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UAPA के तहत पिछले 3 साल में 3005 केस दर्ज, लेकिन चार्जशीट सिर्फ 27 फीसदी केसों में

गृह मंत्रालय द्वारा राज्यसभा में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, 2016 और 2018 के बीच 3,005 मामले आतंकवाद-रोधी कानून के तहत दर्ज किए गए थे.

सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

केंद्र सरकार ने संसद को बताया है कि 2016 के बाद से गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के मामलों में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन चार्जशीट दाखिल करने की दर कम रही है. गृह मंत्रालय द्वारा राज्यसभा में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, 2016 और 2018 के बीच 3,005 मामले आतंकवाद-रोधी कानून के तहत दर्ज किए गए थे.

हालांकि, सिर्फ 821 मामलों में चार्जशीट दायर की गई थी. इससे जाहिर होता है कि सिर्फ 27 फीसदी केस में ही जांच पूरी हो पाई. यूएपीए से जुड़े सवाल का केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने एक लिखित जवाब में राज्य सभा को बताया कि देश भर में क्रमशः 2016, 2017 और 2018 में कुल 922, 901 और 1,182 यूएपीए मामले दर्ज किए गए थे.

इन मामलों में, 3,974 लोग गिरफ्तार किए गए: 2016 में 999, 2017 में 1,554 और 2018 में 1,421 लोग. गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने सदन को यह भी बताया कि 2017 में 123 मामलों में एक साल से अधिक समय से जांच लंबित थी, जबकि 2018 में यह आंकड़ा 62 था.

एक अन्य सवाल के जवाब में गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने राज्यसभा को बताया कि 2017 और 2018 में देश भर में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत 1,198 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया था. रेड्डी ने कहा कि उनमें से 563 लोग सलाखों के पीछे हैं. मध्य प्रदेश में सबसे अधिक 795 और उत्तर प्रदेश में 338 लोगों को हिरासत में लिया गया.

2018 में एनएसए के तहत कुल 697 लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिनमें से 406 को रिहा कर दिया गया था. 2017 में, 501 लोगों को हिरासत में लिया गया और 229 को रिहा किया गया. 12 राज्यों ने इस्लामिक स्टेट के प्रभाव को देखा था और दक्षिणी के राज्य इससे बुरी तरह प्रभावित हुए थे.

गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि आईएस अपनी विचारधारा के प्रचार के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहा था और एजेंसियां ​​साइबर स्पेस पर कड़ी नजर रख रही थीं.

 

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