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बाहुबली मुख्तार अंसारी के काफिले पर जब डॉन ने की थी अंधाधुंध फायरिंग, जानिए क्या है उसर चट्टी कांड

मऊ से तत्कालीन विधायक मुख्तार अंसारी के काफिले पर जानलेवा हमला करने के मामले में 12 सालों से वाराणसी जेल में बंद माफिया डॉन बृजेश सिंह को जमानत मिल गई है. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सशर्त जमानत दी है. आइए जानते हैं कि उसर चट्टी कांड क्या था.

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माफिया डॉन बृजेश सिंह और मुख्तार अंसारी (फाइल फोटो)
माफिया डॉन बृजेश सिंह और मुख्तार अंसारी (फाइल फोटो)

21 साल पुराने केस में वाराणसी जेल में बंद माफिया डॉन बृजेश सिंह को सशर्त जमानत मिल गई है. 12 सालों से वाराणसी जेल में बंद बृजेश सिंह पर मऊ के तत्कालीन विधायक और बाहुबली मुख्तार अंसारी पर जानलेवा हमला करने का आरोप है. मुख्तार अंसारी इन दिनों बांदा जेल में बंद हैं. आइए जानते हैं कि मुख्तार और बृजेश के बीच अदावत की क्या कहानी है-

बृजेश सिंह और मुख्तार अंसारी. इन दोनों की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है. इस फिल्म में कोई हीरो नहीं है. यह कहानी है दो विलेन्स और उनकी दुश्मनी की. ऐसी दुश्मनी, जिसने पूरे पूर्वांचल को हिला कर रख दिया और कई लोगों की जानें चली गई. हैरान करने वाली बात है कि एक दौर में बृजेश सिंह और मुख्तार अंसारी कभी करीबी हुआ करते थे. 

बृजेश सिंह और मुख्तार अंसारी की दोस्ती, दुश्मनी में बदल गई. मामला तब बिगड़ा जब साल 1991 में वाराणसी के पिंडरा से विधायक अजय राय के भाई अवधेश राय की हत्या हो गई. अवधेश की मौत की खबर सुनकर बृजेश का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. अवधेश की हत्या में मुख्तार अंसारी और उसके गैंग का नाम सामने आया. 

इसके बृजेश सिंह और मुख्तार अंसारी की अदावत बढ़ गई. 1996 में मुख्तार अंसारी पहली बार विधायक बना और उसका रुतबा बढ़ गया. इसके बाद से बृजेश सिंह के पीछे पुलिस पड़ गई. एक तरह से कहे तो बृजेश सिंह की ताकत सिमटती जा रही थी. ऐसे में 2001 में बृजेश सिंह ने मुख्तार अंसारी को खत्म करने का प्लान बनाया.

गाजीपुर में 15 जुलाई 2001 को मोहम्मदाबाद थानाक्षेत्र के उसर चट्टी इलाके में तत्कालीन मऊ से विधायक मुख्तार अंसारी के काफिले पर बृजेश सिंह और त्रिभुवन सिंह ने मिलकर जानलेवा हमला किया था. दिन में दोपहर 12:30 बजे हुए इस हमले में मुख्तार अंसारी के गनर समेत तीन लोगों की मौत हुई थी. इस हमले में बृजेश सिंह भी घायल हुआ था.

तभी यह चर्चा हुई बृजेश सिंह क्रॉस फायरिंग में मारा गया. सालों तक बृजेश सिंह अंडर ग्राउंड रहा और उसने अपना कारोबार छिपकर संचालित किया. बृजेश सिंह पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने 5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था, जब दिल्ली स्पेशल सेल ने उसे भुवनेश्वर से बड़े नाटकीय ढंग से गिरफ्तार किया. 

दिल्ली स्पेशल सेल के द्वारा की गई इस गिरफ्तारी के बाद बृजेश सिंह यूपी आ गया और लंबे समय से वाराणसी जेल में बंद है. पिछले 12 साल से वह वाराणसी जेल में बंद है. अब इसी उसर चट्टी फायरिंग केस में बृजेश सिंह को इलाहाबाद हाई कोर्ट से जमानत मिल गई है. बता दें कि ब्रजेश सिंह पर 41 आपराधिक मामले दर्ज थे. इनमें से 15 में उसे बरी किया जा चुका है. 

 

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