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नई गाइडलाइन के दूसरे दिन सुस्त हुई वैक्सीनेशन की रफ्तार, 53 लाख लोगों को लगा टीका

एक दिन बाद ही वैक्सीनेशन की रफ्तार फिर से सुस्त हो गई. अभियान के दूसरे ही दिन पूरे देश में मात्र 53 लाख लोगों को ही वैक्सीन लगाई जा सकी है. जबकि केंद्र सरकार देश के हर नागरिकों को फ्री में टीका उपलब्ध करवाने का दावा कर रही है. 

फिर सुस्त पड़ी वैक्सीनेशन (फाइल फोटो) फिर सुस्त पड़ी वैक्सीनेशन (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पहले दिन कोरोना वैक्सीनेशन में दिखी तेजी
  • फिर दूसरे दिन टीकाकरण में भारी गिरावट क्यों
  • AAP ने कहा अभियान नहीं, सबसे ज्यादा मिस मैनेज

देश में कोरोना वैक्सीनेशन की रफ्तार को तेज करने के लिए नीति में बदलाव कर सोमवार से वैक्सीनेशन अभियान दोबारा चलाया गया. पहले दिन इस अभियान का असर दिखा और देश में रिकॉर्ड 84 लाख से ज्यादा डोज लगाए गए. हालांकि एक दिन बाद ही यह रफ्तार फिर से सुस्त हो गई. अभियान के दूसरे ही दिन पूरे देश में मात्र 53 लाख लोगों को ही वैक्सीन लगाई जा सकी है. रात दस बजे तक के आंकड़ों के मुताबिक 53,40,337 लोगों को ही वैक्सीन लगाई गई है. जबकि केंद्र सरकार देश के हर नागरिकों को फ्री में टीका उपलब्ध करवाने का दावा कर रही है. 

कुछ दिनों पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके बारे में घोषणा करते हुए कहा था कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के दिन से टीकाकरण की गति को तेज कर दिया गया है. केंद्र सरकार ने वैक्सीनेशन उत्पादन में से 75 फीसदी हिस्सा खुद खरीदने का फैसला किया है, जबकि 25 फीसदी टीका प्राइवेट अस्पतालों द्वारा खरीदा जा सकेगा.

कोरोना महामारी को देश में आए एक साल से अधिक हो गया है. अब तक साढ़े तीन लाख से ज्यादा लोगों की कोविड के चलते मौत हो चुकी है. टीकाकरण अभियान देश में इस साल जनवरी में शुरू किया गया था. शुरुआती समय में हेल्थ वर्कर्स और फिर फ्रंटलाइन वर्कर्स को टीका लगाए जाने के बाद बुजुर्गों को टीका लगाया जाने लगा.

इसके बाद 45 साल से अधिक उम्र वाले लोगों का नंबर आया और कोरोना की दूसरी लहर आने के दौरान 18 साल से ज्यादा उम्र के सभी लोगों के टीकाकरण करने का ऐलान किया गया.

21 जून से केंद्र सरकार ने टीकाकरण की जिम्मेदारी अपने हाथों में ली. केंद्र सरकार ने कहा कि वह इसे खुद खरीदकर राज्य सरकार को देगी, जबकि पहले राज्यों को भी टीका खरीदने के लिए कहा गया था. सोमवार को टीकाकरण अभियान काफी तेजी से चला और पहले ही दिन देश ने टीका लगाने का रिकॉर्ड बना लिया. कुल 84 लाख वैक्सीन की डोज लगाई गई.

टीकाकरण का रिकॉर्ड बनने पर प्रधानमंत्री मोदी ने खुशी जताते हुए वेलडन इंडिया भी कहा. लेकिन दूसरे ही दिन वैक्सीनेशन की रफ्तार में भारी गिरावट आ गई. हालांकि यह गिरावट किस वजह से आई है फिलहाल स्पष्ट नहीं है. 

और पढ़ें- कोविशील्ड v/s कोवैक्सीन v/s स्पुतनिकः कौन सी वैक्सीन कितनी असरदार, क्या हैं साइड इफेक्ट्स?

वैक्सीनेशन को लेकर सिसोदिया के सवाल

सोमवार को दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने वैक्सीनेशन को लेकर केंद्र सरकार से कई सवाल किए. मनीष सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली को अगले दो महीने के लिए करीब ढाई करोड़ वैक्सीन की डोज़ चाहिए. ऐसे बहुत देश हैं, जिन्होंने अपने देश में वैक्सीन बनाई, दूसरे देशों से खरीदी. लेकिन अपने लोगों को टीका लगवा दिया है.

अगर केंद्रीय नेतृत्व चाहे तो न सिर्फ पूरे देश को वैक्सीन लगाई जा सकती है, बल्कि मास्क फ्री भी हो सकता है. लेकिन हमारे देश में वैक्सीन का संकट है, पहले इमेज मैनेजमेंट के लिए सरकार विदेशों में वैक्सीन बेचती रही, फिर कहा कि राज्य सरकार ग्लोबल मार्केट से खरीदें, फिर कहा गया कि 21 जून से केंद्र सरकार राज्य उपलब्ध कराएगी.

मनीष सिसोदिया ने कहा कि 21 जून से केंद्र ने फ्री वैक्सीन देने की बात कही है, लेकिन आगे अब जून में एक भी वैक्सीन नहीं आ रही है, वहीं जुलाई में केवल 15 लाख वैक्सीन दी जा रही हैं. सिसोदिया ने सवाल किया कि जिसे आप दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान कहते हैं, वो सबसे ज्यादा मिस मैनेज है.

मनीष सिसोदिया बोले कि दिल्ली को 2 करोड़ 30 लाख डोज और वैक्सीन चाहिए. इस रफ्तार से चले, तो अभी 15-16 महीने और लग जाएंगे, इस तरह ये दुनिया का सबसे मेस्ड अप प्रोग्राम है. केंद्र और BJP राज्यों ने देशभर में विज्ञापन दिया है कि यह दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन अभियान है.

आम आदमी पार्टी के नेता ने सवाल किया कि देशभर में वैक्सीन नहीं है, लेकिन वैक्सीन के विज्ञापन हैं, इतना पैसा अगर वैक्सीन ने लगाया होता, तो सबको वैक्सीन मिल गई होती. केंद्र से कहना चाहता हूं कि विज्ञापन नहीं वैक्सीन चाहिए.

 

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