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दिल्ली दंगों का एक सालः आपने कोई भड़काऊ भाषण दिया? बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने दिया था ये जवाब

भड़काऊ भाषण देने और दंगों में संदिग्ध भूमिका को लेकर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने बीजेपी नेता कपिल मिश्रा का बयान 27 जुलाई 2020 को दर्ज किया था. ये बयान सवाल और जवाब के रूप में दर्ज किया गया और पुलिस ने कपिल मिश्रा के बयान को दंगों की चार्जशीट का हिस्सा बनाया.

बीजेपी नेता कपिल मिश्रा पर भड़काऊ भाषण देने के आरोप लगे थे बीजेपी नेता कपिल मिश्रा पर भड़काऊ भाषण देने के आरोप लगे थे
स्टोरी हाइलाइट्स
  • फरवरी 2020 में दंगों से झुलसा था नॉर्थ ईस्ट दिल्ली
  • हिंसा के दौरान चली गई थी 53 लोगों की जान
  • कपिल मिश्रा को लेकर HC ने दिल्ली पुलिस को लगाई थी फटकार


दिल्ली दंगों में भड़काऊ भाषण देने और दंगों में संदिग्ध भूमिका को लेकर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने बीजेपी नेता कपिल मिश्रा का बयान 27 जुलाई 2020 को दर्ज किया था. ये बयान सवाल और जबाब के रूप में दर्ज किया गया और पुलिस ने कपिल मिश्रा के बयान को दंगों की चार्जशीट का हिस्सा बनाया. दिल्ली पुलिस ने क्या सवाल किए और कपिल मिश्रा ने क्या जवाब दिए आप भी जानिए.  

सवाल- पहला सवाल था कि तुमने उत्तर पूर्वी दिल्ली का दौरा क्यों किया? 
जवाब- यमुना विहार में मेरा घर है. मेरा घर नार्थ ईस्ट डिस्ट्रिक्ट में ही आता है. दंगाइयों ने दंगे के दौरान जो पेट्रोल पंप जलाये वो मेरे घर के पास ही थे. 

सवाल- तुमने उत्तर पूर्वी दिल्ली का किस दिन और किस तारीख में दौर किया? 
जवाब- क्योंकि मेरा घर उसी इलाके में है, मेरा जाने-आने का कोई वक़्त तय नहीं है. 

सवाल- क्या तुम खुद मौजपुर गए थे? 
जवाब- जी हां ,मैं अपनी पर्सनल कैपेसिटी में 3 से 3.30 बजे मौजपुर पहुंच गया था. 

सवाल- तुम्हारे जाने का उद्देश्य क्या था? 
जवाब- क्योंकि कुछ लोग फेसबुक पर 2-3 दिन से मुहिम चला रहे थे कि रोड ब्लॉक होने की वजह से उन्हें बहुत ज़्यादा समस्याओं का सामने करना पड़ रहा है. लोग आफिस नहीं जा पा रहे हैं. बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं. ज़रूरी सुविधाएं लोगों तक नहीं पहुच पा रही हैं. इसलिए मैं उन लोगों की समस्याओं को पुलिस तक पहुंचाने और पुलिस की मदद से बंद रोड को खुलवाने की पेशकश करने वहां गया था. जाने से पहले मैंने डीसीपी सूर्या साहब से फ़ोन पर बात की थी. 

सवाल- क्या तुमने उत्तर पूर्वी दिल्ली में 23 फरवरी को कोई भाषण दिया था? उस भाषण में क्या था? 
जवाब- नहीं मैंने कोई स्पीच नहीं दी. मैंने केवल पुलिस को तीन दिनों में रोड खुलवाने के लिए कहा था और ये भी कहा था कि अगर तीन दिन में रोड नहीं खुली तो हम रोड खुलवाने के लिए धरने पर बैठेंगे. 

सवाल- इस स्पीच का उद्देश्य क्या था? 
जवाब- मैंने पहले ही कहा ,मैंने कोई स्पीच नहीं दी. मेरा मकसद केवल रोड खुलवाना था. जिससे लोगों की समस्याओं का निपटारा हो सके. 

सवाल- क्या तुम्हारे पास स्पीच की कोई कॉपी है? 
जवाब- मैंने पहले ही कह दिया, मैंने कोई स्पीच नहीं दी. 

सवाल- क्या तुम किसी दूसरे धरना स्थल पर गए थे? 
जवाब- नहीं मैं किसी धरना स्थल पर नहीं गया. 

सवाल- क्या तुम वह अकेले गए थे? 
जवाब- हां ,मैं अकेले ही मौजपुर चौक गया था. वह पर मेरे पहुंचने से पहले ही भीड़ जमा थी. लोकल होने के नाते मैं वहां के कई दुकानदारों और लोगों को जानता था. 

