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चीन से आयात पर और सख्ती की मोदी सरकार कर रही तैयारी, 20 सेक्टर के उत्पादों पर असर

कई और उत्पादों के आयात पर अंकुश लगाने की तैयारी चल रही है. इनमें एयरकंडीशनर, खिलौने, कपड़े आदि शामिल हो सकते हैं. इससे चीनी कारोबारियों को काफी नुकसान हो सकता है. सरकार ऐसे उत्पादों के आयात के लिए लाइसेंस जैसी अनिवार्यता लगा देगी.

चीनी आयात को लगेगा झटका चीनी आयात को लगेगा झटका

  • चीन से आयात पर होगी और सख्ती
  • करीब 20 सेक्टर के आयात पर अंकुश लगेगा

सीमा पर तनाव के बाद से ही सरकार चीन से आयात पर लगातार चोट कर रही है. अब आगे कई और उत्पादों के आयात पर अंकुश लगाने की तैयारी चल रही है. इनमें एयरकंडीशनर, खिलौने, कपड़े आदि शामिल हो सकते हैं. इससे चीनी कारोबारियों को काफी नुकसान हो सकता है.

सरकार ऐसे उत्पादों के आयात के लिए लाइसेंस जैसी अनिवार्यता लगा देगी. सरकार चाहती है कि इन उत्पादों का स्वदेशी स्तर पर ही उत्पादन आगे बढ़े और इनके मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जाए. गौरतलब है कि सरकार इसके पहले कलर टीवी से लेकर, टायर, सोलर पैनल जैसे बहुत से उत्पादों के चीन से आयात पर अंकुश के लिए कई तरह के कदम उठा चुकी है.

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अब ऐसे 20 सेक्टर के उत्पादों की सूची तैयार की जा रही है जिनमें मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देकर चीन से आयात को कम किया जा सकता है और उनमें निवेश को आकर्षित किया जा सकता है.

इन वस्तुओं के आयात पर हो सकता है अंकुश

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, इनमें फर्नीचर, लेदर, फुटवियर, एग्रोकेमिकल, एयर कंडीशनर, सीसीटीवी, स्पोर्ट्स गुड्स, खिलौने, रेडी टु ईट फूड, स्टील, एल्युमिनियम, इलेक्ट्रिक व्हीकल, ऑटो कम्पोनेंट, टीवी सेटटॉप बॉक्स, एथेनॉल, कॉपर, टेक्सटाइल्स, बायोफ्यूल आदि शामिल हो सकते हैं.

इसके अलावा सरकार आयात कर की अधिकतम सीमा को भी बढ़ाने की तैयारी कर रही है. फार्मास्यूटिकल्स विभाग ने तो एक्टिव फार्मा इन​ग्रेडिटएंट (APIs) पर कस्टम ड्यूटी को बढ़ाकर 10 से 15 फीसदी करने की तैयारी कर ली है.

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क्यों होगी लाइसेंस की व्यवस्था

हालांकि कई वस्तुओं पर आयात कर बढ़ाने का भी बहुत असर नहीं होने वाला इसलिए सरकार सरकार ने लाइसेंस की व्यवस्था अपनाने का निर्णय लिया है. सरकारी अधिकारियों का कहना है कि अभी मुक्त व्यापार समझौते का दुरुपयोग कर सस्ते माल से भारतीय बाजार को पाट दिया जाता है, इसे रोकने के लिए लाइसेंस की व्यवस्था कारगर हो सकती है.

इंडस्ट्री की भी यह मांग है कि आयात शुल्क बढ़ाने की जगह लाइसेंस वाली व्यवस्था अपनाई जाए. टायर और कलर टीवी के आयात के लिए ऐडहॉक लाइसेंस जारी करने की मांग की जा रही है, क्योंकि कारोबारियों के करोड़ों रुपये फंसे हुए हैं.

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