनों में भेजी गई है. साथ ही राज्य पुलिस के मुख्य कंट्रोल को भी.

बीते साल दिसंबर में भी फॉरेन्सिक एक्सपर्ट्स ने ठाणे पुलिस को एक मर्डर केस की गुत्थी सुलझाने में मदद की थी. उस केस में पुलिस को सिर के बिना लाश मिली थी. उसमें सिर पूरी तरह सड़-गल चुका था. कई महीने कोशिश करने के बाद पुलिस ने उस केस में भी डॉ पाठक की फॉरेन्सिक टीम की मदद ली थी. उस केस में भी 3-D सुपर इंपोजिशन टेक्नोलॉजी से चेहरे को री-कंस्ट्रक्ट किया गया.

उस चेहरे की मदद से ही जांचकर्ता हत्यारों तक पहुंचे. उस केस में पत्नी और उसके प्रेमी ने अपने अवैध संबंध के चलते ही उस शख्स की हत्या की थी. दरअसल उस शख्स को इस अवैध संबंध का पता चल गया था. पत्नी और उसके प्रेमी ने शख्स की हत्या करने के बाद उसके चेहरे को बुरी तरह क्षत विक्षत कर दिया और शव को झाड़ियों में फेंक दिया. हत्यारों को यही लगा था कि चेहरा ना पहचाने जाने के कारण कभी पुलिस की गिरफ्त में नहीं आएंगे.

लेकिन उन्नत फॉरेन्सिक टेक्नोलॉजी ने उनके मंसूबे पर पानी फेर दिया. पुलिस ने पोस्टरों से शव के चेहरे को पहचानने में लोगों से मदद की मांग की थी. मृतक के एक पड़ोसी ने पोस्टर देखकर उसे पहचान लिया. उसने पुलिस को जानकारी दी तो पुलिस मृतक की पत्नी तक पहुंची. उसने पति के गुमशुदा होने की रिपोर्ट नहीं दर्ज कराई थी जबकि उसका इतने महीनों से कुछ अता पता नहीं था.

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