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बच्चों में ब्लड क्लॉटिंग के कारण खतरनाक साबित हो रहा कोरोना? नई स्टडी में कई खुलासे

बच्चों में कोरोना को लेकर एक नई स्टडी सामने आई है. इस स्टडी में सामने आया है कि ब्लड क्लॉटिंग की वजह से बच्चों में कोरोना से गंभीर बीमारी हो रही है और उनका इलाज करना मुश्किल हो रहा है.

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कोरोना की नई लहर में बच्चे भी बड़ी संख्या में संक्रमित हो रहे है. (प्रतीकात्मक तस्वीर) कोरोना की नई लहर में बच्चे भी बड़ी संख्या में संक्रमित हो रहे है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • गंभीर रूप से भी संक्रमित हो रहे बच्चे
  • ब्लड क्लॉटिंग बढ़ा रहा बच्चों में खतरा

कोरोना को लेकर अब तक कहा जा रहा था कि अगर इससे बच्चे संक्रमित भी हो जाते हैं तो उन्हें ज्यादा गंभीर बीमारी नहीं होगी. लेकिन अब एक ऐसी स्टडी सामने आई है, जिसने चिंता बढ़ा दी है. रिसर्चर्स ने कुछ ऐसी बातें बताईं हैं जिससे बच्चों के लिए भी कोरोना गंभीर साबित हो सकता है. 

नेचर कम्युनिकेशन जर्नल में पब्लिश एक स्टडी में कोरोना संक्रमित बच्चों में कुछ बीमारियों की पहचान की है. स्टडी में बताया गया है कि कुछ संक्रमित बच्चों में मल्टीसिस्टम इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम देखे गए हैं, जिसमें शरीर के कई हिस्सों में सूजन आ जाती है. इनमें दिल, फेफड़े और ब्रेन भी शामिल हैं. इसके अलावा कुछ बच्चों में एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम भी देखे गए हैं, जो फेफड़ों की एक बीमारी होती है. 

रिसर्चर्स ने ये भी पाया है कि कोरोना से संक्रमित बच्चों में ब्लड क्लॉटिंग यानी खून के थक्के जमने से गंभीर बीमारी हो रही है.

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न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया की मेलबर्न यूनिवर्सिटी से PhD कर रहे कॉनर मैककैफर्टी का कहना है कि आमतौर पर बच्चे कोरोना को लेकर कम संवेदनशील होते हैं और संक्रमित होते भी हैं तो उनमें हल्के लक्षण होते हैं, लेकिन कुछ बच्चों को गंभीर बीमारी भी हो रही है और ऐसा क्यों हो रहा है, ये अभी तक साफ नहीं हो पाया है. उन्होंने बताया कि जिन बच्चों को गंभीर बीमारी थी, उनमें ब्लड क्लॉटिंग की समस्या देखी गई.

इस रिसर्च के लिए 20 स्वस्थ बच्चों के अलावा मल्टीसिस्टम इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम और एक्यूट रेस्पेरिटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम से जूझ रहे 33 कोरोना संक्रमित बच्चों के ब्लड सैंपल लिए गए.

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रिसर्चर्स का कहना है कि ऐसे कोरोना संक्रमित बच्चे जिनमें मल्टीसिस्टम इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम भी है, उनको कावासाकी डिसीज और टोक्सिक शॉक सिंड्रोम जैसे बुखार, पेट दर्द, उल्टी, त्वचा पर लाल चकत्ते और आंख आना जैसे लक्षण देखे गए हैं. इससे इन बच्चों को जल्द इलाज कर पाना मुश्किल हो रहा है और बच्चों को ठीक होने में समय लग रहा है.

ऑस्ट्रेलिया के मरडोक चिल्ड्रन्स रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर Vera Ignjatovic ने बताया कि ब्लड क्लॉटिंग और इम्युन सिस्टम पर वायरस कैसे रिएक्ट कर रहा है, ये जानने से गंभीर रूप से संक्रमित बच्चों का जल्द इलाज करने में मदद मिलेगी. 

 

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