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कबाड़ बेचकर रेलवे ने बनाए पैसे, 10 साल में की 35 हजार करोड़ की कमाई

बीते 10 साल में भारतीय रेलवे ने स्क्रैप यानी कबाड़ बेचकर अपने खजाने में 35 हजार करोड़ से अधिक की धनराशि जोड़ी है. रेलवे ने यह जानकारी एक आरटीआई आवेदन के जवाब में दी है.

आरटीआई में हुआ खुलासा आरटीआई में हुआ खुलासा

  • कबाड़ से सबसे कम आमदनी वर्ष 2016-17 में हुई
  • रेल पटरियों का कबाड़ बेचने से 11,938 करोड़ की आमदनी 

भारतीय रेलवे ने स्क्रैप यानी कबाड़ बेचकर अपने खजाने में एक बड़ी धनराशि जोड़ी है. रेलवे की तरफ से एक आरटीआई आवेदन के जवाब में जारी ब्यौरे के मुताबिक विभाग ने बीते 10 सालों में कबाड़ से 35,073 करोड़ रुपये की आमदनी की है. इसमें कोच, वैगन्स और पटरी के कबाड़ शामिल हैं.

मध्य प्रदेश के सामाजिक कार्यकर्ता जिनेंद्र सुराना को सूचना के अधिकार के तहत रेलवे बोर्ड द्वारा दिए गए ब्यौरे में बताया गया है कि बीते 10 सालों में सबसे ज्यादा कबाड़ वर्ष 2011-12 में बेचा गया. इस कबाड़ से रेलवे को 4,409 करोड़ रुपये की आमदनी हुई. वहीं वर्ष 2016-17 में सबसे कम कबाड़ से आमदनी 2,718 करोड़ रुपये हुई.

रेल पटरियों का कबाड़ सबसे ज्‍यादा

रेलवे बोर्ड की तरफ से दी गई जानकारी में बताया गया है कि बेचे गए कबाड़ में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रेल पटरियों की है. साल 2009-10 से 2013-14 के बीच 6,885 करोड़ रुपये की रेल पटरियां बेची गईं. वहीं साल 2015-16 से 2018-19 की अवधि के बीच 5,053 करोड़ रुपये की कबाड़ हो चुके रेलवे पटरी बेच दिए गए. कुल मिलाकर 10 सालों में रेल पटरियों का कबाड़ बेचने से 11,938 करोड़ रुपये की आमदनी हुई.

जिनेंद्र सुराना ने बताया,  " इन आंकड़ों से एक बात तो साफ है कि साल 2009-10 से 2013-14 के बीच पांच साल की अवधि की तुलना में वर्ष 2014-15 से 2018-19 के बीच रेल पटरी का कबाड़ कम निकला है. इससे ऐसा लगता है कि अंतिम पांच साल की अवधि में रेल पटरियों में कम बदलाव हुआ है. अगर रेल पटरी का अमान परिवर्तन होता है तो उसी अनुपात में पुरानी पटरी के कबाड़ निकलते हैं."

इससे पहले हाल ही में आरटीआई कानून से जानकारी मिली है कि रेलवे ने साल 2016 से 2019 के बीच तत्काल टिकट बेचकर 21,530 करोड़ रुपये और तत्काल प्रीमियम टिकट के जरिए अतिरिक्त 3,862 करोड़ रुपये कमाए हैं. इससे राजस्व में इस अवधि के दौरान 62 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

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