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कोविशील्ड को अबतक EU का 'वैक्सीन पासपोर्ट' नहीं, पूनावाला बोले- डिप्लोमैटिक लेवल पर बात करेंगे

यूरोप में ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनिका की ही वैक्सजेवरिया लगवाने वाले को ग्रीन पास मिलेगा, लेकिन ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनिका की ही कोविशील्ड लगवाने वालों पर संशय बना हुआ है.

कोविशील्ड को ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनिका ने बनाया है कोविशील्ड को ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनिका ने बनाया है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कोविशील्ड को अबतक यूरोप में ग्रीन पास नहीं मिला है
  • ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनिका की वैक्सजेवरिया समेत 4 टीकों को मान्यता

कोरोना संकट के बाद यूरोप जाने की चाहत रखने वाले भारतीयों के लिए वैक्सीन लगवाने के बावजूद एक संकट खड़ा दिख रहा है. दरअसल, अबतक कोविशील्ड को यूरोपियन यूनियन ने मंजूरी नहीं दी है, इससे ग्रीन पास नहीं मिलेगा, जिसकी वजह से भारत से यूरोप के अलग-अलग देशों में जाने में दिक्कतें होने के चांस हैं. हालांकि, सीरम इंस्टिट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला ने भरोसा दिलाया है कि मुद्दे को जल्द से जल्द सुलझा लिया जाएगा.

यूरोपियन यूनियन ने 'ग्रीन पास' सिस्टम शुरू किया है. इसमें यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी (EMA) से अप्रूव वैक्सीन लगवाने वाले शख्स को ग्रीन पास मिलेगा, जिससे वह इसमें शामिल 27 देशों में कहीं भी आ-जा सकता है. मुख्य तौर पर यह सिस्टम ईयू देशों में रहने वाले लोगों के लिए है, जिससे वे लोग काम और टूरिज्म के लिए इधर से उधर आसानी से जा सकें.

यह ग्रीन पास सिस्टम पूरी तरह से एक जुलाई से शुरू होगा. फिलहाल स्पेन, जर्मनी, ग्रीस, पोलैंड जैसे कुछ देशों ने इसे शुरू कर दिया है.

क्या बोले अदार पूनावाला

अदार पूनावाला ने सोमवार को ट्वीट किया, 'मुझे पता चला है कि जिन भारतीयों ने कोविशील्ड वैक्सीन लगवाई है, उन्हें यूरोप के देशों में ट्रेवल करने में दिक्कत आ रही है. मैं भरोसा दिलाता हूं कि इसका संज्ञान दिलवाकर जल्द से जल्द सुलझाया जाएगा. इसके लिए रेग्युलेटर्स और कूटनीतिक स्तर, दोनों पर बात होगी.'

एस्ट्राजेनिका की वैक्सीन को मंजूरी, कोविशील्ड को नहीं

हैरानी की बात यह है कि लिस्ट में ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनिका की वैक्सीन का नाम होते हुए भी पेच फंस गया है. दरअसल, ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनिका ने भारत में सीरम इंस्टिट्यूट के साथ मिलकर अपनी वैक्सीन को कोविशील्ड नाम दिया है. वहीं ब्रिटेन-यूरोपीय देशों में इसका नाम वैक्सजेवरिया है. EMA ने अबतक कुल चार कोरोना टीकों को मंजूरी दी है. इसमें कॉमिरनाटी (बायोटेक-फाइजर), मॉडर्ना, वैक्सजेवरिया (ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनिका) और जानसेन (जॉनसन एंड जॉनसन) शामिल है.

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मतलब ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनिका की ही वैक्सजेवरिया लगवाने वाले को ग्रीन पास मिलेगा, लेकिन ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनिका की ही कोविशील्ड लगवाने वालों पर संशय बना हुआ है.

क्या होगा असर

अबतक यह साफ नहीं है कि भारतीय यात्रियों को यह ग्रीन पास नहीं मिलने का कितना असर होगा. दरअसल, ग्रीन पास सिस्टम मुख्य तौर पर यूरोपिय यूनियन में रहने वाले यात्रियों के लिए है. लेकिन दूसरे देश के यात्री भी इसे ले सकते हैं. फिलहाल तो EMA ने चार वैक्सीन को मंजूरी दी है. लेकिन इसके सदस्य देश अपने ट्रैवल नियमों के हिसाब से किसी दूसरी वैक्सीन को भी मान्यता दे सकते हैं. हालांकि, अभी EMA की साइट पर कोविशील्ड का नाम ना तो मान्यता प्राप्त वैक्सीन में है और ना ही उसमें जिन टीकों पर फैसला लिया जाना बाकी है.

ग्रीन पास सिस्टम में एक सर्टिफिकेट मिलेगा, जिसपर क्यूआर कोड होगा. इसका लाभ यह होगा कि यूरोपीय देशों में यात्रा करने वालों को क्वारंटाइन, दूसरे कोरोना टेस्ट के चक्कर में नहीं पड़ना होगा. इन सर्टिफिकेट पर पहले से लिखा होगा कि यात्री को वैक्सीन कब लगी, कब उसका कोरोना टेस्ट हुआ या वह कब कोरोना से ठीक हुआ.

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