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ऑक्सीजन संकट: राज्यों की रिपोर्ट-केंद्र का आंकड़ा, सियासी घमासान से अलग है जमीनी हकीकत

IMA के एक पूर्व अध्यक्ष और पूर्वी दिल्ली में एक निजी अस्पताल के मालिक कहते हैं कि जब रोगी की मौत कार्डिक अरेस्ट से हुई है तो इसे ऑक्सीजन की कमी से हुई मौत कैसे लिखा जा सकता है. हालांकि वे यह भी कहते हैं कि ये सच्चाई है कि अगर ऑक्सीजन सप्लाई का मैनेजमेंट बेहतर होता तो 15-20 फीसदी मौतें टाली जा सकती थीं.

ऑक्सीजन की कमी से मौत पर बहस (प्रतीकात्मक तस्वीर) ऑक्सीजन की कमी से मौत पर बहस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ऑक्सीजन की कमी से हुई मौत पर देश में बहस
  • केंद्र ने राज्यों के आंकड़े को सामने रखा
  • जयपुर गोल्डन में 21 मरीजों की हुई थी मौत

केंद्र सरकार ने मंगलवार को जब संसद में कहा कि देश में कोरोना काल के दौरान ऑक्सीजन की कमी से एक भी मौत नहीं हुई, तो मानो कितनों के महीनों पुराने जख्म फिर से हरे हो गए. जब अप्रैल-मई-जून में लोग ऑक्सीजन के लिए अस्पतालों के बाहर हाहाकार कर रहे थे, ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर भटकने वाले लोगों की तस्वीरें अक्सर नजर आती थीं. 

केंद्र के इस बयान पर विपक्षी दलों ने घोर आपत्ति जताई. कांग्रेस ने इस मामले पर सरकार के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की धमकी दी.  

दरअसल, कोविड को लेकर कई विवाद चल रहे हैं. जैसे कोविड से मौतें कितनी हुई है, कितनी मौतों की गिनती बाकी रह गई है. क्या कोई मौत ऑक्सीजन की कमी से हुई है या नहीं? 

मंगलवार को मोदी सरकार (Modi Government) ने राज्यसभा (Rajya Sabha) में बताया था कि कोरोना दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन (Oxygen) की कमी से किसी की मौत होने की जानकारी राज्यों ने नहीं दी है. 
  
इस मामले में राजनीति भले ही हो रही हो लेकिन केंद्र का जवाब संघीय ढांचे के प्रावधानों के अनुकूल ही था. जिसके अनुसार स्वास्थ्य राज्यों का विषय है और इस मामले में केंद्र सिर्फ राज्यों द्वारा दिए गए आंकड़ों को एक साथ मिलाकर जारी कर रहा है. ये सभी आंकड़े राज्य द्वारा केंद्र को दिए गए हैं. 

ये वास्तविकता तो जरूर है कि अप्रैल में देश में कोरोना केस व्यापक रूप से बढ़ने शुरू हो गए थे, जब देश में कोरोना चरम पर था तो पहली लहर में जिस मेडिकल ऑक्सीजन की मांग 3095 मीट्रिक थी वो बढ़कर 9000 मीट्रिक टन हो गई. स्थिति इतनी बिगड़ी कि सुप्रीम कोर्ट तक ने इसे राष्ट्रीय आपदा करार दिया. 

क्या ऑक्सीजन की कमी से दिल्ली में भी कोई नहीं मरा? 

लेकिन अब डिबेट इस मुद्दे को लेकर हो रही है कि राज्यों में ऑक्सीजन की कमी से मौत क्यों नहीं रिपोर्ट की गई? 

मौत ऑक्सीजन की कमी से हुई? ये टेक्निकल मुद्दा है

मेडिकल क्षेत्र के विशेषज्ञ कहते हैं कि कोविड से हुई किसी मौत को ऑक्सीजन की कमी से जोड़कर बताना बहुत ही डायनामिक कॉल यानी कि संवेदनशील और तार्किक विश्लेषण का मुद्दा है. क्योंकि रोगी के मृत्यु प्रमाण पत्र पर मौत का वास्तविक कारण कई वजहों से कुछ और हो सकता है. 

