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यूटिलिटी

एक ट्वीट पर बिटक्वाइन धड़ाम! राकेश झुनझुनवाला बोले- कभी नहीं करूंगा निवेश

बिटक्वाइन पर एलन मस्क का ट्वीट
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दुनियाभर में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. टेस्ला चीफ एलन मस्क (Elon Musk) ने इसी महीने की शुरुआत में खुलासा किया था कि उनकी कंपनी ने बिटक्वाइन में 1.5 अरब डॉलर का निवेश किया है, जिसके बाद बिटक्वाइन की कीमतों में तेज उछाल आया था. 
 

एक ट्वीट के बाद क्रिप्टोकरेंसी में तेज गिरावट
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लेकिन अब एलन मस्क के एक ट्वीट के बाद क्रिप्टोकरेंसी में तेज गिरावट देखी जा रही है. 58,300 डॉलर का रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद 2 दिन आई बिकवाली से बिटक्वाइन (Bitcoin) का भाव 18 फीसदी तक लुढ़क गया है. गिरावट की वजह से यह क्रिप्टोकरेंसी 50,000 डॉलर के नीचे फिसल गई. 

एलन मस्क का बिटक्वाइन पर ट्वीट
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दरअसल, शनिवार को एलन मस्क ने बिटक्वाइन की बढ़ती कीमतों पर चिंता जताते हुए ट्वीट किया था कि इसकी कीमत कुछ ज्यादा ही तेजी से बढ़ रही है. उनके इस ट्वीट के बाद न्यूयॉर्क में बिटक्वाइन की कीमत 8000 डॉलर यानी करीब 18 फीसदी की गिरावट के साथ 50,000 डॉलर के नीचे आ गई. हालांकि फिर इसमें थोड़ा सुधार देखने को मिला. 

टेस्ला के शेयरों में भारी गिरावट
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वहीं मस्क की कंपनी टेस्ला के शेयर 22 फरवरी को 8.6% गिर गए. जिससे उनकी कुल संपत्ति में 15.2 बिलियन डॉलर (1500 करोड़ डॉलर) कम हो गए. टेस्ला के शेयरों में गिरावट से एलन मस्क ब्लूमबर्ग बिलेनियर्स इंडेक्स में दूसरे नंबर पर पहुंच गए हैं. वहीं अमेजन के सीईओ जेफ बेजोस ने फिर नंबर 1 पर कब्जा कर लिया है. 
 

फरवरी में जोरदार उछाल
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फरवरी महीने में केवल बिटक्वाइन की कीमतों में 60 फीसदी तक उछाल दर्ज की गई. गिरावट से पहले इसकी कीमत 58 हजार डॉलर (करीब 42 लाख 71 हजार रुपये) पहुंच गई थी. जानकारों का कहना है कि सोने की कीमतों में आई गिरावट के पीछे क्रिप्टोकरेंसी भी एक वजह है, क्योंकि बड़े निवेशक बिटक्वाइन की तरफ रुख कर रहे हैं. 
 

राकेश झुनझुनवाला का क्रिप्टोकरेंसी पर बयान
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वहीं भारत के बड़े निवेशक राकेश झुनझुनवाला का कहना है कि वे कभी भी बिटक्वाइन में निवेश नहीं करेंगे. उन्होंने कहा, 'मैं 5 डॉलर का भी बिटक्वाइन नहीं खरीदूंगा. इस डिजिटल करेंसी को बैन कर देना चाहिए.' एक निजी चैनल से बातचीत में उन्होंने ये बातें कहीं. 

क्रिप्टोकरेंसी को लेकर भारत सरकार का नजरिया
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अगर भारत के संदर्भ में देखें तो वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने पिछले दिनों राज्यसभा में कहा था कि सरकार एक क्रिप्टोकरेंसी बिल को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है. इसे जल्द ही केंद्रीय मंत्रिमंडल को भेजा जाएगा. उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक, सेबी आदि जैसी नियामक संस्थाओं के पास क्रिप्टोकरेंसी को सीधे रेगुलेट करने के लिए कोई कानूनी ढांचा नहीं है, क्योंकि वे न तो मुद्राएं हैं और न ही संपत्ति और न ही प्रतिभूतियां.
 

क्या होती है क्रिप्टोकरेंसी
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क्या होती है क्रिप्टोकरेंसी
क्रिप्टो का मतलब ऐसी चीज जो रियल न हो. क्रिप्टोकरेंसी एक ऐसी मुद्रा है जो कंप्यूटर एल्गोरिद्म पर बनी होती है. यह सिर्फ इंटरनेट और कंप्यूटर पर उपलब्ध होती है. यह एक स्वतंत्र मुद्रा है, जिसका कोई मालिक नहीं होता. यह करेंसी किसी भी एक अथॉरिटी के काबू में भी नहीं होती. डिजिटल या क्रिप्टोकरेंसी इंटरनेट पर चलने वाली एक वर्चुअल करेंसी हैं. बिटक्वाइन के अलावा दुनिया में सैकड़ों अन्य क्रिप्टोकरेंसी भी मौजूद हैं जैसे- रेड कॉइन, सिया कॉइन, सिस्कॉइन, वॉइस कॉइन और मोनरो. 

बिटक्वाइन में एकतरफा रैली
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क्रिप्टोकरेंसी में रिटर्न यानी मुनाफा काफी अधिक होता है, ऑनलाइन खरीदारी से लेन-देन आसान होता है. क्रिप्टोकरेंसी के लिए कोई नियामक संस्था नहीं है, इसलिए नोटबंदी या करेंसी के अवमूल्यन जैसी स्थितियों का इस पर कोई असर नहीं पड़ता. साल 2009 में जब बिटक्वाइन को लॉन्च किया गया था तब उसकी वैल्यू 0 डॉलर थी. 2010 में भी इसकी वैल्यू 1 डॉलर तक नहीं पहुंची थी. 

कैसे होता है बिटक्वाइन से लेनदेन
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कैसे होता है बिटक्वाइन से लेनदेन
बिटक्वाइन (Bitcoin) के लेनदेन का एक लेजर बनाया जाता है. दुनिया में लाखों व्यापारी भी बिटक्वाइन से लेनदेन करते हैं. हालांकि किसी भी केंद्रीय बैंक ने अभी इसको मान्यता नहीं दी है. अमेरिका की कई दिग्गज कंपनियां भी बिटक्वाइन को स्वीकार करती हैं. इंटरनेट की दुनिया में इसकी खरीद-फरोख्त कराने वाले कई एक्सचेंज हैं. इंटरनेट की कई वेबसाइट और ऐप के माध्यम से इसकी खरीद-फरोख्त होती है. इसमें खरीद-फरोख्त करने वालों की जानकारी छुपी रहती है.