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क्या केरल में मिले थे कोयंबटूर और मंगलुरु ब्लास्ट के मास्टरमाइंड? कॉमन टेरर लिंक का पता लगाया जा रहा

मंगलुरु में 19 नवंबर को एक ऑटो में विस्फोट हो गया था. एनआईए को विस्फोट की जांच में पहले दिन से ही शामिल कर लिया गया है. वहीं जांच में पता चला है कि शारिक को बड़े पैमाने पर फंडिंग हुई थी. शारिक ने दो लोगों को बम बनाना भी सिखाया था. उसने धमाके से पहले लगातार अपनी लोकेशन बदली थी और इस दौरान उसने हिंदू पहचान पत्र का इस्तेमाल किया.

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सितंबर में केरल में थे मंगलुरु और कोयंबटूर ब्लास्ट के आरोपी (फाइल फोटो)
सितंबर में केरल में थे मंगलुरु और कोयंबटूर ब्लास्ट के आरोपी (फाइल फोटो)

कर्नाटक के मंगलुरु ऑटोरिक्शा ब्लास्ट केस की जांच के दौरान पता चला है कि कोयंबटूर ब्लास्ट का आरोपी जमीशा मुबिन इलाज के लिए सितंबर के दूसरे हफ्ते में केरल में था. वहीं मंगलुरु विस्फोट का आरोपी शारिक भी उसी समय केरल के अलुवा में था. सूत्रों के मुताबिक शारिक अलुवा में एक लॉज में रुका था. कहा जाता है कि उसने अपने लॉज में ई-कॉमर्स डिलीवरी कराई थी. जमीशा और शारिक दोनों ही आर्थिक रूप से बहुत कमजोर हैं. 

कर्नाटक के डीजीपी प्रवीण सूद ने इस बात की पुष्टि की है कि शारिक की मदद के लिए बड़े पैमाने पर लेन-देन हुआ है. उन्होंने बताया कि वह कई जगहों की यात्रा नहीं कर सकता और बिना आर्थिक मदद के इतनी सारी विस्फोटक सामग्री नहीं खरीद सकता. ईडी की मदद से हम वित्तीय लेन-देन की भी पूछताछ कर रहे हैं.

उन्होंने बताया- मैंने घटना के बारे में आलाधिकारियों से बात की है. शारिक तीर्थहल्ली से है और वह मोबाइल ट्रेनिंग के लिए मैसूर भी गया था. उन्होंने बताया कि इस यह पता किया जा रहा है कि शारिक को कौन फंडिंग कर रहा था.

राडार में 8 लोकेश, 4 लोगों से हो रही पूछताछ

एटीएस प्रमुख आईजी पी विजयन ने बताया कि कोयंबटूर विस्फोट मामले का आरोपी जमीशा केरल में तो था लेकिन शारिक के साथ नहीं था. हालांकि आईजी ने इस बात की पुष्टि नहीं की कि वह अलुवा में था या कहीं और. एडीजीपी इंटेलिजेंस विनोद कुमार ने कहा कि शारिक के साथ बातचीत करने वाले कुछ लोगों से पूछताछ की गई.

जांच में पता चला है कि वह हिंदू पहचान पत्र का इस्तेमाल कर घूम रहा था और अपने ठिकाने बदल रहा था. जांच के लिए 8 अलग-अलग जगह राडार पर  हैं. वहीं इस मामले में 4 लोगों से पूछताछ की जा रही है. उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया है. उन्होंने बताया कि जांच के लिए टीमों को कोयम्बटूर, कोचीन, मैसूर, मंगलुरु, शिवमोग्गा और बेंगलुरु भेजा गया है. 

लॉज में शारिक से कोई मिलने नहीं आया

अलुवा के लॉज स्टाफ के मुताबिक ने बताया कि शारिक ने 13 सितंबर को करीब 4:30 बजे चेक इन किया था और 18 सितंबर की शाम को चेक आउट किया. उसने कमरा लेने के लिए फर्जी आईडी और हिंदू नाम का इस्तेमाल किया था. उसने बताया कि लॉच की ओपनिंग 2 सितंबर को ही हुई थी, इसलिए शुरुआती दिनों में वे होटल में आने वालों पर ध्यान नहीं दे पाए.

उसने बताया कि इन पांच दिनों में होटल में उससे कोई नहीं मिलने आया क्योंकि गेस्ट को कमरे में जाने की अनुमति नहीं थी. फिलहाल पुलिस ने लॉच में ठहरने वालों का ब्योरा जुटाने के लिए गेस्ट रिकॉर्ड बुक जब्त कर ली है.

दो लोगों को बम बनाना भी सिखाया

पुलिस पूछताछ कर रही है कि क्या शारिक अल हयात (ISIS सोशल मीडिया ग्रुप) का सदस्य था. पुलिस को पता चला है कि वह टेलीग्राम के जरिए इस समूह से जुड़ा था. उसने अपने 2 सहयोगियों को बम बनाना भी सिखाया है. पुलिस यह भी पूछताछ कर रही है कि क्या शारिक और उसके परिवार के सदस्यों के बैंक खाते में कोई एकमुश्त पैसा जमा किया गया था.

बेंगलुरु एडीजी ने लोगों को दी सीख

बेंगलुरु के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर ने कहा कि मंगलुरु विस्फोट मामले से हमें सीख लेनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर आप आधार कार्ड खो जाता है तो सावधान रहें. इसका दुरुपयोग रोकने के लिए यूआईडीएआई साइट पर उपलब्ध लॉक और अनलॉक सुविधा का इस्तेमाल करें. उन्होंने कहा कि इसी तरह किरायेदारों को रखने से पहले पूरी तरह से वैरिफिकेशन कर लें.

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