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AGR विवाद: वोडा-आइडिया ने फिर मांगा समय, कुछ दिनों में बकाया देने को तैयार

टेलीकॉम कंपनियों को 1.47 लाख करोड़ से अधिक का एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू यानी AGR बकाया चुकाना है. इसकी डेडलाइन पहले ही खत्‍म हो चुकी है.

टेलीकॉम कंपनियों पर 1 लाख करोड़ से अधिक का बकाया टेलीकॉम कंपनियों पर 1 लाख करोड़ से अधिक का बकाया

  • टेलीकॉम कंपनियों को करीब 1.47 लाख करोड़ का AGR बकाया चुकाना है
  • बकाया चुकाने की डेडलाइन शुक्रवार को रात 12 बजे ही खत्‍म हो चुकी है

डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकम्युनिकेशन्स (DoT) की ओर से एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) बकाया चुकाने की डेडलाइन खत्‍म होने के बाद वोडाफोन- आइडिया का बयान आया है. टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन-आइडिया ने सरकार को एजीआर बकाया चुकाने का प्रस्ताव दिया है. वोडाफोन की ओर से जारी बयान के मुताबिक कंपनी फिलहाल मूल्यांकन कर रही है कि वह अगले कुछ दिनों में कितना बकाया चुका सकती है.

यहां बता दें कि वोडाफोन-आइडिया को सरकार का 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक चुकाना है. इसे चुकाने की डेडलाइन भी शुक्रवार (14 फरवरी) को रात 12 बजे खत्‍म हो चुकी है. वोडाफोन-आइडिया के अलावा एयरटेल समेत अन्‍य टेलीकॉम कंपनियों को भी रकम की अदायगी करनी है.

एयरटेल 10 हजार करोड़ देने को तैयार

इससे पहले भारती एयरटेल ने शुक्रवार को 10,000 करोड़ रुपये का बकाया 20 फरवरी तक देने की पेशकश की थी. एयरटेल ने टेलीकॉम डिपार्टमेंट को भेजे पत्र में कहा, “माननीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले और उनके निर्देश के अनुपालन में हम 20 फरवरी 2020 तक भारती समूह की कंपनियों की ओर से 10,000 करोड़ रुपये (खाते में) जमा कर देंगे.” एयरटेल पर सरकार का करीब 35,586 करोड़ रुपये बकाया है.

घाटे में चल रही वोडा-आइडिया

चालू वित्त वर्ष की दिसंबर तिमाही में वोडाफोन-आइडिया को 6,438.8 करोड़ रुपये का घाटा हुआ. इस तिमाही के दौरान कंपनी की कुल आय साल भर पहले के 11,982.8 करोड़ रुपये से पांच प्रतिशत कम होकर 11,380.5 करोड़ रुपये पर आ गई है. इससे पहले वोडाफोन-आइडिया को सितंबर तिमाही में 50,922 करोड़ रुपये का भारी-भरकम घाटा हुआ था. इस तिमाही में वोडाफोन-आइडिया ने एजीआर बकाया देने के लिए प्रावधान किया था. इन हालातों में वोडाफोन-आइडिया का शेयर भाव और मार्केट कैपिटल भी अपने ऑल टाइम लो लेवल पर है.

क्या है AGR का विवाद?

दरअसल, सरकार टेलीकॉम कंपनियों से एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) मांग रही है. एजीआर, संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा टेलीकॉम कंपनियों से लिया जाने वाला यूजेज और लाइसेंसिग फीस है.सरकार की इस मांग के खिलाफ टेलीकॉम कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

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वहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी टेलीकॉम कंपनियों को झटका देते हुए सरकार की मांग को जायज ठहराया और 23 जनवरी 2020 तक इसे चुकाने का आदेश दिया था. इसके बाद टेलीकॉम कंपनियां एक बार फिर कोर्ट गईं लेकिन इस बार सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना का दोषी पाते हुए फटकार भी लगाई. कोर्ट की सख्‍ती के बाद शुक्रवार को डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकम्युनिकेशन्स (DoT) ने टेलीकॉम कंपनियों को रात 12 बजे से पहले बकाया चुकाने का आदेश दिया था.

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