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कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में भारत की मृत्यु दर सबसे कम

जून की शुरुआत में भारत में CFR 2.83 फीसदी था. 17 जून को यह 3.36 फीसदी तक बढ़ गया, लेकिन तब से इसमें गिरावट जारी है. इससे पहले, लॉकडाउन के पहले सप्ताह में भारत में 2.1 प्रतिशत का सीएफआर दर्ज किया गया था, जब देश में सिर्फ 918 केस थे और 19 मौतें हुई थीं.

भारत में कोरोना से मरने वालों की संख्या कम (प्रतीकात्मक तस्वीर) भारत में कोरोना से मरने वालों की संख्या कम (प्रतीकात्मक तस्वीर)

  • भारत में करीब 18 लाख केस और 39,000 मौतें दर्ज हुईं
  • भारत में बढ़ते केस के बीच एक उम्मीद की किरण भी है
  • भारत की मृत्यु दर में पिछले महीने से ही गिरावट आ रही

भारत हर दिन कोरोना महामारी को लेकर नया रिकॉर्ड दर्ज कर रहा है. पिछले सप्ताह भारत में हर दिन औसतन 53,000 से ज्यादा केस और करीब 800 मौतें दर्ज हुई हैं. 4 अगस्त तक भारत में करीब 18 लाख केस और 39,000 मौतें दर्ज हुईं. भारत बढ़ते केस के मामले में विश्व में तीसरे और मौतों के मामले में पांचवें स्थान पर है.

हालांकि, भारत में बढ़ते केस के बीच एक उम्मीद की किरण भी है. सबसे ज्यादा प्रभावित देशों के मुकाबले भारत में केस मृत्यु दर (CFR) यानी सं​क्रमित लोगों में से जितनी मौतें होती हैं, वह काफी कम है. इसके अलावा, भारत की केस मृत्यु दर में पिछले महीने से ही गिरावट आ रही है.

मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि भारत का सीएफआर 2.1 फीसदी तक पहुंच गया है. देश में 1 जून को लॉकडाउन में ढील दी गई है, उसके बाद से मृत्यु दर का ये सबसे निचला स्तर है. मीडिया को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा, “ये अच्छा संकेत है कि (सीएफआर में) गिरावट जारी है”.

जून की शुरुआत में भारत में CFR 2.83 फीसदी था. 17 जून को यह 3.36 फीसदी तक बढ़ गया, लेकिन तब से इसमें गिरावट जारी है. इससे पहले, लॉकडाउन के पहले सप्ताह में भारत में 2.1 प्रतिशत का सीएफआर दर्ज किया गया था, जब देश में सिर्फ 918 केस थे और 19 मौतें हुई थीं.

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इंडिया टुडे डाटा इंटेलीजेंस यूनिट (DIU) ने कोरोना से 20,000 से ज्यादा मौतों वाले देशों के CFR का विश्लेषण किया और पाया कि सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में भारत का CFR सबसे कम है.

हालांकि, भारत में दैनिक केस और मौतें बढ़ रही हैं. इस अर्थ में भारत की स्थिति नियंत्रण में नहीं है. लेकिन भारत कुछ मापदंडों पर फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम, इटली और मैक्सिको से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है.

इन देशों में दैनिक औसत केस काफी कम हुए हैं, लेकिन उनके सीएफआर ज्यादा हैं. 5 अगस्त तक फ्रांस का सीएफआर 15.8 फीसदी, यूके का 15.1 फीसदी, इटली का 14.2 फीसदी और मेक्सिको का करीब 10 फीसदी था.

दैनिक मौतों को कम करने के लिए यूरोपीय देशों ने जो तरीके अपनाए, ब्राजील, अमेरिका और भारत कहीं से भी उसके करीब नहीं लगते. लेकिन केस की संख्या काफी ज्यादा होने की वजह से इन तीनों देश का सीएफआर काफी कम है. ब्राजील में CFR 3.4 फीसदी है, जबकि अमेरिका में 3.3 फीसदी है.

पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के महामारी विशेषज्ञ डॉ गिरिधर आर बाबू कहते हैं कि अगर टेस्ट और ज्यादा किए जाएं, ज्यादा केस सामने आएं तो CFR में और कमी आएगी.

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डॉ गिरिधर ने इंडिया टुडे से कहा, “CFR ये अनुमान लगाने का पूरी तरह सही तरीका नहीं है कि किसी देश ने कितनी प्रगति की. बस टेस्ट की संख्या बढ़ा दी जाए तो केस मृत्यु दर और कम हो जाएगी. प्रति दस लाख की आबादी पर मौतें, प्रति दस लाख पर टेस्ट और प्रति दस लाख पर पॉजिटिविटी रेट के जरिए ही प्रगति का सही आकलन किया जा सकता है.”

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भारत में केस इतनी तेजी से बढ़ रहे हैं, क्योंकि इसने टेस्ट संख्या काफी बढ़ाई है. रैपिड एंटीजन टेस्ट और आरटी-पीसीआर को मिलाकर भारत अब तक 2.1 करोड़ टेस्ट कर चुका है. टेस्ट करने की ये संख्या चीन (9 करोड़), अमेरिका (6 करोड़) और रूस (3 करोड़) के बाद चौथी सबसे बड़ी संख्या है.

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