scorecardresearch
 

दिल्ली: ऑटो वाले की समझदारी ने बड़ा अपराध होने से रोका, हाथ के टैटू से मिला सुराग

दिल्ली में एक ऑटो वाले की समझदारी ने बड़े अपराध को होने से रोक लिया. उसकी मदद से दिल्ली पुलिस ने कारतूस तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है. अब पुलिस इस पूरे मामले में आतंकी घटना के तार तलाशने में जुटी है. 15 अगस्त से ठीक पहले इतनी बड़ी मात्रा में कारतूस बरामद होने के बाद दिल्ली पुलिस सतर्क है.

X
सांकेतिक फोटो सांकेतिक फोटो
स्टोरी हाइलाइट्स
  • देहरादून और जौनपुर से जुड़े तार
  • मेरठ की जेल में रची गई साजिश

पुलिस और सरकार हमेशा लोगों से आसपास के माहौल को लेकर चौकन्ना रहने के लिए कहते हैं. दिल्ली में एक ऑटो वाले के इसी चौकन्नेपन और समझदारी ने बड़ा अपराध होने से रोक लिया. दिल्ली पुलिस ने उसकी मदद से एक बड़े कारतूस तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया है.

देहरादून और जौनपुर से जुड़े तार

पूर्वी रेंज के एडिशनल कमिश्नर विक्रमजीत सिंह ने बताया कि कारतूस तस्करी की ये पूरी साजिश उत्तर प्रदेश के मेरठ की जेल में बन्द अनिल नाम के गैंगस्टर ने रची थी. उसने राज्य के ही जौनपुर के सद्दाम की बात उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के परिक्षित नेगी से करवाई थी. सद्दाम को हाई कैलिबर कारतूस की जरूरत थी. जबकि परीक्षित नेगी का देहरादून में एक गन हाउस है. दिल्ली पुलिस ने लगभग एक हफ्ते तक इस तस्करी का भंडाफोड़ करने के लिए ऑपरेशन चलाया और अब तक 2251 कारतूस बरामद किए हैं.

ऑटो वाले ने दी पुलिस को सूचना

दिल्ली पुलिस को इस गैंग की जानकारी आनंद विहार के ऑटो ड्राइवर ने दी. उसे दो लड़कों पर शक हुआ, जिसके बाद उसने वहां मौजूद सिपाहियों को बताया कि लड़कों के पास बेहद भारी बैग है और इसमें कुछ गलत समान हो सकता है. इसके बाद जब पुलिस ने उन दोनों लड़कों के सामान की जांच की, तो उसमें भारी मात्रा में हाई कैलीबर कारतूस मिले. इन लड़कों की पहचान राशिद और अजमल के तौर पर की गई है. 

हाथ के टैटू से मिला सुराग

गिरफ्त में आए लड़कों ने पुलिस को बताया कि वो ये कारतूस देहरादून से लेकर आ रहे हैं. आगे इन्हें पहले लखनऊ और फिर जौनपुर पहुंचाया जाना था. उन्होंने बताया कि जिस शख्स ने उन्हें देहरादून में इनकी डिलीवरी दी, उसके हाथों पर टैटू बना था. उसने एक पुल के नीचे बुला कर ये कारतूस दिए थे. इसी जानकारी के आधार पर पुलिस ने रॉयल गन हाउस के मालिक परीक्षित नेगी को पहले जीरो इन किया और फिर उसे गिरफ्तार कर लिया. जांच में पता लगा कि हेर-फेर करके परीक्षित नेगी कई बार अवैध रूप से कारतूस बेच चुका है.

हर एंगल से इस पूरी घटना की जांच करने के साथ ही पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं इस पूरे नेटवर्क का तार किसी आतंकी संगठन से तो नहीं जुड़े है. 15 अगस्त से ठीक पहले इतनी बड़ी मात्रा में कारतूस बरामद होने के बाद दिल्ली पुलिस सतर्क है.

 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें