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ED का दावा- सबूत के साथ दिखाए दस्तावेज, पार्थ चटर्जी ने साइन करने से ही मना कर दिया

शिक्षा घोटाले मामले में पार्थ चटर्जी पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहे हैं. ईडी ने दावा किया है कि पूछताछ के दौरान पूरे सबूत के साथ उनके सामने कुछ दस्तावेज रखे गए थे, लेकिन पार्थ ने उन पर साइन करने से ही मना कर दिया.

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पार्थ चटर्जी जांच में नहीं कर रहे सहयोग
पार्थ चटर्जी जांच में नहीं कर रहे सहयोग

शिक्षा घोटाले मामले में सजा काट रहे पार्थ चटर्जी के मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. उन्हें पांच अक्टूबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. लेकिन इन तमाम चुनौतियों के बावजूद भी पार्थ चटर्जी जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं. ईडी ने दावा किया है कि पूछताछ के दौरान पूरे सबूत के साथ उनके सामने कुछ दस्तावेज रखे गए थे, लेकिन पार्थ ने उन पर साइन करने से ही मना कर दिया.

अब जानकारी के लिए बता दें कि ईडी जांच में सामने आया है कि पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी के पास APA utility के नाम से एक कंपनी थी. उस कंपनी के जरिए उन्होंने दूसरी 201 कंपनियों से जमीन खरीदी थी. जांच में पता चला था कि कुछ जमीनों की जो खरीदी हुई, उनमें APA utility का नाम लगातार आया. अब उन्हीं सबूतों के दस्तावेज जब पार्थ चटर्जी को दिखाए गए, उन्होंने उन डीलिंग से ही इनकार कर दिया. यहां तक कह दिया कि वो जमीन वाले दस्तावेज उनके नहीं है. अब ईडी के मुताबिक पूछताछ के दौरान पार्थ ने उन्हीं दस्तावेजों पर अपने हस्ताक्षर नहीं किए. इससे पहले भी कोर्ट में ईडी कई बार कह चुकी है कि पार्थ जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं.

वैसे ईडी को पार्थ चटर्जी और अर्पिता के फ्लैट से कुछ जरूरी दस्तावेज मिले हैं. उन दस्तावेजों में दावा हुआ है कि अर्पिता मुखर्जी एक बच्चे को गोद लेने की तैयारी कर रही थीं. उस प्रक्रिया में भी पार्थ चटर्जी ने ही अर्पिता के लिए NOC जारी की थी. असल में हाल ही में ईडी ने कोलकाता में पार्थ और अर्पिता के फ्लैट पर छापेमारी की थी. वहां पर उन्हें भारी मात्रा में कैश तो मिला ही, इसके साथ-साथ कुछ दस्तावेज भी हाथ लगे. अब ईडी ने PMLA कोर्ट में बताया है कि अर्पिता मुखर्जी एक बच्चे को गोद लेना चाहती थीं. इसको लेकर पार्थ चटर्जी ने ही उनके लिए एनओसी जारी की. एक पारिवारिक दोस्त के रूप में उन्होंने वो एनओसी दी थी. इस बारे में ईडी ने जब पार्थ चटर्जी से सवाल-जवाब किए तो सिर्फ इतना बताया गया कि वे जन प्रतिनिधि हैं और इस प्रकार की एनओसी के लिए उनके पास कई लोग आते हैं.

राजेश साहा का इनपुट

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