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ICMR प्रमुख बोले- देश में 3 वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल जारी, सीरम को तीसरे चरण की मंजूरी का इंतजार

आईसीएमआर के महानिदेशक प्रो (डॉ) बलराम भार्गव ने कहा कि भारत में 3 वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है. कैडिला और भारत बॉयोटेक ने पहले चरण की टेस्टिंग पूरी की है. सीरम इंस्टीट्यूट ने दूसरे चरण का B3 ट्रायल पूरा कर लिया है.

भारत में कोरोना वैक्सीन के लिए 3 जगह क्लीनिकल ट्रायल चल रहा (सांकेतिक-पीटीआई) भारत में कोरोना वैक्सीन के लिए 3 जगह क्लीनिकल ट्रायल चल रहा (सांकेतिक-पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ICMR, DG- 2 कंपनियों के क्लीनिकल ट्रायल का पहला चरण पूरा
  • 'सीरम इंस्टीट्यूट को तीसरे चरण के ट्रायल की अनुमित का इंतजार'
  • 'तीसरे चरण की टेस्टिंग 14 स्थानों पर 1,500 मरीजों के साथ शुरू होगी'

कोरोना के तेजी से बढ़ते मामले के बीच दुनिया के कई देशों के साथ-साथ भारत में भी वैक्सीन को लेकर खोज का काम तेजी से चल रहा है. आईसीएमआर के प्रमुख बलराम भार्गव ने कहा कि भारत में 3 वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है जिसमें 2 कंपनियों ने पहला चरण और एक कंपनी ने 2 चरण पूरे कर लिए हैं तथा तीसरे चरण के ट्रायल के लिए मंजूरी का इंतजार है.

आईसीएमआर के महानिदेशक प्रो (डॉ) बलराम भार्गव ने कहा कि भारत में 3 वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है. कैडिला और भारत बॉयोटेक ने पहले चरण की टेस्टिंग पूरी की है. सीरम इंस्टीट्यूट ने दूसरे चरण का B3 ट्रायल पूरा कर लिया है, और मंजूरी के बाद तीसरे चरण की टेस्टिंग (14 स्थानों पर 1,500 मरीजों के साथ) शुरू की जाएगी. 

आईसीएमआर के प्रमुख बलराम भार्गव ने वैक्सीन ट्रायल के बारे में कहा कि यह अभी भी समकक्ष समीक्षा के दौर से गुजर रहा है. एक बार जब समकक्ष समीक्षा हो जाती है और हमें पूरा प्रकाशन मिल जाता है, तो इस आंकड़े पर फिर से नेशनल टास्क फोर्स और स्वास्थ्य मंत्रालय की संयुक्त निगरानी समूह द्वारा विचार किया जाएगा, फिर एक निर्णय लिया जाएगा कि हमें इसे जारी रखना है या नहीं.

वैक्सीन को लेकर भारत के योगदान के बारे में उन्होंने कहा कि भारत ने 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 25 जिलों के 39 अस्पतालों में 464 रोगियों पर यादृच्छिक परीक्षण में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योगदान दिया है.

कोरोना से फिर से संक्रमण के मामले पर डॉक्टर भार्गव ने कहा कि हम फिर से कोरोना से संक्रमित हो सकते हैं लेकिन यह चिंता का विषय नहीं है जैसा कि हांगकांग में देखा गया है. लेकिन पुन: संक्रमण आमतौर पर नेचर में हल्का होता है. पीक और वेब अलग चीजें हैं.

प्लाज्मा थेरेपी के बारे में डॉक्टर भार्गव ने कहा कि प्लाज्मा थेरेपी का उपयोग 100 सालों से भी अधिक समय से किसी न किसी रूप में किया जाता रहा है. अब इसका उपयोग कोरोना महामारी के इलाज के रूप में किया जा रहा है. यह मदद करता है या नहीं इसका अध्ययन किया जा रहा है.

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