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कोरोना संकट: मध्य प्रदेश में बन रही हैं इम्यूनिटी बूस्टर साड़ियां, मसालों से होता है ट्रीट

इम्यूनिटी बूस्ट करने वाली इन साड़ियों का नाम 'आयुर्वस्त्र' तय किया गया है. 'आयुर्वस्त्र' नाम की इन साड़ियों को बनाने में विशेष हुनर और समय लगता है. यहां साड़ियां कई पड़ाव और बारीकियों से गुजरकर तैयार होती हैं.

स्किन की इम्यूनिटी बढ़ाने का दावा (फोटो- आजतक) स्किन की इम्यूनिटी बढ़ाने का दावा (फोटो- आजतक)

  • इम्यूनिटी बढ़ाने वाली साड़ी बाजार में उपलब्ध
  • प्राचीन हर्बल मसालों से होता है ट्रीट

क्या वस्त्र कोरोना के खिलाफ अस्त्र बन सकते हैं? क्या साड़ी कोरोना वायरस से बचाव के लिए कवच बन सकती है? सुनने में भले अजीब लग रहा है लेकिन मध्य प्रदेश में इन दिनों ऐसी साड़ियां बनाई जा रही हैं जो प्राचीन काल से इस्तेमाल किए जा रहे मसालों से ट्रीट होने के बाद तैयार की जाती है. आइए आपको बताते हैं कि ये साड़ियां इम्यूनिटी बूस्टर कैसे बनती हैं.

एक तरह लोग आयुर्वेदिक दवाओं और काढ़े से अपनी इम्यूनिटी बढ़कर, कोरोना से लड़ने में जुटे हुए हैं, तो वहीं मध्य प्रदेश में अब इम्यूनिटी बढ़ाने वाली साड़ी भी बाजार में उपलब्ध है. दरअसल, मध्यप्रदेश हथकरघा एवं हस्तशिल्प निगम ने नया प्रयोग करते हुए नया प्रयोग शुरू किया है. जहां साड़ियों को सैंकड़ों साल पुरानी प्राचीन हर्बल मसालों से ट्रीट किया जाता है. निगम का दावा है कि इस इम्यूनिटी बूस्टर साड़ी से लोगों की स्किन की इम्यूनिटी मजबूत होगी.

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इम्यूनिटी बूस्टर साड़ी बनाने के लिए बाकायदा भोपाल के एक टेक्सटाइल एक्सपर्ट को जिम्मेदारी दी गयी है. 'आजतक' की टीम ने उस वर्कशॉप का दौरा किया, जहां स्किन इम्यूनिटी बढ़ाने का दावा करने वाली ये साड़ियां बनाई जा रही हैं.

दरअसल इम्यूनिटी बूस्ट करने वाली इन साड़ियों का नाम 'आयुर्वस्त्र' तय किया गया है. 'आयुर्वस्त्र' नाम की इन साड़ियों को बनाने में विशेष हुनर और समय लगता है. यहां साड़ियां कई पड़ाव और बारीकियों से गुजरकर तैयार होती हैं.

इसमें सबसे पहले लौंग, बड़ी इलायची, छोटी इलायची, चक्रफूल, जावित्री, दालचीनी, काली मिर्च, शाही जीरा, तेज पत्ता के मसाले का इस्तेमाल किया जाता है. इसके बाद औषधीय मसालों को लोहे के इमाम दस्ते से बारीकी से कूटा जाता है. 48 घंटे से ज्यादा समय तक इन मसाले की पोटली को पानी में रखा जाता है.

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फिर एक भट्टी पर औषधी युक्त पानी की पोटली रखकर इसकी भाप से वस्त्र बनाने वाले कपड़े को करीब घंटों तक ट्रीट किया जाता है. इसके बाद इम्यूनिटी बूस्टर वस्त्र से साड़ियां और मास्क तैयार किए जाते हैं. एक साड़ी बनने में करीब 5-6 दिन का समय लग जाता है.

इम्यूनिटी बढ़ाने का दावा करने वाली इस साड़ी को तैयार करने वाले टेक्सटाइल एक्सपर्ट विनोद मालेवर का कहना है कि संक्रमण से बचाने का ये सदियों पुराना तरीका है. इसी के चलते करीब 2 महीने के ट्रायल के बाद सटीक हल निकला और इन मसालों का मिश्रण तैयार हुआ. जिसकी इम्यूनिटी पावर का असर कपड़ों की 4-5 धुलाई तक रहता है.

इसलिए धुलाई के लिए कम कैमिकल युक्त पावडर की सलाह दी जाती है. टेक्सटाइल एक्सपर्ट विनोद मालेवर की मानें तो इससे स्किन की इम्यूनिटी बढ़ती है.

साड़ी और मास्क वाले इम्यूनिटी बूस्टर आयुर्वस्त्र आम लोगों तक कैसे पहुंचे इसके लिए मध्यप्रदेश सरकार के हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम ने बकायदा सरकारी एम्पोरियम से इन साड़ियों को बेचने की भी व्यवस्था की है.

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एमपी हथकरघा एवं हस्तशिल्प निगम के कमिश्नर राजीव शर्मा ने 'आजतक' से बात करते हुए बताया कि 'अलग-अलग प्रिंट की ये साड़ियां करीब 3 हजार रुपये की कीमत से शुरू होती है. उन्होंने कहा कि ऋषि मुनियों के द्वारा स्वास्थ्य और इम्यूनिटी बढ़ाने वाले वस्त्रों की प्राचीन विद्या और परंपरा को जीवित करने का मौका मिला है, वो भी इस दौर में जब बीमारी की वजह से लोगों का मनोबल गिर रहा है. इसलिए ये कांसेप्ट लांच किया है, जिसमें प्राचीन हर्बल मसालों से साड़ी बनवाई जा रही है.

उन्होंने कहा कि फिलहाल भोपाल और इंदौर में हम ये साड़ी बेच रहे हैं, लेकिन आने वाले दिनों में हमलोग देश के सभी 36 शोरूम में इन साड़ियों को बेचने के लिए भेजेंगे.

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