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कोरोना के 6 महीने और महाराष्ट्र में दस लाख केस- क्या राज्य कर रहा है पर्याप्त टेस्टिंग?

इंडिया टुडे की डेटा इंटेलिजेंस यूनिट (DIU) ने महाराष्ट्र के कोविड-19 टेस्ट पॉजिटिविटी रेट का विश्लेषण किया. DIU ने पाया कि पिछले छह महीने से महामारी की गहरी पैठ के बावजूद, राज्य अभी भी टेस्टिंग में पिछड़ा हुआ है.

सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • महाराष्ट्र के कोविड-19 टीपीआर का विश्लेषण
  • महाराष्ट्र ने अब तक 53 लाख कोरोना टेस्ट किए हैं
  • कोरोना मामलों में महाराष्ट्र ने रूस को पीछे छोड़ा

‘गेहूं अधिक उगाओ, गेहूं युद्ध जीतेगी’, ये मशहूर कथन अमेरिका के 28वें राष्ट्रपति वुडरो विलसन का है जो उन्होंने पहले विश्व युद्ध के दौरान कहा था. 2020 में जब दुनिया कोरोना वायरस महामारी से ग्रस्त है, तो कथन इस तरह हो सकता है- अधिक कोविड-19 टेस्ट करो, टेस्ट युद्ध जीतेंगे. 

दुनिया भर में, एक चीज जो महामारी ने हमें अब तक सिखाई है, वह यह है कि बड़े पैमाने पर टेस्टिंग ने कोविड-19 के बड़े पैमाने पर फैलने में नियंत्रण में मदद की है. 

हालांकि, भारत के सबसे अधिक प्रभावित राज्य, महाराष्ट्र ने सबक नहीं सीखा है क्योंकि यह अभी भी ऊंची टेस्ट पॉजिटिविटी रेट (टीपीआर) रिकॉर्ड कर रहा है. महाराष्ट्र ने हाल ही में पुष्ट कोविड-19 मामलों की संख्या में रूस को पीछे छोड़ दिया है. 

महाराष्ट्र की बढ़ती TPR 

इंडिया टुडे की डेटा इंटेलिजेंस यूनिट (DIU) ने महाराष्ट्र के कोविड-19 टेस्ट पॉजिटिविटी रेट का विश्लेषण किया. DIU ने पाया कि पिछले छह महीने से महामारी की गहरी पैठ के बावजूद, राज्य अभी भी टेस्टिंग में पिछड़ा हुआ है. Covid19india.org की ओर से संकलित आंकड़ों के मुताबिक, महाराष्ट्र ने 5.3 मिलियन (53 लाख) टेस्ट किए हैं और 1.08 मिलियन (10.8 लाख) पुष्ट कोरोना वायरस पुष्ट केसों को पाया. यानी राज्य में TPR 20 प्रतिशत बैठती है. इसके मायने यह है कि राज्य की ओर से किए गए हर 100 टेस्ट्स में 20 को Covid-19 पॉजिटिव पाया गया. 

तस्वीर और साफ होती है जब हम राज्य में दैनिक पॉजिटिविटी रेट को चेक करते हैं. सोमवार को, राज्य ने 67,000 से अधिक टेस्ट किए और 17,000 पॉजिटिव केस पाए गए- 25 प्रतिशत की TPR. पिछले एक हफ्ते से, महाराष्ट्र 25 प्रतिशत की TPR रिकॉर्ड कर रहा है, जो कि राष्ट्रीय औसत (8%) से तिगुनी है. ये महाराष्ट्र में टेस्टिंग की खराब स्थिति को दिखाता है. 

WHO ने कहा, कि कम से कम दो हफ्ते के लिए 5 प्रतिशत से कम TPR रहना संकेत होता है कि महामारी नियंत्रण में है. इसलिए, अगर हम WHO के मानकों पर चलते हैं, तो महाराष्ट्र अब तक सीमा स्तर से पांच गुना अधिक TPR दर्ज कर रहा है. इसका मतलब यह होगा कि महाराष्ट्र में, महामारी अभी भी खत्म होने से दूर है. यहां तक ​​कि जो राज्य कोविड-19 केसों की संख्या में महाराष्ट्र से पीछे है, उन्होंने भी काफी कम TPR रिकॉर्ड की है. 

आंध्र प्रदेश में महाराष्ट्र की तुलना में लगभग आधे केस हैं. आंध्र में सोमवार को 13 प्रतिशत की TPR दर्ज की गई. कोविड केसों की संख्या को लेकर तीसरे नंबर वाले तमिलनाडु ने 7 प्रतिशत TPR दिखाई. वहीं कर्नाटक ने उसी दिन 18 प्रतिशत की TPR दर्ज की. 

ऐसा नहीं है कि महाराष्ट्र संख्या के मामे में अधिक टेस्टिंग नहीं कर रहा है. महाराष्ट्र ने देश में तीसरे नंबर पर सबसे अधिक टेस्ट किए हैं. उत्तर प्रदेश, जो पिछले एक हफ्ते से प्रति दिन 1.4 लाख टेस्ट कर रहा है, कुल 7.3 मिलियन (73 लाख) टेस्ट्स के साथ पहले स्थान पर है. इसके बाद तमिलनाडु है, जिसने लगभग 6 मिलियन (60 लाख) टेस्ट किए हैं. तीसरे नंबर पर महाराष्ट्र ने 5.3 मिलियन (53 लाख) टेस्ट किए हैं. हालांकि,  उत्तर प्रदेश की TPR अभी भी खतरे की रेखा से नीचे है यानि 5 फीसदी से कम है. 

