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बुधवार को शेयर बाजार में नहीं हुआ कारोबार, जानिए क्‍या है वजह

2 अक्टूबर यानी आज महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के मौके पर भारतीय शेयर बाजार में कारोबार नहीं हुआ. इससे पहले मंगलवार को कारोबार के दौरान बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली.

गांधी जयंती के मौके पर बाजार बंद गांधी जयंती के मौके पर बाजार बंद

  • गांधी जयंती की वजह से बंद हैं भारतीय बाजार
  • इससे पहले मंगलवार को सेंसेक्‍स 361 अंक लुढ़क कर बंद हुआ
  • वहीं निफ्टी 114.55 अंक गिरकर 11,359.90 अंक पर हुआ बंद

गिरावट के दौर से गुजर रहे भारतीय शेयर बाजार में आज यानी 2 अक्‍टूबर को कारोबार नहीं हुआ. दरअसल, सप्‍ताह के तीसरे दिन गांधी जयंती की वजह से शेयर और कमोडिटी बाजार बंद हैं. अब कल यानी गुरुवार को बाजार में कारोबार होगा. इसके बाद 8 अक्‍टूबर यानी अगले मंगलवार को दशहरा की वजह से बाजार बंद रहेंगे.

मंगलवार को बाजार का हाल

बता दें कि शेयर बाजार मंगलवार को लगातार तीसरे दिन गिरकर बंद हुए. शुरुआती कारोबार में बीएसई का 30 कंपनियों वाला शेयर सूचकांक सेंसेक्स स्थिर रुख के साथ चल रहा था लेकिन बिकवाली का दबाव बढ़ने से दोपहर के कारोबार में इसमें सेंसेक्स एक समय 737 अंक से अधिक टूट गया था. अंत में सेंसेक्स 361.92 अंक यानी 0.94 फीसदी घटकर 38,305.41 अंक पर रहा. इस वजह से निवेशकों के 1.80 लाख करोड़ रुपये डूब गए. इसी तरह निफ्टी 114.55 अंक यानी एक फीसदी गिरकर 11,359.90 अंक पर बंद हुआ. पिछले तीन सत्र के कारोबार में सेंसेक्स 684.33 अंक यानी 1.76 फीसदी और निफ्टी 211 अंक यानी 1.83 फीसदी नुकसान में रहा है.

स्‍मॉल कैप में शामिल हुआ यस बैंक

मंगलवार के कारोबार में एक बार फिर यस बैंक के शेयर ध्‍वस्‍त नजर आए. कारोबार के अंत में बैंक का प्रति शेयर भाव 32 रुपये पर था. यहां बता दें कि सिर्फ एक साल में बैंक का शेयर भाव 400 रुपये के स्‍तर से लुढ़क कर 30 रुपये के स्‍तर पर आ गया है. वहीं मार्केट कैपिटलाइजेशन में भी 70 हजार करोड़ से अधिक की कमी आई है. वर्तमान में यस बैंक का मार्केट कैप 8 हजार करोड़ के स्‍तर पर आ गया है. इसके साथ ही यस बैंक स्‍मॉल कैप वाले शेयर में शामिल हो गया है.

क्‍या है बाजार में सुस्‍ती की वजह?

विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ओपरेटिव बैंक (पीएमसी) के गहराते संकट और इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस (आईएचएफएल) जैसी कंपनियों पर धोखाधड़ी के आरोपों के बीच निवेशकों का रुख सावधानी भरा है. इसके अलावा कोर सेक्‍टर में गिरावट और करों में भारी कटौती के बावजूद सरकार के राजकोषीय घाटा लक्ष्य को 3.3 फीसदी पर बनाए रखने की योजना से भी बाजार में ज्यादा खर्च को लेकर चिंता देखी गई.

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