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मरकज में शामिल 916 विदेशी जमाती क्वारनटीन, दिल्ली HC ने सरकार से मांगी स्टेटस रिपोर्ट

याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट से कहा कि अमेरिका, फ्रांस, यूके, ऑस्ट्रेलिया, नाइजीरिया, केन्या, मलेशिया जैसे देशों से आए इन विदेशी नागरिकों को भारत सरकार की तरफ से देश में आने के लिए वीजा दिया गया था.

विदेशी जमाती को छोड़ने के लिए याचिका (फाइल फोटो) विदेशी जमाती को छोड़ने के लिए याचिका (फाइल फोटो)

  • विदेशी जमाती को छोड़ने के लिए दिल्ली HC में याचिका
  • कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार से मांगी है स्टेटस रिपोर्ट

निजामुद्दीन इलाके में स्थित मरकज के कार्यक्रम में शामिल हुए 916 विदेशी नागरिकों को छोड़ने के लिए दाखिल याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार और केंद्र से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है. कोर्ट ने कहा कि मंगलवार 26 मई को इस मामले में डबल बेंच दोबारा सुनवाई करेगी. उससे पहले दोनों सरकारें अपना पक्ष कोर्ट के सामने रखें. कोर्ट ने इस मामले को डबल बेंच में ट्रांसफर कर दिया है.

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आज भी सुनवाई में केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार दोनों ने इस याचिका का पुरजोर विरोध किया और कहा कि यह सुनवाई के योग्य नहीं है. याचिकाकर्ता पर यह कहकर सवाल खड़ा किया गया कि अगर 916 लोग इंस्टीट्यूशनल क्वारनटीन हैं, तो फिर सिर्फ 20 लोगों ने ही कोर्ट में अर्जी क्यों लगाई है?

30 मार्च से ही क्वारनटीन में रखा गया

याचिकाकर्ताओं की तरफ से पेश हुए वकील संजय निगम ने कहा कि निजामुद्दीन मरकज में विदेशों से आए कितने लोगों को इंस्टीट्यूशनल क्वारनटीन किया गया है, इसकी रिपोर्ट तो खुद सरकारों को कोर्ट के सामने रखनी चाहिए. याचिका लगाने वाले 20 लोगों ने हमें बताया है कि कुल 916 लोगों को इंस्टीट्यूशनल क्वारनटीन किया गया है.

आगे कहा कि गृह मंत्रालय खुद अपनी ही बनाई गाइडलाइन का पालन नहीं कर रहा है. हमारे पास जो जानकारी थी वह हमने कोर्ट को दे दी है. इन सभी विदेशी नागरिकों को 30 मार्च से ही क्वारनटीन में रखा गया है, जबकि उनके कोविड-19 के टेस्ट नेगेटिव आ चुके हैं.

सरकार की ओर से आने के लिए वीजा

याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट से कहा कि अमेरिका, फ्रांस, यूके, ऑस्ट्रेलिया, नाइजीरिया, केन्या, मलेशिया जैसे देशों से आए इन विदेशी नागरिकों को भारत सरकार की तरफ से देश में आने के लिए वीजा दिया गया था. इनमें से कोई भी गैरकानूनी तरीके से देश में नहीं आया है, फिर उनको न तो दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया है और न किसी मजिस्ट्रेट के द्वारा न्यायिक हिरासत में भेजा गया है. फिर सरकार उन्हें गैर-कानूनी तरीके से बंधक बनाकर कैसे रख सकती है?

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वहीं सरकार की तरफ से पेश वकीलों का कहना था कि इनमें बहुत सारे लोग ऐसे हैं जिनके नाम उन एफआईआर में शामिल हैं जो निजामुद्दीन मरकज पर की गई है. इस पर याचिकाकर्ताओं के वकील का कहना था कि फिर उनकी गिरफ्तारी होनी चाहिए थी, उनको इंस्टीट्यूशनल क्वारनटीन क्यों किया गया है?

16 मार्च को जारी हुई गाइडलाइंस

धार्मिक आयोजन के लिए निजामुद्दीन के मरकज आए इन विदेशी नागरिकों की तरफ से ये याचिका कोर्ट में आशिमा मंडला की ओर से लगाई गई है. ये सभी 10 से 15 मार्च के बीच निजामुद्दीन मरकज के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आए थे. याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, दिल्ली सरकार की तरफ से कोविड-19 को लेकर गाइडलाइंस 16 मार्च को जारी की गई.

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इस याचिका में दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग के 9 मई के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें 567 विदेशी नागरिकों को इंस्टीट्यूशनल क्वॉरेंटाइन करने के आदेश थे. इस आदेश में कहा गया था कि दिल्ली पुलिस इन सभी विदेशी नागरिकों को अपनी कस्टडी में रखें, हालांकि इन सबके कोविड-19 के टेस्ट नेगेटिव आ चुके थे.

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