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अफगानिस्तान में तालिबान शासन के 100 दिन पूरे, जानिए जमीन पर कितने बदल चुके हैं हालात?

अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के 100 दिन पूरे हो गए हैं. तालिबान ने इसी साल 15 अगस्त को अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था. उसके बाद से वहां के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं. लोगों के पास न तो खाने को खाना है और न ही उन्हें सुरक्षा मिल रही है. अफगानिस्तान के हालातों को जानने के लिए पढ़ें ये रिपोर्ट...

तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान के हालात बिगड़ते जा रहे हैं. (फाइल फोटो-AP/PTI) तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान के हालात बिगड़ते जा रहे हैं. (फाइल फोटो-AP/PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 15 अगस्त को शुरू हुआ था तालिबान राज
  • अफगानिस्तान में भुखमरी जैसे हालात बने
  • 95% लोगों को भरपेट खाना नहीं मिल रहा

अफगानिस्तान में तालिबान राज के 100 दिन पूरे हो गए हैं. इन 100 दिनों में अफगानिस्तान के हालात पूरी तरह बदल गए हैं. एक तरह से यूं कहें कि इन 100 दिनों में अफगानिस्तान फिर से 1990 के दशक में चला गया है. 

अमेरिका सेना की वापसी के बाद तालिबान ने 15 अगस्त को अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था. उसके बाद अफगानिस्तान में जो पलायन का दौर शुरू हुआ था, वो आज भी थमने का नाम नहीं ले रहा है. 

तालिबान अपनी सत्ता पर दुनिया से मंजूरी की मुहर लगवाना चाहता है, लेकिन ऐसा अभी तक हो नहीं पाया है. और तस्वीर अब ये है कि अफगानिस्तान में चरमराती अर्थव्यवस्था के बीच इंसानियत खतरे में है. लाखों अफगानियों के सामने दो वक्त की रोटी तक सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है. हर रोज भूख, अफगानी लोगों का इम्तिहान ले रही है. उन्हें ये तक नहीं पता कि अगले वक्त का खाना नसीब होगा भी या नहीं.

किसी देश या उस देश की सरकार, या वहां के हालात को परखने के लिए यकीनन सौ दिन बहुत ज़्यादा नहीं होते हैं लेकिन अफगानिस्तान के लिए बीते सौ दिन का हाल जानना जरूरी इसलिए है क्योंकि वहां एक ऐसी सरकार जिसने देश की दशा, दिशा और हालात बदल कर रख दिए हैं जिसने अपनी जिद की वजह से आतंक के माहौल के अलावा भूख, बेरोज़गारी, अशिक्षा के हालात पैदा कर दिए हैं. तालिबान के कब्जे के 100 दिन बाद कैसे हैं अफगानिस्तान के हालात? जानते हैं इस रिपोर्ट में...

20 साल बाद अमेरिका आउट, तालिबान इन

वो 15 अगस्त का दिन था जब अमेरिकी हथियारों से लैस तालिबान के लड़ाके काबुल पर कब्ज़ा करने के बाद राष्ट्रपति भवन में दाखिल हुए. अफगानिस्तान में दहशत की इस रीएंट्री की तस्वीर पूरी दुनिया में देखी गई. इसके कुछ देर पहले तत्कालीन राष्ट्रपति अशरफ गनी ने एक छोटा सा भाषण दिया और जनता को बेसहारा छोड़कर देश के बाहर चले गए. तालिबान के काबुल पर कब्जे के बाद अमेरिका और नाटो सेनाओं की वापसी के काम में तेजी आई और आखिरकार 20 साल बाद अमेरिकी सेना अफगानिस्तान से रुखसत हो गई. 

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तस्वीर 15 अगस्त की है, जब तालिबानियों ने काबुल में राष्ट्रपति भवन पर कब्जा कर लिया था. (फाइल फोटो-AP/PTI)

आर्थिक मोर्चे पर तालिबान की सरकार 'फेल'

अफगानिस्तान की कमान अब उन हाथों में थी जिनसे निजात दिलाने के लिए अमेरिकी सेना 20 साल पहले अफगानिस्तान में दाखिल हुई थी सत्ता पर काबिज होने के बाद दुनिया के नाम तालिबान ने अपना पहला मैसेज दिया कि वो अब पहले जैसा तालिबान नहीं है बल्कि दुनिया के साथ अच्छे रिश्ते रखना चाहता है. 100 दिन के हो चुके तालिबान के शासन को इक्का-दुक्का मुल्क को छोड़कर किसी ने मान्यता नहीं दी. इनमें पाकिस्तान अहम है क्योंकि अफगानिस्तान को लेकर उसके अपने इंट्रेस्ट है, वो तालिबान से भारत को उखाड़ना चाहता है. लेकिन इन सबसे अलग मौजूदा अफगानिस्तान का सच ये है कि पिछले 100 दिनों में मुल्क की अर्थव्यवस्था काल के गर्त में समा चुकी है, जनता भूख से मर रही, बच्चों की पढ़ाई भगवान भरोसे है. रोजगार नहीं है. सरकार के पास अर्थव्यवस्था सुधारने को लेकर कोई पॉलिसी तक नहीं है. कुल मिलाकर तालिबान चीन पाकिस्तान और कतर की मदद के भरोसे है.

