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6 शूटर, नए हथियार, 1 करोड़ का खर्च: ऐसी प्लानिंग से अंजाम दिया गया था मूसेवाला का मर्डर

लॉरेंस विश्नोई और गोल्डी बराड़ ने 6 शूटरों को सुपारी देकर पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला का कत्ल तो करवा दिया, लेकिन सिद्धू मूसेवाला के कत्ल में दोनों ने आखिर कितने रुपये खर्च किए? तो मूसेवाला मर्डर केस में गिरफ्तार शूटरों से हुई पूछताछ में अब इस बात का खुलासा हो चुका है.

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सिद्धू मूसेवाला की हत्या के लिए आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया था
सिद्धू मूसेवाला की हत्या के लिए आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया था

सिद्धू मूसेवाला का कत्ल करने के लिए हर शूटर को पांच-पांच लाख रुपये दिए गए थे. कातिलों को पनाह देने वालों को अलग से पैसे दिए गए. मूसेवाला का मर्डर करने के लिए नए हथियार खरीदे गए थे. कत्ल की प्लानिंग से लेकर कत्ल को अंजाम देने तक का कुल खर्चा करीब एक करोड़ रुपये था. ये रकम गैंगस्टर लॉरेंस विश्नोई और गोल्डी बरार ने दी थी.

हत्यारोपियों से पूछताछ में खुलासा
लॉरेंस विश्नोई और गोल्डी बराड़ ने 6 शूटरों को सुपारी देकर पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला का कत्ल तो करवा दिया, लेकिन सिद्धू मूसेवाला के कत्ल में दोनों ने आखिर कितने रुपये खर्च किए? तो मूसेवाला मर्डर केस में गिरफ्तार शूटरों से हुई पूछताछ में अब इस बात का खुलासा हो चुका है. एक मोटे अनुमान के मुताबिक गैंगस्टर गोल्डी बराड़ और लॉरेंस विश्नोई ने सिद्धू मूसेवाला की जान लेने के लिए पूरे एक करोड़ रुपये खर्च किए और इन एक करोड़ रुपयों में शूटरों को दी गई रकम, उनके ठहरने-खाने का खर्चा, कत्ल में इस्तेमाल किए गए हथियरों का इंतज़ाम करने में लगी रकम और रेकी करने का खर्च शामिल है.

बड़े पैमाने पर की गई मर्डर की प्लानिंग
मूसेवाला की हत्या के बाद से ही इस मामले को लेकर तरह-तरह बातें सुनने में आ रही थी. तफ्तीश के दौरान भी ये साफ हो गया कि इस मर्डर केस की प्लानिंग बेहद बडे पैमाने पर की गई और पुलिस को धोखा देने और कत्ल के बाद कातिलों के छिपने की पूरी तैयारी भी पहले ही कर ली गई थी. यहां तक कि कत्ल में अलग-अलग गैंग्स से शूटर हायर किए गए थे. ताकि पुलिस के लिए उन्हें लोकेट करना मुश्किल हो जाए. ऐसे में इस बात को लेकर भी कयास लगाए जा रहे थे कि आखिर इस पूरी वारदात को अंजाम देने में कितने रुपये खर्च हुए होंगे? तो अब पुलिस सूत्रों ने इस बात का भी खुलासा कर दिया है.

1 करोड़ रुपये में हुआ सिद्धू मूसेवाला का क़त्ल!
सूत्रों की मानें तो गोल्डी बराड़ और लॉरेंस ने इस काम के लिए एक करोड़ रुपये खर्च किए. इस मामले के गिरफ्तार तीन शूटर प्रियव्रत फौजी, कुलदीप उर्फ कशिश और अंकित सिरसा ने पुलिस की पूछताछ में कुछ ऐसी ही बातें कही हैं. अंकित और कशिश ने जहां गोल्डी बराड़ से इस कांड के लिए पांच-पांच लाख रुपये मिलने की बात कही है, वहीं प्रियव्रत ने पांच-पांच लाख के इनाम के साथ-साथ तकरीबन पूरे खर्चे का ब्यौरा दिया है. पूछताछ में प्रियव्रत ने पुलिस को बताया है कि गोल्डी बराड हर साल में मूसेवाला का कत्ल करवाना चाहता था और उसने इसके लिए किसी भी हद तक जाने की बात कही थी. 

