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भारतीय कोरोना वैक्सीन पर साइबर अटैक, चीनी हैकर्स ने की फॉर्मूला चुराने की कोशिश

हैकिंग की ये कोशिश चीन समर्थित हैकर्स के एक ग्रुप ने की थी. इंटेलिजेंस फर्म ने बताया कि जिन दो वैक्सीन निर्माताओं के IT सिस्टम को हैक करने की कोशिश की गई उनके वैक्सीन के डोज का उपयोग देश के टीकाकरण अभियान में किया जा रहा है.

कोरोना वैक्सीन (फ़ोटो- रॉयटर्स) कोरोना वैक्सीन (फ़ोटो- रॉयटर्स)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • चीनी हैकर्स के निशाने पर वैक्सीन बनाने वाली भारतीय कंपनियां
  • साइबर इंटेलिजेंस फर्म ने किया खुलासा
  • भारतीय वैक्सीन निर्माताओं के IT सिस्टम को किया टारगेट

कोरोना वैक्सीन बनाने वाली भारतीय कंपनियां चीनी हैकर्स के निशाने पर हैं. भारत में कोरोना टीकाकरण के बीच भारतीय वैक्सीन निर्माताओं के आईटी (IT) सिस्टम को हैकर्स ने टारगेट किया. भारतीय वैक्सीन निर्माताओं के आईटी (IT) सिस्टम को हैक करने की कोशिश की गई. हैकिंग की ये कोशिश चीन समर्थित हैकर्स के एक ग्रुप ने की थी. 

रॉयटर्स ने साइबर इंटेलिजेंस फर्म Cyfirma के हवाले से बताया कि जिन दो वैक्सीन निर्माताओं के IT सिस्टम को हैक करने की कोशिश की गई उनके वैक्सीन के डोज का उपयोग देश के टीकाकरण अभियान में किया जा रहा है. बताया गया कि इसका मकसद भारत की कोरोना वैक्सीन सप्लाई चेन को बाधित करना था. 

रिपोर्ट के मुताबिक, चीन समर्थित हैकर्स के एक ग्रुप ने हाल के हफ्तों में कोरोना वैक्सीन बनाने वाली दो भारतीय कंपनियों के IT सिस्टम को निशाना बनाया. इनमें भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया यानी SII शामिल हैं. हैकर्स ने इन कंपनियों की IT सिक्योरिटी में सेंध लगाने की कोशिश की. 

सिंगापुर और टोक्यो में स्थित साइबर इंटेलिजेंस फर्म Cyfirma ने बताया कि चीनी हैकर्स APT10, जिसे स्टोन पांडा के नाम से भी जाना जाता है ने भारत के बायोटेक और SII के आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई चेन सॉफ्टवेयर की कमजोरियों का पता लगाने की कोशिश की थी. बता दें कि SII दुनिया के कई देशों के लिए वैक्सीन बना रहा है. 

गौरतलब है कि भारत और चीन दोनों ही देश अलग-अलग देशों को कोरोना वैक्सीन उपलब्ध करवा रहे हैं. भारत दुनियाभर में बिकने वाले सभी वैक्सीन का 60% से अधिक उत्पादन करता है. ऐसे में चीन भारत की कोरोना वैक्सीन सप्लाई चेन को बाधित करना चाहता था. इसीलिए हैकर्स ने भारतीय वैक्सीन निर्माताओं के आईटी सिस्टम को टारगेट किया.

वहीं, इस मसले पर चीन के दूतावास की तरफ से बयान आया है. जिसमें कहा गया कि चीन साइबर सुरक्षा के रक्षक के तौर पर किसी भी तरह के साइबर अटैक का दृढ़ता से विरोध करता है. साइबर अटैक के मसले पर पूर्व धारणा या अनुमानों की कोई जगह नहीं होनी चाहिए. किसी पर बिना पर्याप्त सबूत के आरोप लगाना गैर जिम्मेदाराना व्यवहार है.   

उधर, माइक्रोसॉफ्ट ने नवंबर में कहा था कि उसने भारत, कनाडा, फ्रांस, दक्षिण कोरिया और अमेरिका में COVID-19 वैक्सीन कंपनियों को टारगेट करने वाले रूस और उत्तर कोरिया के साइबर हमलों का पता लगाया. उत्तर कोरियाई हैकर्स ने ब्रिटिश ड्रगमेकर एस्ट्राजेनेका के सिस्टम में सेंध लगाने की भी कोशिश की. 

रिपोर्ट- शुभनम वर्मा

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