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देश में कुछ दिनों में खत्म हो जाएगा ऑक्सीजन का संकट, 300 फीसदी बढ़ी सप्लाई

कोरोना की दूसरी लहर के बीच देश में ऑक्सीजन की भारी किल्लत महसूस की जा रही है. इस पर काबू पाने के चौतरफा प्रयास हो रहे हैं. ऐसे में एक अच्छी खबर आयी है कि देश में ऑक्सीजन की आपूर्ति 300% बढ़ी है, जानें पूरी डिटेल.

देश में ऑक्सीजन सप्लाई 300% बढ़ी (फाइल फोटो) देश में ऑक्सीजन सप्लाई 300% बढ़ी (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ‘देश में ऑक्सीजन का इंडस्ट्रियल उपयोग हुआ जीरो’
  • ‘सप्लाई चेन की समस्या को कुछ दिन में सुलझा लेंगे’
  • ’आयात किए गए हैं 40 नए क्रायोजेनिक टैंकर’

कोरोना की दूसरी लहर के बीच देश में ऑक्सीजन की भारी किल्लत महसूस की जा रही है. इस पर काबू पाने के चौतरफा प्रयास हो रहे हैं. ऐसे में एक अच्छी खबर आयी है कि देश में ऑक्सीजन की आपूर्ति 300% बढ़ी है, जानें पूरी डिटेल

घट रहा कोरोना, बढ़ रही ऑक्सीजन
कोरोना से सबसे बुरी तरह प्रभावित महाराष्ट्र और गुजरात में कोरोना के मामले घटना शुरू हुए हैं. इस बीच देश में मेडिकल ऑक्सीजन की उपलब्धता बढ़ी है. ऑक्सीजन उत्पादन करने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी आईनॉक्स एयर प्रोडक्ट्स का कहना है कि अब देश में प्रतिदिन 9,200 टन मेडिकल ऑक्सीजन उपलब्ध है.

ऑक्सीजन भंडारण की समस्या सुलझा लेंगे
आईनॉक्स एयर प्रोडक्ट्स के डायरेक्टर सिद्धार्थ जैन का कहना है कि एक महीने से भी कम समय में इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन को मेडिकल ऑक्सीजन में बदलकर देश में कुल उपलब्ध ऑक्सीजन क्षमता 9,200 टन प्रतिदिन हो गई है. यह ऑक्सीजन की आपूर्ति में लगभग 300% का इजाफा है. मुख्य समस्या ऑक्सीजन के भंडारण की है उसे भी कुछ दिनों में सुलझा लिया जाएगा. कोविड से पहले भारत प्रतिदिन 7,200 टन ऑक्सीजन का उत्पादन करता था और इसमें से मात्र 15% की जरूरत ही मेडिकल उपयोग के लिए पड़ती थी.

ऑक्सीजन का इंडस्ट्रियल उपयोग जीरो
जैन ने कहा कि अब ऑक्सीजन का इंडस्ट्रियल यूज शून्य हो गया है. ऐसे में पूरी ऑक्सीजन उत्पादन क्षमता को मेडिकल ऑक्सीजन के प्रोडक्शन में लगा दिया गया है. कोविड की पहली लहर के पीक पर भी देश में ऑक्सीजन की उत्पादन क्षमता मात्र 3,000 टन प्रतिदिन थी. देश के अधिकतर ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र पूर्वी और उत्तरी भारत में है. इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन के सबसे बड़े उपभोक्ता स्टील प्लांट हैं इसलिए उन्हीं के संयंत्रों के पास ऑक्सीजन संयंत्र स्थापित हैं. 

सप्लाई चेन है मुख्य समस्या
देश में ऑक्सीजन की किल्लत को लेकर सिद्धार्थ जैन का कहना है कि ऑक्सीजन के उत्पादन से ज्यादा समस्या उसकी सप्लाई की है. आम तौर पर क्रायोजेनिक टैंकर में तरल ऑक्सीजन को 200 किलोमीटर तक ले जाया जाता है. अब सूदूर इलाकों में भी ऑक्सीजन की मांग बढ़ने से 1,000 किलोमीटर तक इन टैंकर को जाना पड़ रहा है. कोविड संकट से पहले देश में ऐसे मात्र 1,200 टैंकर थे और नाइट्रोजन एवं आर्गन को ले जाने वाले अन्य 1,200 टैंकरों को मेडिकल ऑक्सीजन ले जाने वाले टैंकरों में बदलने के लिए हाल ही मंजूरी दी गई है. जबकि 40 का आयात किया गया है. वहीं देशभर में ऑक्सीजन एक्सप्रेस चलाई जा रही है. हवाई मार्ग से भी ऑक्सीजन पहुंचाई जा रही है, इसलिए इसकी सप्लाई की समस्या को कुछ दिन में दूर कर लिया जाएगा.

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