महाराष्ट्र के शहर चिंता का कारण  

DIU  ने महाराष्ट्र के पांच सबसे प्रभावित शहरों के लिए जिलेवार  डेटा को चेक किया, जहां कोविड-19 के पुष्ट केसों की संख्या 50,000 से अधिक है. जैसे कि पुणे, मुंबई, ठाणे, नासिक और नागपुर. महाराष्ट्र के कुल कोविड-19 केसों में 62 प्रतिशत हिस्सेदारी इन्हीं पांच जिलों से है. DIU ने पाया कि इन सभी शहरों में TPR 5 प्रतिशत की सीमा से कम से कम तीन गुना अधिक थी.  

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में लगभग 1 करोड़ लोगों की रिहाइश है. ये महानगर पिछले हफ्ते से औसतन प्रति दिन 15,000  टेस्ट कर रहा है. दिल्ली, जिसकी मुंबई (शहर + उपनगरीय) की तुलना में लगभग दोगुनी आबादी है, ने पिछले हफ्ते मुंबई की तुलना में लगभग तिगुने टेस्ट किए. जबकि दिल्ली की पॉजिटिविटी रेट जून में 30 प्रतिशत से घटकर सितंबर के मध्य तक 7.35 प्रतिशत पर आ गई. वहीं मुंबई में, TPR जुलाई में 23 प्रतिशत से घटकर सितंबर के मध्य में 14 प्रतिशत पर आ गई है. 

मुंबई का पड़ोसी ठाणे जिला, जिसकी जनसंख्या 85 लाख है, औसतन 16 प्रतिशत की ऊंची TPR दर्ज करता है. पुणे, देश का सबसे बुरी तरह प्रभावित जिला है. ये न्यूयॉर्क स्टेट के कोविड-19 केसों की संख्या को अब कभी भी पीछे छोड़ सकता है. पुणे ने अभी तक 25 प्रतिशत की TPR दर्ज की है. 

50,000 से अधिक केस होने पर भी नागपुर औसतन प्रति दिन 5,000 से अधिक टेस्ट नहीं कर रहा है. इस जिले की राज्य में सबसे अधिक TPR 37 प्रतिशत है. 4 सितंबर को 4,670 टेस्ट्स में 1,848 नए केसों का पता चलने पर जिले की TPR 40 फीसदी हो गई. अगस्त के अंत से सितंबर के मध्य तक जिले में दैनिक बढ़ोतरी की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है, हालांकि, दैनिक टेस्टिंग उसी 4,000-5,000 ब्रैकेट में बनी हुई है. सितंबर के पहले दो हफ्तों में, नासिक ने अपनी दैनिक टेस्टिंग को चार गुना बढ़ाकर 1,600 से 6,400 कर दिया है. नतीजतन, इसकी TPR कम हो गई है, फिर भी 20 प्रतिशत के करीब है. 

दोहरी रणनीति अपनाएगी सरकार 

केसों की बढ़ती संख्या के मुद्दे पर महाराष्ट्र कोविड फोर्स डॉ शशांक जोशी ने इंडिया टुडे टीवी से कहा, “हमने टेस्टिंग सुविधाओं को बढ़ा दिया है और हम बहुत सारे RT-PCR कर रहे हैं, हम एंटीजन टेस्ट भी कर रहे हैं. एक निगेटिव एंटीजन टेस्ट की RT-PCR  से पुष्टि होनी चाहिए. अगर ऐसा नहीं होता तो समुदाय में सुपर स्प्रेडर के होने की संभावना बनी रहती है. साथ ही, हमें लोगों को पहले लक्षण पर ही टेस्ट करना चाहिए और इसमें देरी नहीं होनी चाहिए. जल्दी टेस्ट करें ताकि हम उन्हें बेहतर तरीके से मैनेज कर सकें. संभवत: कई लोग घर पर ही बेहतर तरीके से रिकवर हो सकते हैं अगर उन्हें जल्दी डायग्नोसिस और उपर्युक्त ट्रीटमेंट मिलता है.” 

डॉ जोशी ने दोहरी रणनीति ’पर भी प्रकाश डाला, जिसको अपना कर राज्य में वायरस से निपटने की योजना है. उन्होंने कहा, मुंबई को छोड़कर महाराष्ट्र चिंता का कारण है, जहां फिर से केसों में बढ़ोतरी हुई है. बुनियादी तौर पर हमें एक दोहरी रणनीति का पालन करने की आवश्यकता है. सबसे पहले, हमें कठोर सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों के साथ कोविड टैब को बंद करना होगा. मुझे लगता है कि कुछ जगहों पर ऐसा नहीं हुआ है और इसीलिए हमने इतना बड़ा उछाल देखा है. आंकड़े मुझे तब तक चिंता में नहीं डालते जब तक कि केस मृत्यु दर नीची है. लेकिन पुणे और नागपुर के आंकड़े स्पष्ट रूप से चिंता का कारण हैं. 

डॉ जोशी कहते हैं, दूसरा कदम जो हमें करना है, वह है जल्दी पहचान करना और तुरंत इलाज. लोगों को भी पूरी तरह से मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग जैसी सावधानियों को अपना कर सहयोग करना चाहिए. जब तक हम कोविड को लेकर स्टिग्मा नहीं हटाते हैं और टैब को आक्रामक टेस्टिंग, ट्रेसिंग और आइसोलेशन के साथ बंद नहीं करते, तब तक हम संख्याओं को नीचे नहीं ला सकेंगे.

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