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अमेरिका में ट्रंप ने लिया एक फैसला, भारत में IT शेयर हो गए धड़ाम

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघीय एजेंसियों द्वारा एच-1बी वीजा धारकों को नौकरी देने से रोकने संबंधी सरकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं.

आईटी सेक्टर को झटका आईटी सेक्टर को झटका

  • भारत के आईटी सेक्टर के शेयर में गिरावट
  • एच-1बी वीजा पर ट्रंप के फैसले से झटका

सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में रौनक रही लेकिन आईटी सेक्टर के शेयर पूरी तरह से रेंगते नजर आए. कारोबार के अंत में बीएसई इंडेक्स पर इन्फोसिस, टीसीएस, टेक महिंद्रा जैसी टॉप आईटी कंपनियों के शेयर लाल निशान पर बंद हुए.

किस शेयर का क्या हाल?

कारोबार के अंत में टेक महिंद्रा का शेयर करीब 3 फीसदी तक लुढ़क गया. टेक महिंद्रा बीएसई इंडेक्स के टॉप लूजर में था. वहीं, इन्फोसिस और टीसीएस के शेयर भी लाल निशान पर बंद हुए.

क्या है वजह?

दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघीय एजेंसियों द्वारा एच-1बी वीजा धारकों को नौकरी देने से रोकने संबंधी सरकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. यह अमेरिका में नौकरी करने के इच्छुक भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए एक बड़ा झटका है.

इस मौके पर डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘‘मैं एक सरकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर रहा हूं. इससे संघीय सरकार द्वारा अमेरिकियों को नौकरी देने के सरल नियम का अनुपालन सुनिश्चित हो सकेगा.’’ ट्रंप ने कहा कि हमारा प्रशासन सस्ते विदेशी श्रम के बदले में मेहनती अमेरिकियों को नौकरी से बाहर करने की कार्रवाई को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा.

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अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘हम एच-1बी नियमन को अंतिम रूप दे रहे हैं जिससे अब किसी भी अमेरिकी कर्मचारी को बदला नहीं जाएगा. एच-1बी का इस्तेमाल अमेरिकियों के लिए रोजगार सृजन के लिए होगा. इसका इस्तेमाल शीर्ष ऊंचा वेतन पाने वाली प्रतिभाओं के लिए किया जाएगा.’’ इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा और अन्य प्रकार के विदेशी कार्य वीजा को 2020 के अंत तक स्थगित कर दिया था.

भारत में लोकप्रिय है एच-1बी वीजा

एच-1बी वीजा भारतीय आईटी पेशेवरों में काफी लोकप्रिय है. इसके जरिये अमेरिकी कंपनियां तकनीकी या अन्य विशेषज्ञता वाले पदों पर विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति कर सकती हैं. अमेरिका की आईटी क्षेत्र की कंपनियां हर साल इस वीजा के आधार पर चीन और भारत से हजारों पेशेवरों की नियुक्ति करती हैं.

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