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बंगालः पश्चिम मिदनापुर में गाइडलाइन दरकिनार कर स्कूल खुलने पर हंगामा, 4 घंटे बाद बंद

पश्चिम मिदनापुर जिले के घटल क्षेत्र में 12 अगस्त को एक स्कूल के खुलने से बवाल मच गया. कोरोना संकट में हंगामा इतना बढ़ा कि शिक्षा विभाग ने 4 घंटे के अंदर ही स्कूल को बंद करा दिया.

कोरोना काल में स्कूल खुलने पर हंगामा (फोटो- एसके सहजन अली) कोरोना काल में स्कूल खुलने पर हंगामा (फोटो- एसके सहजन अली)

  • हेडमास्टर का दावा कि अभिभावकों के अनुरोध पर खुला स्कूल
  • शिक्षा विभाग के अफसरों ने सूचना मिलते ही बंद कराया स्कूल

पश्चिम बंगाल में पश्चिम मिदनापुर जिले के घटल क्षेत्र में 12 अगस्त को एक स्कूल के खुलने से बवाल मच गया. हंगामा इतना बढ़ा कि शिक्षा विभाग ने 4 घंटे के अंदर ही स्कूल को बंद करा दिया. असल में, कोरोना संकट के चलते जब राज्य और देशभर में शैक्षणिक संस्थानों को फिर से खोलने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है लेकिन बिधान चंद्र रे हाई स्कूल बुधवार को खुल गया. इससे इलाके में हड़कंप मच गया.

पश्चिम मिदनापुर जिले में दासपुर पुलिस स्टेशन के पास घटल उप-मंडल में स्थित हाई इस स्कूल को हेडमास्टर वृंदावन घाटक ने खोल दिया और बकायदा छात्र भी पढ़ने के लिए आने लगे. जबकि कोरोना को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों की गाइडलाइंस हैं, लेकिन हेडमास्टर के पास अपने फैसले को जायजा ठहराने के लिए पर्याप्त तर्क हैं.

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स्कूल के हेडमास्टर वृंदावन घाटक अपने फैसले का बचाव करते हुए कहते हैं, 'कुछ दिन पहले ही छात्रों और उनके अभिभावकों की तरफ से स्कूल खोलने को लेकर अनुरोध किया गया था. उनका आग्रह था कि अगर कम से कम 10वीं कक्षा के लिए स्कूल जा सकता है तो खोला जाए. इसलिए हमने पहले दिन सोशल डिस्टेंसिंग के साथ सभी तरह की सावधानियां बरतते हुए स्कूल खोला. लेकिन जैसे ही स्कूल खुला, शिक्षा विभाग के निर्देश पर इसे फिर बंद कर दिया गया. मैंने अभिभावकों की सलाह पर शिक्षा विभाग की अनुमति के बिना स्कूल शुरू किया था. इसीलिए शिक्षा विभाग जो भी सजा देगा मैं उसे स्वीकार करूंगा.'

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मगर अब नुकसान हो चुका है. ऐसे कई छात्र थे जो स्कूल पहुंचे थे जिन्हें बोर्ड एग्जाम और एकेडमिक कैलेंडर के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. स्कूल में आम दिनों में 1000 छात्र आते हैं लेकिन क्लास शुरू होने पर कोई 100 बच्चे स्कूल आए. इन बच्चों को पढ़ाने के लिए छह टीचर स्कूल पहुंचे थे.

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सूत्रों ने बताया कि माता-पिता ने उन छात्रों की मदद करने के लिए बार-बार आग्रह किया था, जो अंतिम रिपोर्ट कार्ड में औसत से कम प्रदर्शन कर पाए थे और संसाधनों की कमी के कारण ऑनलाइन पढ़ाई नहीं कर पाएंगे. हेडमास्टर ने भी यही बात दोहराई. हेड मास्टर ने हालांकि स्कूल खोलने के लिए स्कूल कमेटी से परमिशन ली लेकिन सरकारी विद्यालय होने के बावजूद उन्होंने शिक्षा विभाग से इसकी अनुमति नहीं ली थी.

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शिक्षा विभाग के एडिशनल स्कूल इंस्पेक्टर तुहिनबरन अधगिरी ने कहा, "हमें इसके बारे में पता नहीं था. अभी हम उच्च अधिकारियों के निर्देश पर मामले की जांच करने आए हैं. मैं आवश्यक रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेजूंगा."

पहले दिन बहुत कम छात्र उपस्थित थे. इसलिए बहुत कम विषयों पर चर्चा की गई. स्कूल का दावा है कि इसने इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया गया और छात्रों को एक निश्चित दूरी पर बैठाया गया.

(एसके सहजन अली के इनपुट के साथ)

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