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आटे की कीमतों में उछाल, क्या गेहूं का कम है स्टॉक? आया सरकार का बयान

गेहूं की खुदरा कीमतों में पिछले साल से लेकर अब तक 19 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. भारत ने चालू वित्त वर्ष में अब तक 45 लाख टन गेहूं का निर्यात किया है. इसमें से 21 लाख टन गेहूं का निर्यात प्रतिबंध लगाने से पहले हुआ था. सरकार ने 13 मई को गेहूं के निर्यात को प्रतिबंधित कर दिया था.

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गेहूं की कीमतों में उछाल.
गेहूं की कीमतों में उछाल.

देश में बढ़ती गेहूं की कीमतों (Wheat Price) पर काबू पाने के लिए सरकार ने मई के महीने में इसके निर्यात को प्रतिबंधित कर दिया था. अब सरकार गेहूं की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए जमाखोरी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है. खाद्य सचिव सुधांशु पांडे ने कहा कि भारत में गेहूं का पर्याप्त स्टॉक (Wheat Stock) है, लेकिन खुदरा कीमतों में उछाल सट्टा कारोबार के कारण है. उन्होंने जमाखोरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है. रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की 82वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि देश में गेहूं की कोई समस्या नहीं है.

कितनी बढ़ी गेहूं और आटे की कीमत?

गेहूं की खुदरा कीमतों में पिछले साल से लेकर अब तक 19 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. बीते साल गेहूं का रेट 26.01 रुपये प्रति किलोग्राम था, जो पांच रुपये बढ़कर बढ़कर 31.02 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है. इस अवधि में गेहूं के आटे की कीमतों में भी उछाल देखने को मिली है. आटे का रेट 18 फीसदी बढ़कर 36 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है. एक साल पहले गेंहू के आटे की कीमत 29 रुपये के करीब थी. खाद्य सचिव सुधांशु पांडेय ने कहा भारतीय खाद्य निगम (FCI) के गोदामों में 2.4 करोड़ टन गेहूं उपलब्ध है.

जमाखोरी को रोकने का विकल्प

गेहूं की बढ़ती कीमतों ने सरकार को न केवल इसके निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के लिए मजबूर किया है, बल्कि गेहूं के कुछ बाइ-प्रोडक्ट के आउटबाउंड शिपमेंट को भी प्रतिबंधित किया है. पांडे ने कहा कि केंद्र के पास गेहूं के स्टॉक की जमाखोरी को रोकने के लिए विकल्प हैं. इससे व्यापारियों को अपने पास रखे स्टॉक का खुलासा करना अनिवार्य हो जाएगा. इसके अलावा खुदरा विक्रेताओं और थोक विक्रेताओं दोनों पर स्टॉक रखने की सीमा भी लागू हो जाएगी.

सट्टा कारोबार के कारण बढ़ी कीमतें

उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय खाद्य निगम के पास 24 मिलियन टन गेहूं का भंडार उपलब्ध है. हालांकि, सचिव ने कहा कि सट्टा कारोबार के कारण कीमतों पर असर पड़ा है. सट्टेबाजों ने आगे कीमतों में बढ़ोतरी की उम्मीद में गेहूं की जमाखोरी की है. उन्होंने कहा कि व्यापारी और सट्टेबाज बाजार में कम मात्रा में गेहूं की सप्लाई कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो हम अनाज को बाजार में लाने के लिए कदम उठाएंगे.

भारत ने कितना किया निर्यात

पांडे ने आगे कहा कि 2021-22 फसल वर्ष (जुलाई-जून) के रबी सीजन में सरकार का गेहूं उत्पादन का अनुमान लगभग 105 मिलियन (10.5 करोड़ टन) टन है. वहीं, व्यापारियों को अनुमान है कि उत्पादन 9.5 करोड़ टन रहेगा. उन्होंने बताया कि भारत ने चालू वित्त वर्ष में अब तक 45 लाख टन गेहूं का निर्यात किया है. इसमें से 21 लाख टन गेहूं का निर्यात प्रतिबंध लगाने से पहले हुआ था. सरकार ने 13 मई को गेहूं के निर्यात को प्रतिबंधित कर दिया था. इस वित्तीय वर्ष के बाकी महीनों में निर्यात की कोई और गुंजाइश नहीं है. भारत ने पिछले साल 72 लाख टन गेहूं का निर्यात किया था.
 

 

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