हत्या के लिए मुंहमांगी कीमत देने का वादा
गोल्डी ने इसके लिए उससे राब्ता किया और शूटरों की टीम बनाने की बात कही. उसी के कहने पर प्रियव्रत ने अपनी टीम में अंकित सिरसा, दीपक मुंडी और कुलदीप उर्फ कशिश को शामिल किया. चूंकि काम बड़ा था, गोल्डी बराड़ ने पहले ही शूटरों को मुंहमांगी कीमत देने का वादा किया था. और इस वादे के तहत सभी शूटरों को पांच-पांच लाख रुपये देने की बात कही गई थी. पुलिस की मानें तो शूटरों ने अपने तौर पर हथियारों का इंतज़ाम तो किया था, लेकिन गोल्डी बराड ने खुद भी एके 47 समेत दूसरे अत्याधुनिक हथियारों की व्यवस्था करवाई थी, ताकि मूसेवाला पर किया गया वार किसी भी कीमत पर खाली ना जाए. 

प्रियव्रत ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि जब उसने इस केस में शामिल बाकि शूटरों के बारे में पूछा था, तो उसे गोल्डी ने पंजाब मॉड्यूल में शामिल शूटरों की जानकारी दी और बताया था कि किस तरह काम को अंजाम देने के बाद उन्हें मानसा से आगे निकलना है और किस तरह उसके बाकी लोग इस वारदात के बाद उनके रहने-ठहरने का इंतज़ाम करनेवाले हैं.

हर गैंगस्टर के गुर्गे को मिला था अलग काम
सूत्रों की मानें तो गोल्डी बराड ने इस काम को अंजाम दिलाने के लिए देश के दस अलग-अलग जेलों में बंद कम से 60 गैंगस्टरों से बात की थी और बहुत चुन-चुन कर टीम बनाई थी. इसमें हर गैंगस्टर और उसके गुर्गे को उसके हिस्से का काम पहले ही बता दिया गया था. मसलन, मूसेवाला के कत्ल के लिए किसे रेकी करनी है. किन-किन लोगों को मूसेवाला पर हमला करना है, किन-किन लोगों को वारदात को अंजाम देने बाद शूटरों को भगाने में मदद करनी है, किनको शूटरों के लिए छुपने के लिए होटल का इंतज़ाम करना है, किसको गाड़ी देनी है और किसे कत्ल में इसेतमाल किया गया हथियार लेकर लेकर अपने ठिकाने पर लौट जाना है. कहने का मतलब ये कि गोल्डी बराड ने हर किसी के हिस्से का काम पहले ही तय कर रखा था. 

एक-दूसरे से भी अनजान थे हत्याकांड में शामिल आरोपी
पुलिस सूत्रों का भी कहना है कि जितने पेशेवर तरीके से इस वारदात को अंजाम दिया गया, आम तौर पर कत्ल और सुपारी किलिंग के मामले में ऐसा देखने को नहीं मिलता है. इस वारदात में शामिल बहुत से लोग तो ऐसे थे, जो एक दूसरे को पहले से जानते तक नहीं थे, और बस गोल्डी के इशारे पर काम कर रहे थे. मसलन, वारदात को अंजाम देने बाद फरारी के दौरान जिन लोगों ने शूटरों के लिए गाड़ी, होटल वगैरह का इंतजाम किया, उनमें से ज़्यादातर ऐसे थे, जिनसे शूटर पहले कभी मिले तक नहीं थे. बस उसने जगह और वक्त के मुताबिक लोग मिलते गए, जो फरार होने और छुपने का पूरा इंतजाम करते रहे. 

शूटरों ने की थी हमले की तैयारी
गोल्डी बराड के लोगों की मदद से ही शूटर ट्रकों में सवार होकर पंजाब से हरियाणा, फिर राजस्थान होते हुए गुजरात तक जा पहुंचे और इस काम में बराड के महाराष्ट्र कनेक्शन तक ने साथ दिया. आपको याद होगा सौरव महाकाल और संतोष जाधव नाम के दो बदमाशों को पुलिस ने इस केस में गिरफ्तार किया था, जो सिर्फ़ गोल्डी के कहने पर मूसेवाला मर्डर केस में कातिलों की मदद कर रहे थे. और तो और वारदात को अंजाम देने से पहले शूटरों को बाकायदा हमले की तैयारी तक करवाई गई थी. 

