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कोरोना

बच्चों की फोटोग्राफी में दिखी कोरोना काल के दर्द, संघर्ष और प्रेरणा की कहानियां

Covid-19 Children Photography
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कोरोना काल में दुनिया डरी थी. थकी थी. बीमार थी. लेकिन हिम्मत टूटी नहीं. लोग संघर्ष करते रहे. जूझते रहे. आखिरकार कोरोना से जंग जीती. इसी जिजिविषा को दिखाती हैं ये तस्वीरें...बच्चों के लिए काम करने वाली गैर-सरकारी संस्था चाइल्ड राइट्स एंड यू (CRY) ने हाल ही में इंडिया हैबिटेट सेंटर में एक फोटोग्राफी प्रदर्शनी लगवाई. जिसमें देशभर के 150 बच्चों ने भाग लिया. 15 वर्षीय साची धमीजा की यह तस्वीर बताती है कि उनके माता-पिता दोनों ही फ्रंटलाइन वर्कर हैं. दोनों डॉक्टर हैं. उन्होंने दिन-रात एक करके हजारों लोगों की जान बचाई. उनके संघर्ष की यह तस्वीर प्रेरणा देती है. 

Covid-19 Children Photography
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17 वर्षीय अन्वेश के लिए कोरोनाकाल बेहद कठिन समय था. उनकी 86 वर्षीय दादी कोमा में चली गईं थीं. लेकिन उन्हें उम्मीद थी. जब भी उनके पास कोई जाता था तो वो उम्मीद से हाथ पकड़ लेती थीं. इसी उम्मीद ने उन्हें कोरोना से लड़ने की हिम्मत दी. आखिरकार दादी जीत गईं. कोरोना हार गया. 

Covid-19 Children Photography
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17 वर्षीय सार्थक गोयल की तस्वीर में साफ तौर पर दिख रहा है कि कैसे लॉकडाउन पीरियड में लोग रात में अपना काम या पढ़ाई करते थे. घर पर इस हालत में पढ़ाई या काम करने के लिए काफी ज्यादा मानसिक तैयारी करनी पड़ी थी. इस फोटो में सार्थक ने तीन चीजें कवर की हैं...पहला पढ़ाई करता बच्चा, दूसरा आराम करता हुआ और तीसरा अगले काम की तैयारी में उठकर बैठा हुआ. 
 

Covid-19 Children Photography
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18 वर्षीय शिखा चैटर्जी ने अपनी तस्वीर में बताया है कि कैसे लॉकडाउन में लोग घरों पर बोर हो रहे थे. चारों तरफ अंधेरे में घरों की खिड़कियों से झांकती रोशनी एक अच्छी सुबह की उम्मीद जगाती थी. ये बताती थीं कि कितनी भी अंधेरा हो लेकिन रोशनी की एक छोटी की किरण आपको जिंदा रहने और संघर्ष करने की ताकत देती हैं. 

Covid-19 Children Photography
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17 वर्षीय साहिल गुप्ता की इस फोटो में माचिस की तीलियों के जरिए उन्होंने यह बताने की कोशिश की है कि कैसे इंसान रोशनी और उम्मीद की तरफ आगे बढ़ता रहा. महामारी का अंधेरा उसके दिमाग पर ज्यादा देर तक असर नहीं कर पाएगा. अंधेरा खत्म होगा. इंसान सीढ़ी-दर-सीढ़ी ऊपर चढ़ेगा और कोरोना को हरा देगा. 

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16 वर्षीय रिया चावला की यह तस्वीर बताती है कि कैसे कोरोनाकाल में आसमान का रंग बदलता रहा. कभी साफ तो कभी बादल. अलग-अलग रूप देखने को मिले हमारे आसमान के. हम अलग-अलग नावों में जरूर थे लेकिन एक समुद्र में संघर्ष कर रहे थे. ऐसे ही उड़ान भरने की हिम्मत की वजह से कोरोना से लड़ पाए. 

Covid-19 Children Photography
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13 वर्षीय परीना जैन की इस फोटो में उन्होंने दिखाया है कि उनके घर के सामने का यह पेड़ उम्मीद देता था. भयानक तूफान, 40 डिग्री सेल्सियस का तापमान और खराब से खराब मौसम इस पेड़ को बढ़ने से रोक नहीं पाए. परीना कहती हैं कि जब भी उन्हें कोरोना काल में हिम्मत चाहिए होती थी, वो इस पेड़ को निहारती थीं. 

Covid-19 Children Photography
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17 वर्षीय नेहा जैन की इस फोटो में कोविड-19 के अंधेरे के पीछे निकलती रोशनी को दिखाया गया है. यहां सूरज रोशनी का स्रोत है, जबकि पत्तियों के नीचे का अंधेरा प्रतीकात्मक तौर पर कोरोना के डर को दिखाता है. लेकिन जैसे-जैसे सूरज ऊपर आता गया, कोरोना का अंधेरा खत्म होता गया. 

Covid-19 Children Photography
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17 वर्षीय अनुषा झाझरिया ने बताया कि जब वो स्कूल जाती थीं तब पियानो पर धूल जम गई. कोरोनाकाल में उन्होंने पियानो की प्रैक्टिस की. उसे सीखा. जब पूरी दुनिया कोरोना से डरी हुई थी तब उनका पियानो उन्हें इससे संघर्ष करने की हिम्मत दे रहा था. अब अनुषा रोज पियानो बजाती हैं.