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लखीमपुर डबल मर्डर ने याद दिलाया बदायूं कांड, रेप के बाद हत्या कर पेड़ से लटका दी थीं दो बहनों की लाशें

लखीमपुर खीरी जैसी घटना यूपी में पहले भी घट चुकी है. 8 साल पहले भी यूपी में ऐसा ही मामला बदांयू जिले से सामने आया था. जहां 27 मई 2014 की रात जिले के गांव कटरा सआदतगंज में रहनी वाली 12 और 14 साल की दो चचेरी बहनें ऐसी ही दरिंदगी का शिकार हो गईं थीं.

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2014 में बदायूं से दो चचेरी बहनों की खौफनाक तस्वीर सामने आई थी
2014 में बदायूं से दो चचेरी बहनों की खौफनाक तस्वीर सामने आई थी

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में 2 सगी दलित बहनों की लाशें पेड़ पर लटकी मिलने के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है. निघासन थाना क्षेत्र के तमोलीन पुरवा गांव से बुधवार की दोपहर दो लड़कियों का उनके घर के बाहर से अपहरण हो गया था. कुछ देर बाद उन दोनों की लाशें पास ही गन्ने के खेत में लगे एक पेड़ से लटकी मिली. मृत बहनों की उम्र 15 और 17 साल थी. इस मामले को लेकर सूबे की सियासत में उबाल आ गया है. 

27 मई 2014, बदायूं जिला, यूपी
सूबे में इस तरह की ये कोई पहली वारदात नहीं है, इससे पहले भी साल 2014 में ऐसा ही मामला बदांयू जिले से सामने आया था. 27 मई की रात जिले के गुमनाम से गांव कटरा सआदतगंज में रहनी वाली 12 और 14 साल की दो चचेरी बहने शौच के लिए खेत की ओर जा रही थीं. तभी रास्ते में दबंग आरोपियों ने उन्हें अगवा कर लिया था. इसके बाद उनके साथ बलात्कार किया और फिर उनकी हत्या कर लाशें पेड़ पर लटका दी थीं. 

इस डबल मर्डर की वारदात को लेकर नेताओं के सुर ऊंचे हो गए थे. सारी विपक्षी पार्टियों ने अखिलेश यादव सरकार पर धावा बोल दिया था. हर तरफ से कानून व्यवस्था के खिलाफ आवाज़े उठ रहीं थी. मीडिया और नेताओं का जमावड़ा भी कटरा सआदतगंज गांव में लगा हुआ था. पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरु कर दी थी. ये वही दौर था जब तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह यादव के एक बयान ने उनकी फजीहत करा दी थी.

बयान ने करा दी थी फजीहत
दरअसल, एक चुनावी रैली में सपा संरक्षक मुलायम सिंह ने कह दिया था कि ‘लड़के आखिर लड़के होते हैं, गलती हो जाती है.’ मरने वाली दोनों लड़कियां शाक्य समुदाय से आती थीं. इस घटना के लेकर पूरे शाक्य समाज में रोष व्याप्त था. जिसे कैश करने के लिए तमाम सियासी दल दौड़ लगा रहे थे. मृतक लड़कियों के पिता 35 वर्षीय सोहनलाल और उनके 30 वर्षीय भाई जीवनलाल ने यादव समाज के लड़कों पर उनकी बेटियों की हत्या का इल्जाम लगाया था.

उस वक्त तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एक ऐसे मीडिया ट्रायल में फंस गए थे, जहां उनसे जवाब देते नहीं बन रहा था. कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्ष हमलावर था. यह देश में अपनी तरह का संभवतः पहला मामला था, जिसमें 27 मई को बदायूं की वारदात के बाद एक हफ्ते में बलात्कार और हत्या के दर्जन भर मामले सामने आ चुके थे. लिहाजा दबाव बढ़ते देख अखिलेश सरकार ने इस मामले की जांच सीबीआई के हवाले कर दी थी.

30 अगस्त 2022, बदायूं, यूपी
बदायूं के कटरा सआदतगंज कांड में तब एक नई कहानी सामने आई थी. जांच एजेंसी से जुड़े सूत्रों ने खुलासा किया था कि जिस दिन दोनों चचेरी बहनों की हत्या हुई, उसी दिन इस परिवार से जुड़ी एक और लड़की गांव में मौजूद थी और घटना के बाद वह दिल्ली चली गई थी. उस लडक़ी से सीबीआई ने दिल्ली में ही एक राउंड की पूछताछ भी की थी. 