IMA के एक पूर्व अध्यक्ष और पूर्वी दिल्ली में एक निजी अस्पताल के मालिक कहते हैं कि जब रोगी की मौत कार्डिक अरेस्ट से हुई है तो इसे ऑक्सीजन की कमी से हुई मौत कैसे लिखा जा सकता है. हालांकि वे यह भी कहते हैं कि ये सच्चाई है कि अगर ऑक्सीजन सप्लाई का मैनेजमेंट बेहतर होता तो 15-20 फीसदी मौतें टाली जा सकती थीं. 

बत्रा अस्पताल के एमडी डॉ एससीएल गुप्ता कहते हैं, "ऑक्सीजन संकट के कारण मौतें हुई हैं, लेकिन ये पूरी तरह से टेक्निकल मुद्दा है कि कोविड से हुई एक मौत को कोई अस्पताल अथवा राज्य कैसे लिखता है." मेडिकल ऑक्सीजन की आवश्यकता दूसरे भी नाजुक मामलों में पड़ती है लेकिन समस्या ये है कि आप इसे मेडिकल टर्म में कैसे लिखते हैं. अब इसी को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच टकराव जारी है. 

जयपुर गोल्डन अस्पताल का मामला 

जब देश में कोरोना का संक्रमण चरम पर था तो 23 और 24 अप्रैल की रात को एक बेहद ही दिल दुखाने वाली खबर आई. दिल्ली के जयपुर गोल्डन अस्पताल में 21 लोगों की मौत हो गई थी. 

इस मामले की जांच के लिए सरकार ने प्रोफेसर नरेश कुमार (मेडिसिन) की अध्यक्षता में 4 सदस्यीय कमेटी बनाई थी. इस कमेटी को सभी 21 मरीजों की केस शीट की जांच करने को कहा गया और ये निर्धारित करने को कहा गया कि क्या इनकी मौत ऑक्सीजन की कमी से हुई थी. 

मरीजों की मौत पर कमेटी ने क्या कहा?

इन मरीजों के रिकॉर्ड्स देखकर कमेटी ने कहा कि सभी मरीज कोविड से पीड़ित थे और इनकी मौत 7 घंटे के दरम्यान हुई. सभी मरीज बहुत बीमार थे और इनकी हालत 23 अप्रैल की शाम से ही नाजुक थी.

इनमें से कई मरीजों को पहले से एक या एक से ज्यादा बीमारियां थीं. जैसे कि दिल की बीमारी, डायबिटीज, हाइपरटेंशन.  इन सभी मरीजों को अस्पताल में किसी न किसी तरह का ऑक्सीजन थेरेपी दी जा रही थी और ये वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे.

मौत की वजह 

कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार सभी मरीजों को सप्लीमेंटल ऑक्सीजन उनकी जिंदगी के अंतिम क्षणों में दी गई. और किसी पेशेंट के केस शीट में ऑक्सीजन की कमी का जिक्र नहीं है. 

अस्पताल द्वारा पेश किए गए फॉर्म में इन सभी 21 मरीजों के मौत की वजह श्वसन तंत्र का फेल हो जाना लिखा है. लेकिन केस शीट में मौत की वजह फॉर्म से अलग है.  लेकिन न तो अस्पताल के फॉर्म में और न ही केस शीट में इन मरीजों के मौत की वजह ऑक्सीजन की कमी बताई गई. एक मरीज के केस शीट में दवाओं की कमी की बात कही गई है लेकिन ऑक्सीजन की कमी की बात नहीं कही गई है.

कमेटी ने कहा है कि ये बड़ी हैरानी की बात है कि अगर दवाओं की कमी की बात दर्ज की गई है तो यदि ऑक्सीजन की कमी हो रही थी तो उसे क्यों नहीं रिकॉर्ड किया गया .

अब विशेषज्ञों के अनुसार अगर कोई ये कहता है कि मरीजों को सप्लीमेंट्री ऑक्सीजन दी जा रही थी तो अब कोई इसे कैसे जांचेगा कि पेशेंट को ऑक्सीजन की जरूरत भर की मात्रा मिल रही थी या नहीं. विशेषज्ञों के अनुसार Required availability और reduced supply दो अलग अलग चीजें हैं. और ऑक्सीजन की reduced supply भी मरीजों के लिए घातक हो सकती है.

 

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