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कोरोना के सामने घुटनों पर आई दुनिया की अर्थव्यवस्था

आईएमएफ ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर भी अपने पहले के अनुमानों में सुधार किया है. अप्रैल में इसने अनुमान लगाया था कि भारतीय अर्थव्यवस्था 1.9 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी, लेकिन 24 जून को अपने ताजा अनुमान में आईएमएफ ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था -4.5 फीसदी तक सिकुड़ जाएगी.

कोरोना ने सभी देशों के अर्थव्यवस्था को किया बर्बाद कोरोना ने सभी देशों के अर्थव्यवस्था को किया बर्बाद

  • 5,000 बड़ी कंपनियां एफडीआई पर लगा सकती है रोक
  • 2020 में वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान
तीन प्रमुख वैश्विक वित्तीय संस्थानों ने चेतावनी दी है कि कोविड-19 महामारी के आर्थिक परिणाम आशंका से भी बदतर होंगे. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (UNCTAD) और विश्व बैंक का अनुमान है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार अनुमानों से ज्यादा धीमी रह सकती है. लगभग 5,000 बड़ी बहु-राष्ट्रीय कंपनियां अपने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पर रोक लगा सकती हैं, क्योंकि उनकी कमाई कोरोना वायरस लॉकडाउन के चलते कम हो गई है.

आईएमएफ का अनुमान है कि कोरोना महामारी 2020 में वैश्विक अर्थव्यवस्था को आशंका से ज्यादा चोट पहुंचाएगी और इसके बाद 2021 में सुस्त रिकवरी होगी. आईएमएफ के वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक के ताजा संस्करण के मुताबि​क, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 2020 में -5 प्रतिशत तक सिकुड़ जाएगी, जो कि अप्रैल के अनुमान से करीब 2 ​फीसदी नीचे है.

आईएमएफ ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर भी अपने पहले के अनुमानों में सुधार किया है. अप्रैल में इसने अनुमान लगाया था कि भारतीय अर्थव्यवस्था 1.9 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी, लेकिन 24 जून को अपने ताजा अनुमान में आईएमएफ ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था -4.5 फीसदी तक सिकुड़ जाएगी. आईएमएफ ने कहा है, “लंबी अवधि के लॉकडाउन के बाद भारत की अर्थव्यवस्था में 4.5 फीसदी तक की गिरावट का अनुमान है. अप्रैल में जिस रिकवरी की उम्मीद थी, उससे बहुत कम रहेगी.”

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अब सवाल यह उठता है कि पिछले दो महीनों में ऐसा क्या हुआ कि आईएमएफ को अपने ही अनुमानों में इतना ज्यादा संशोधन करना पड़ा?

लगभग 5,000 प्रमुख वैश्विक फर्म ऐसी हैं जिनकी कमाई औसतन 40 फीसदी तक कम होने की उम्मीद है. ये कंपनियां दुनिया की लगभग आधी एफडीआई के लिए जिम्मेदार हैं. अंकटाड (UNCTAD) अपनी नवीनतम 'वर्ल्ड इन्वेस्टमेंट रिपोर्ट 2020' में कहा है कि इन कंपनियों की आय में गिरावट की वजह से साल 2020 में 40 फीसदी तक की कमी आएगी. 2005 के बाद यह पहली बार होगा, जब प्रत्यक्ष विदेशी निवेश एक ट्रिलियन डॉलर नीचे आएगा. इसके अलावा, 2021 में भी एफडीआई 5-10 फीसदी नीचे आएगा और 2022 तक इसके पुनर्जीवित नहीं होने का अनुमान है.

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संयुक्त राष्ट्र की व्यापार और विकास एजेंसी अंकटाड ने चेतावनी दी है कि कोरोना से संबंधित उपायों, खास कर लंबे लॉकडाउन की वजह से बहु-राष्ट्रीय कंपनियों को अपने मौजूदा और भविष्य के निवेश की योजना को संशोधित करने के लिए मजबूर होना पड़ा है. एशिया की बात करें तो यहां 2020 में एफडीआई के प्रवाह में 45 फीसदी की गिरावट की भविष्यवाणी की गई है.

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अंकटाड की रिपोर्ट कहती है, “दक्षिण एशिया में एफडीआई में तेजी से गिरावट आने का अनुमान है.”

विश्व बैंक का अनुमान है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था इस वर्ष -5.2 फीसदी तक लुढ़क जाएगी. यह जनवरी, 2020 के अनुमान की तुलना में 7.7 प्रतिशत की महत्वपूर्ण गिरावट है.

विश्व बैंक के अध्यक्ष डेविड मलपास ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के अपने आकलन के बारे में कहा, “हमारा अनुमान कहता है कि यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की सबसे गहरी वैश्विक मंदी है.”

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विश्व बैंक ने जून में जो अनुमान लगाया था, उसमें बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की जीडीपी वृद्धि में सबसे बड़ा संशोधन भारत की जीडीपी में किया है. विश्व बैंक ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में भारत की जीडीपी वृद्धि -3.3 फीसदी होने का अनुमान लगाया है. जनवरी 2020 के अनुमानों की तुलना में यह 9 फीसदी अंकों का बड़ा अंतर है.

शीर्ष वित्तीय संस्थान अभी भी कोरोना वायरस महामारी के वास्तविक नतीजे का आकलन कर रहे हैं. अंकटाड के महासचिव मुखिसा किटूई ने कहा है, “नजरिया अत्यधिक अनिश्चित है. संभावनाएं इस पर निर्भर करती हैं कि स्वास्थ्य संकट की अवधि और महामारी के आर्थिक प्रभावों को कम करने वाली नीतियों की प्रभावशीलता कितनी होगी.”

1930 के दशक की महामंदी के बाद करीब 100 वर्षों में पहली बार है जब विश्व अर्थव्यवस्था ऐसे संकटपूर्ण ढंग से सिकुड़ रही है और किसी देश को नहीं बख्श रही है. ये सभी रिपोर्ट इस बात से सहमत हैं कि कमजोर और उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर कोविड-19 का प्रभाव सबसे बुरा है.

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आईएमएफ की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ का कहना है, “यह 1930 की महामंदी के बाद की सबसे खराब मंदी है.”

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