जांच में सवाल!
दो में से एक लड़की, जिस दुपट्टे से लटकी थी वह उसका नहीं था. लेकिन तब शक आरोपियों पर गया था. माना जा रहा था कि दुपट्टा आरोपियों के परिवार की किसी लड़की का हो सकता है. सीबीआई का मानना था कि अगर दुपट्टे की कहानी सुलझ जाती है तो घटना का पटाक्षेप करने में देर नहीं लगेगी. सूत्रों की मानें तो कटरा सआदतगंज में कथित बलात्कार के बाद हत्या कर पेड़ से लटकाई गई चचेरी बहनों के एक रिश्तेदार दिल्ली में रहते हैं. उनकी 12 वर्षीय बेटी 27 मई को कटरा सआदतगंज में ही थी. घटना के बाद उसे दिल्ली भेज दिया गया था. 

दुपट्टे की उलझी कहानी
दोनों लड़कियों को हत्या के बाद पेड़ पर लटकाने के लिए दुपट्टों का इस्तेमाल किया गया था. इनमें जिस दुपट्टे पर बड़ी लड़की लटकी थी वह उसका नहीं था. सीबीआई अब बड़ी लड़की के बदले हुए दुपट्टे की कहानी को सुलझना चाहती थी. लिहाजा, आरोपी और पीड़ित पक्ष की पॉलीग्राफी और डीएनए रिपोर्ट में आरोपियों को क्लीनचिट के मिल जाने के बाद सीबीआई का पूरा फोकस बदले हुए दुपट्टे की कहानी को सुलझने पर था. 

आरोपी का पॉलीग्राफी टेस्ट
यह भी माना जा रहा था कि उस रात जो घटना हुई थी, हो सकता है लड़कियों का पूरा परिवार उससे वाकिफ नहीं था. लेकिन सीबीआई कुछ ऐसे लोग चिन्हित कर रही थी, जो सब कुछ जानते हुए सच पर पर्दा डाल रहे थे. पॉलीग्राफी टेस्ट के आधार पर सीबीआई आरोपी पप्पू की इस बात को सच मान रही थी कि उस रात लड़कियां उसके साथ थी जरूर लेकिन चश्मदीद के वहां आने के बाद वह भाग गया था.

8 सितंबर 2014, बदायूं, यूपी
गांव कटरा सआदतगंज में हुए रेप केस की जांच में जुटी सीबीआई की नजर अब मुख्य गवाह बाबूराम उर्फ नजरू की ओर मुड़ रही थी. सीबीआई जानना चाहती थी कि बाबूराम घटना से पहले और घटना के बाद कहां था? वह किन-किन लोगों के संपर्क में रहा? इस संबंध में जांच एजेंसी ने पीडि़त परिवार को कुरेदने के साथ बाबूराम से भी पूछताछ की थी. 

पीड़ित परिवार की कहानी 
लड़कियों के परिजनों पर यकीन करें तो 27 मई की रात बाबूराम उर्फ नजरू की पप्पू यादव से हाथपाई हो गई थी. इसके बाद बाबूराम पीडित परिवार के घर पहुंचा था. जहां उसने बताया कि पप्पू दोनों लड़कियों को ले गया. तब परिवारवालों ने लड़कियों की तलाश शुरू कर दी थी. पूछताछ के दौरान आरोपी पप्पू यादव ने बताया था कि दोनों लड़कियों को उसके साथ मारपीट करने के बाद नजरू अपने साथ ले गया था. लड़कियां उस रात किसके साथ गईं थी? सीबीआई इस रहस्य को सुलझाना चाहती थी. यह मामला आरोपी पप्पू और चश्मदीद नजरू की कहानी के आस-पास घूम रहा था.

इन नेताओं ने किए थे दौरे
इस दोहरे सनसनीखेज हत्याकांड के बाद विपक्षी दल सपा सरकार पर धावा बोल रहे थे. जिसके चलते तत्कालीन कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी निजी चाटर्ड हेलिकॉप्टर से पीड़ित परिवार को सांत्वना देने पहुंचे थे. उन्होंने लड़कियों के घर वालों को इंसाफ दिलाने का आश्वासन दिया था. 2007 से 2012 तक राज्य की मुख्यमंत्री रहीं मायावती भी पीछे नहीं थीं. वो भी शोकाकुल परिजनों की मातमपुर्सी के लिए बदायूं के गांव में पहुंची थीं. इस तरह से पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार भी पीड़ित परिवार से मिलने बदायूं गईं थीं. तब एनडीए सरकार में शामिल हुए लोकजन शक्ति पार्टी प्रमुख रामविलास पासवान और तब पहली बार संसदीय चुनाव जीते उनके बेटे चिराग पासवान भी पीड़ित परिवार से मिलने बदायूं के गांव कटरा सआदतगंज पहुंचे थे.

 

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