सवाल- तुम्हारी उस इलाके के बारे में निजी राय क्या है? 
जवाब- मैंने वहां जाने से पहले डीसीपी सूर्या साहब से बात की थी, लोगों ने बताया कि वहां पर करीब 2 बजकर 45 मिनट पर पथराव शुरू हो चुका था. मेरे सामने भी लोग दौड़ दौड़ कर आ रहे थे और कह रहे थे कि भीड़ पथराव कर रही है. जाफराबाद की तरफ और बेरिकेड के पास काफी भीड़ थी. जिसको पुलिस बड़ी मुश्किल से रोक पा रही थी. अगर पुलिस न होती तो वे लोग आगे आ जाते. मैं वहां करीब साढ़े 4 बजे तक रुका. मुस्लिम भीड़ पथराव कर रही थी और भीड़ को पुलिस ने हमसे 300 मीटर पहले रोका हुआ था. मुझे लोगों ने बताया कि लोग रोड खुलवाने के लिए करीब 2 बजे से इकट्ठा होना शुरू हो गए थे. मेरे सामने उस वक़्त 50-60 लोगों की भीड़ थी. दूसरी तरफ मुसलिमों की 500 से 700 की भीड़ थी, मैंने स्थानीय लोगों से 3.30 से 4.30 बजे तक बात की और रोड खुलवाने के लिए पुलिस से बार-बार आग्रह किया. लोगों की परेशानी से अवगत कराया.

ये रोड पिछले 2-3 महीने से मुस्लिम लोगों द्वारा ब्लॉक किया हुआ था. ये लोग कभी सर्विस रोड तो कभी मैन रोड बंद कर देते थे. जिस वजह से लोगों को अपने काम धंधे पर जाने में, बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी हो रही थी. लोगों का जीना दूभर हो गया था. मुस्लिम लोगों ने आतंक का माहौल बना रखा था. मरीजों को हॉस्पिटल ले जाने व लोगों को हॉस्पिटल ले जाने में एम्बुलेंस को दिक्कत हो रहा थी. इसी वजह से स्थानीय लोगों के फ़ोन कॉल्स आने लगे. लोगों की फेसबुक पोस्ट पढ़कर मैं पुलिस से रोड खुलवाने का आग्रह करने वहां गया था. बातचीत में मैंने डीसीपी साहब से कहा कि अब हम जा रहे हैं. आप रोड खुलवा दें. आप रोड खुलवा दें नहीं तो हम रोड खुलवाने के लिए धरने पर बैठ जाएंगे. उसके बाद 4 बजकर 35 मिनट पर मैं वहां से निकल गया. 

सवाल- तुमने वहां कितना टाइम व्यतीत किया? 
जवाब- मैं वहां करीब एक घंटा 3.30 से 4.30 तक रुका था. 

सवाल- क्या वहां तुम्हारा कोई इन्विटेशन था? 
जवाब- मैं फेसबुक की पोस्ट पढ़कर गया था. 

दरअसल, सच तो यह है कि 22 फरवरी को जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के पास हज़ारों की संख्या में लोग जुटे थे. पुलिस का कहना है कि 66 फ़ुटा रोड पर चंद्रशेखर आज़ाद के भारत बंद आह्वान पर भीड़ जुटी और सरकार के खिलाफ़ नारेबाज़ी की गई. जबकि उसी दिन बीजेपी नेता कपिल मिश्रा के उस बयान का चार्जशीट में कहीं कोई ज़िक्र नहीं किया गया है. जिसमें उन्होंने सीएए के खिलाफ़ प्रदर्शन कर रहे लोगों को तीन दिन का अल्टीमेटम पुलिस की मौजूदगी में दिया था. 

जबकि वो भड़काऊ बयान कई वीडियो कैमरों में कैद हुआ था. मौजपुर में कपिल मिश्रा सीएए के समर्थन में हो रही रैली में पहुंचे थे. उन्होंने पुलिस के एक डिप्टी कमिश्नर की मौजूदगी में कहा था, "डीसीपी साहब हमारे सामने खड़े हैं, मैं आप सबके बिहाफ़ पर कह रहा हूं. ट्रंप के जाने तक तो हम शांति से जा रहे हैं लेकिन उसके बाद हम आपकी भी नहीं सुनेंगे. अगर रास्ते खाली नहीं हुए तो ट्रंप के जाने तक आप जाफ़राबाद और चांदबाग खाली करवा लीजिए. ऐसी आपसे विनती है, वरना उसके बाद हमें रोड पर आना पड़ेगा."  कपिल मिश्रा से पूछताछ के बाद इस मामले में क्या जांच की गई. इसका कोई विश्लेषण दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में मौजूद नहीं है. 

 

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