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शेल्टर होम में नहीं हो पा रहा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन, घर जाना चाहते हैं मजदूर

विभिन्न राज्यों ने प्रवासी मजदूरों के लिए शेल्टर होम बनवाए हैं, लेकिन क्या वहां उतनी अच्छी व्यवस्था है जितनी के दावे किए जा रहे हैं. यही जानने के लिए आजतक की टीम अलग-अलग शहरों के शेल्टर होम पहुंची और व्यवस्था का जायजा लिया.

जयपुर के शेल्टर होम में खाना मिलने में होने लगी देरी जयपुर के शेल्टर होम में खाना मिलने में होने लगी देरी

  • राजस्थान में मुश्किल हो रहा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन
  • भोपाल में स्वयंसेवी संगठनों पर निर्भर हैं प्रवासी मजदूर
मुंबई के बांद्रा स्टेशन पर हजारों की तादाद में प्रवासी मजदूर घर भेजे जाने की मांग करते हुए पहुंच गए थे. घंटों चले वार्ता के बावजूद जब मजदूर वापस लौटने को राजी नहीं हुए तो इन्हें तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठी चार्च करना पड़ा. इसके ठीक अगले ही दिन देश की राजधानी दिल्ली के यमुना तट पहुंचे बड़ी तादाद में मजदूरों की तस्वीरें आई और हरकत में आई सरकार ने इन्हें बसों से शेल्टर होम पहुंचाया. विभिन्न राज्यों ने प्रवासी मजदूरों के लिए शेल्टर होम बनवाए हैं, लेकिन क्या वहां उतनी अच्छी व्यवस्था है जितनी के दावे किए जा रहे हैं. यही जानने के लिए आजतक की टीम अलग-अलग शहरों के शेल्टर होम पहुंची और व्यवस्था का जायजा लिया.

राजस्थान के जयपुर में बनाए गए शेल्टर होम में रोके गए मजदूर घर जाने को बेचैन हो रहे हैं. राजस्थान में प्रवासी मजदूरों को रोकने के लिए 100 से ज्यादा शेल्टर होम बनाए गए हैं. इन शेल्टर होम में 15000 मजदूर रह रहे हैं. एक शेल्टर होम में 200 से लेकर 1000 तक मजदूर हैं. सरकार सभी नियमों के अनुपालन और व्यवस्था का पूरा ध्यान रखने का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि मजदूरों से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराना मुश्किल हो रहा है.

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जयपुर के हीरापुरा के शेल्टर होम बुधिया सरकारी स्कूल अजमेर रोड में रोके गए 100 से अधिक मजदूरों को रखा गया है. इनमें से अधिकतर वे मजदूर हैं, जो लॉकडाउन लागू होने के बाद कोई साधन न मिलने पर प्रदेश के जोधपुर और अजमेर और अन्य शहरों से पैदल ही उत्तर प्रदेश और बिहार अपने घर जाने के लिए निकल पड़े. यहां एक-एक कमरे में 7 से 11 मजदूर रखे गए हैं. शेल्टर होम में व्यवस्था ठीक थी, लेकिन अब मजदूरों का कहना है कि लॉकडाउन 2.0 में व्यवस्था बिगड़ी है. अब खाना मिलने में भी देरी हो रही है.

जयपुर के ही बगरू सरकारी स्कूल में बनाए गए शेल्टर होम की व्यवस्था से उसमें रह रहे लोग संतुष्ट नजर आए. यहां तीन वक्त के खाने के सात ही अन्य इंतजामात पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है. यहां सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन हो रहा है. कई शेल्टर होम में रह रहे लोग व्यवस्था से संतुष्ट नजर आए, तो कई नाखुश. कुछ ऐसे ही हालात हैं बिहार और मध्य प्रदेश में भी.

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पटना के राहत केंद्रों में 397 अप्रवासी मजदूर रह रहे हैं, जबकि बेघर और आसपास के रहने वाले 19000 से ज्यादा जरूरतमंदों को इन राहत केंद्रों में खाना खिलाया जा रहा है. शहर के गर्दनीबाग स्थित पटना हाईस्कूल में बने शेल्टर होम में पिछले 15 दिन से भागलपुर और झारखंड के गोड्डा के 94 मजदूर रह रहे हैं. इन सभी की दो बार जांच भी हो गई, लेकिन घर जाने की उम्मीदों को लॉकडाउन 2.0 के कारण झटका लगा है.

भोपाल में भोजन के लिए आम नागरिकों पर निर्भर हैं मजदूर

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी हालात कुछ ठीक नहीं. दामोह और उत्तर प्रदेश के जौनपुर निवासी मजदूर शेल्टर होम के करीब स्थित पार्क में दिन बिता रहे हैं. ये भोजन के लिए भी स्वयंसेवी संगठनों और आम लोगों पर निर्भर हैं. इन मजदूरों को भी घर की याद और परिजनों की चिंता सता रही है. राजस्थान, बिहार हो या मध्य प्रदेश, हर जगह शेल्टर होम में रहने को मजबूर मजदूर अपने घर जाने के लिए बेचैन हैं.

(जयपुर से शरत कुमार, पटना से सुजीत झा और भोपाल से रवीश पाल सिंह का इनपुट)

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