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महाराष्ट्र से दिल्ली तक, कोरोना से निपटने में कैसा है राज्यों का प्रदर्शन?

महाराष्ट्र कोरोना वायरस से सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्य है. वास्तविक संख्या के मामले में देखें तो महाराष्ट्र ने सबसे ज्यादा जांच की है. लेकिन पर कैपिटा टेस्टिंग के मामले में यह प्रति दस लाख पर 782 है जो कि दिल्ली का आधा ही है.

कोरोना मरीजों की जांच को लेकर राज्यों की रिपोर्ट कोरोना मरीजों की जांच को लेकर राज्यों की रिपोर्ट

  • राज्यों में जांच के आंकड़ों में बड़ा अंतर
  • कोरोना वायरस से निपटने के लिए एक प्रणाली नहीं

सर्विलांस और ट्रैकिंग के साथ-साथ व्यापक स्तर पर जांच खतरनाक कोरोना वायरस को नियंत्रित करने का सबसे महत्वपूर्ण कारक है. सरकार ने जांच करने की संख्या काफी बढ़ाई है, लेकिन राज्यों के जांच की दर, कोरोना के प्रसार की दर (prevalence rate) और मृत्यु दर से संबंधित जो आंकड़े हैं, उनमें काफी बड़ा अंतर है. दिल्ली ने अन्य राज्यों की तुलना में सबसे ज्यादा लोगों की जांच की है, इसलिए यहां प्रति दस लाख की आबादी पर ज्यादा मामले सामने आए हैं. प्रति दस लाख की आबादी पर संक्रमण के जितने केस होते हैं, इसे ही प्रिवलेंस रेट यानी प्रसार की दर कहते हैं.

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महाराष्ट्र कोरोना वायरस से सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्य है. वास्तविक संख्या के मामले में देखें तो महाराष्ट्र ने सबसे ज्यादा जांच की है. लेकिन पर कैपिटा टेस्टिंग के मामले में यह प्रति दस लाख पर 782 है जो कि दिल्ली का आधा ही है. दिल्ली ने अब 30560 टेस्ट किए हैं जो कि प्रति दस लाख की आबादी पर 1513 है. इसके बाद आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु और जम्मू-कश्मीर का नंबर है.

सभी राज्यों में दिल्ली की प्रसार दर यानी प्रिवलेंस रेट (प्रति दस लाख की जनसंख्या पर संक्रमण के केस) सबसे ज्यादा है. दिल्ली में प्रति दस लाख पर 122 केस, महाराष्ट्र में 46, गुजरात में 37 और जम्मू-कश्मीर में 30 है.

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विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस से जूझ रहे राज्यों के प्रदर्शन की तुलना करने के लिए जांच दर और मृत्यु दर उपयोगी पैमाना है.

लाइफ कोर्स इपीडिमियोलॉजी एट पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन आफ इंडिया के प्रमुख, प्रोफेसर डॉ गिरिधारा आर बाबू ने इंडिया टुडे से कहा, "किसी राज्य में ऐसे जिले, जहां एक भी केस नहीं है, वहां भी जांच बढ़ाने पर विचार करना महत्वपूर्ण है."

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दिल्ली, राजस्थान, तमिलनाडु, केरल ऐसे राज्य हैं, जहां जांच दर ज्यादा हुई है और मृत्यु दर कम है. इसकी तुलना में महाराष्ट्र और कर्नाटक में जांच दर भी ज्यादा है और मृत्युदर क्रमश: 4.1% और 3.1% है.

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आंकड़े दर्शाते हैं कि झारखंड, पंजाब, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल में जांच दर कम है और मृत्यु दर ज्यादा है.

भारत ने शुक्रवार तक प्रति दस लाख की आबादी पर लगभग 401 लोगों का परीक्षण किया है, जो कि एक हफ्ते में करीब दोगुना हो गया है.

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भारत में कोरोना वायरस का पहला केस जनवरी के आखिरी हफ्ते में सामने आया था. तब से लेकर अब तक 5.25 लाख यानी करीब कुल आबादी के 0.03 प्रतिशत लोगों की जांच की गई है और 24 अप्रैल तक 23 हजार से ज्यादा संक्रमण के केस सामने आ चुके हैं.

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