हत्या के लिए आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल
हत्या के लिए एके-47 समेत दूसरे अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया, जिन्हें चलाने की टेनिंग शूटरों को पंजाब हरियाणा के बीच एक सुनसान जगह पर दी गई, ताकि हमले के दौरान कोई चूक ना हो जाए. आरोपियों ने पूछताछ में यह भी बताया कि वारदात के वक्त उनके पास 10 लाख रुपये कैश थे, जो गोल्डी बराड ने कनाडा से उन्हें इस कांड को अंजाम देने के दौरान होने वाले खर्चे के तौर पर मुहैया करवाए थे. फिलहाल पुलिस प्रियव्रत और कशिश से मिली इस जानकारी की कड़ियां जोड़ रही है ताकि अदालत में गुनहगारों के खिलाफ पुख्ता जांच रिपोर्ट पेश की जा सके. इसी के तहत जांच अधिकारियों ने वारदात की जगह पर हत्या के सीन को दोहराने का फैसला किया है, जिसके लिए प्रियव्रत और कशिश समेत शूटरों के वाहन चलाने वालों को भी मौका-ए-वारदात पर ले जाने की तैयारी है.

सबसे अलग थी शूटर मनप्रीत मन्नू की भूमिका
इस पूरे केस में पंजाब मॉड्यूल के शूटर मनप्रीत मन्नू की भूमिका बाकी शूटरों से कई मायनों में अलग लगी. ये मन्नू ही था, जिसने सिद्धू मूसेवाला पर एके 47 से फायरिंग की थी और पहली फायरिंग की थी. इसके लिए उसने गोल्डी बराड़ से खास तौर पर इजाजत ली थी. असल में मन्नू देवेंदर बंबीहा ग्रुप से कुछ ज्यादा ही नाराज था और बंबीहा ग्रुप से बदला लेने के लिए वो मूसेवाला पर पहली गोली दागना चाहता था. इसके लिए उसने गोल्डी बराड़ से बात की थी और बराड़ ने ना सिर्फ उसे इसकी इजाजत दी, बल्कि उसके लिए एक-47 का इंतजाम करवाया, जिससे उसने मूसेवाला पर बर्स्ट फायर किया था. 

मन्नू की मूसेवाला से दुश्मनी का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने इस काम के लिए गोल्डी बराड़ से रुपये लेने तक से इनकार कर दिया था, लेकिन गोल्डी ने उसके मना करने के बावजूद उसे इनाम के तौर पर बाकी शूटरों की तरह पांच लाख रुपये दिए थे.

गोल्डी बराड़ की धोखेबाजी का चर्चा
वैसे पकडे गए शूटरों ने बेशक सिद्दू मूसेवाला केस में हुए खर्चे का पूरा ब्यौरा पुलिस को दे दिया हो, इस मर्डर केस को लेकर गोल्डी बराड़ की धोखेबाजी के चर्चे भी तेज़ हैं. जुर्म की दुनिया से जुडे कुछ सूत्रों का कहना है कि गोल्डी बराड़ ने इस वारदात के बाद ना तो शूटर अंकित सिरसा का फोन उठाया और ना ही उसे उसके हिस्से के पैसे दिए. यहां तक कि मन्नू और रूपा के ड्रग एडिक्ट होने के चलते उनके हिस्से का पैसा भी हजम कर लेने का इल्ज़ाम गोल्डी पर लगा.

बराड़ ने नकारे आरोप
हालांकि इसके बाद गोल्डी ने एक फेसबुक पोस्ट लिख कर इन तमाम इल्जामों से इनकार किया. गोल्डी ने पोस्ट में कहा कि एनकाउंटर में मारे गए शूटर उनके प्यारे थे, जिन्होंने उस पर बड़ा अहसान किया है. जबकि अंकित का फोन ना उठाने को लेकर गोल्डी ने लिखा है उसका फोन ना उठाने और उसे रुपये ना देने की बात सरासर झूठी है. गोल्डी ने सारे शूटरों को अपना भाई बताते हुए कहा कि सबकुछ तय प्लान के मुताबिक ही हुआ था.

 

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