भुखमरी से हालात खराब, 95% लोगों के पास भरपेट खाने को नहीं

तालिबान की सरकार उन्हें दो जून की रोटी तक मुहैय्या कराने में भी फेल हो गई है. तालिबान के काबुल पर कब्ज़े के बाद से अफगानिस्तान के सामने भुखमरी की दिक्कत भी खड़ी हो गई है. देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह लड़खड़ा गई है. पश्चिमी देशों ने अफगानिस्तान को मिलने वाली मदद पर रोक लगा दी है. संयुक्त राष्ट्र ने आगाह किया है कि अफगानिस्तान में लाखों लोगों के सामने भुखमरी का खतरा है. सर्दी के मौसम में लोगों की चुनौती और बढ़ सकती है. 

संयुक्त राष्ट्र ने दुनिया से अपील की है कि वो अफगानिस्तान की ओर से मुंह न फेरें और दिक्कत में घिरे लोगों की मदद करें. अफगानिस्तान के हालात उससे ज़्यादा बुरे हैं जितना आप सोच सकते हैं. 95 फीसदी लोगों के पास भरपेट खाना नहीं है. भुखमरी की वजह से करीब ढाई करोड़ लोगों की हालत खराब है. देश के लिए अगले 6 महीने बहुत भयानक होने वाले हैं. अंदेशा है कि ये देश धरती पर नरक बनने जा रहा है.

धीरे-धीरे नरक बनता जा रहा है अफगानिस्तान. (फाइल फोटो-AP/PTI)

मुल्क की हिफाज़त करने में 'फेल'

तालिबान सरकार का रवैय्या अभी भी ऐसा है जैसे किसी चरमपंथी संगठनों का होता है. पिछले 100 दिनों में भी वो अभी तक ये समझ नहीं पाए हैं कि मुल्क और मुल्क के लोगों की जिम्मेदारी उन पर है. सरकार चलाना तो छोड़िए तालिबान वो करने में भी कामयाब नहीं हो पा रहे हैं जिसमें वो सबसे अच्छे हैं. ISIS आए दिन अफगानिस्तान में हमला कर रहा है, खुद तालिबान सरकार में शामिल लोगों को निशाना बना रहा है, उन्हें मार रहा है लेकिन हालात तालिबान के काबू में आते नहीं दिख रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक अफगानिस्तान में तकरीबन हर जगह इस्लामिक स्टेट की मौजूदगी है, और वो लगातार मुल्क के खिलाफ साज़िश और धमाके कर रहे हैं. सुरक्षा के मोर्चे पर इस्लामिक स्टेट तालिबान के सामने सबसे बड़ी चुनौती है. 

पहला बड़ा हमला काबुल एयरपोर्ट पर हुआ, इसमें सौ से ज़्यादा लोगों की मौत हुई. मरने वालों में अमेरिकी नागरिक भी शामिल थे. इसके बाद इस्लामिक स्टेट ने कुंदुज, कंधार और काबुल पर हमले किए, इन हमलों में कई और लोगों की मौत हुई. हाल ही में तालिबान ने इस्लामिक स्टेट के खिलाफ पूर्वी अफगानिस्तान में अभियान शुरू करने की जानकारी दी थी.

तालिबान ने पूर्व सरकार के खिलाफ जो रणनीति आजमाई थी, इस्लामिक स्टेट के लड़ाके के ख़िलाफ़ वही तरीके आजमाएगा. इस्लामिक स्टेट के लड़ाके तालिबानियों की तरह ही हमला कर छिप जाने की रणनीति का इस्तेमाल कर रहे हैं. आईएसआईएस खुरासान सड़कों के किनारे बम लगाना और छिप कर हत्याएं करने जैसे घटनाओं को अंजाम दे रहा है. ISIS का आरोप है कि तालिबान ने इस्लाम के नाम पर सरकार जरूर बनाई लेकिन उसे लेकर वो कट्टर नहीं है.

 

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