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UP में एंटीबॉडी टेस्टिंग की शुरुआत, 100 हेल्थ वर्कर्स का किया गया टेस्ट

केजीएमयू उत्तर प्रदेश का इकलौता अस्पताल है, जहां एंटीबॉडी टेस्टिंग की शुरुआत हुई है. पहले चरण में 100 हेल्थ वर्कर्स और प्लाज्मा डोनर्स के एंटीबॉडी टेस्ट किए गए हैं.

सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

  • केजीएमयू में शुरू हुआ एंटीबॉडी टेस्टिंग
  • पहले चरण में 100 हेल्थ वर्कर्स का टेस्ट

उत्तर प्रदेश के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी यानि केजीएमयू में अब कोरोना के एंटीबॉडी टेस्टिंग की शुरुआत हो चुकी है. केजीएमयू प्रदेश का इकलौता अस्पताल है, जहां एंटीबॉडी टेस्टिंग की शुरुआत हुई है. पहले चरण में 100 हेल्थ वर्कर्स और प्लाज्मा डोनर्स के एंटीबॉडी टेस्ट किए गए हैं.

केजीएमयू के एंटीबॉडी टेस्टिंग की हेड डॉक्टर तूलिका चंद्रा ने आजतक से खास बातचीत में कहा कि एंटीबॉडी टेस्टिंग रैपिड टेस्टिंग जैसा है, जहां 3 से 4 घंटे में बिल्कुल सटीक नतीजे आते हैं. यह कोरोनावायरस एंटी पीसीआर टेस्ट से इस मायने में अलग है. यह तय करता है कि किसी व्यक्ति के शरीर में एंटीवायरस बना है या नहीं.

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डॉक्टर तूलिका चंद्रा ने कहा कि एंटीबॉडी टेस्टिंग से आने वाले वक्त में जब हर्ड इम्युनिटी की बात होगी तो यह तय होगा कि कितने लोगों के बीच कोरोनावायरस के खिलाफ हर्ड इम्युनिटी तैयार हो चुकी है. एंटीबॉडी टेस्टिंग सर्विलांस का इस्तेमाल खासकर हेल्थ वर्कर, डॉक्टर, नर्सेज और फ्रंटलाइन वॉरियर्स पर होगा.

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डॉक्टर तूलिका चंद्रा का कहना है कि एंटीबॉडी टेस्ट करके देखा जाएगा कि फ्रंटलाइन वॉरियर्स के अंदर यह एंटीबॉडी डिवेलप हुई है या नहीं. अगर यह एंटीबॉडी उनके भीतर डिवेलप हो चुकी होगी तो वह ज्यादा सक्षम होंगे कोरोना से लड़ने के लिए. फिलहाल प्रदेश में एंटीबॉडी टेस्ट की शुरुआत कर दी गई है.

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गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में कुल मरीजों का आंकड़ा 17 हजार 731 है, जिसमें 550 लोगों की मौत हो चुकी है. कोरोना से अब तक करीब 11 हजार लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि प्रदेश में कुल एक्टिव केस की संख्या 6186 है.

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