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Explainer: संकट बड़ा, जेट एयरवेज और किंगफिशर के बाद अब स्पाइसजेट के लिए खतरे की घंटी?

कभी भारतीय एयरलाइन सेक्टर में तेज सफलता का पर्याय रही विमानन कंपनी स्पाइसजेट पिछले कुछ महीनों से एक के बाद एक नए संकटों का सामना कर रही है. कंपनी को तिमाही दर तिमाही घाटा उठाना पड़ रहा है. आइए जानते हैं कि स्पाइसजेट के सामने किस तरह की चुनौतियां हैं और इस विमानन कंपनी का भविष्य कैसा होने वाला है.

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संकटों से घिरी हुई है स्पाइसजेट
संकटों से घिरी हुई है स्पाइसजेट

Spicejet Crisis Explained: एयरलाइन सेक्टर (Airline Sector) को बिजनेस के लिहाज से काफी मुश्किल और चुनौतीपूर्ण माना जाता रहा है. ऑपरेशन की काफी ज्यादा लागत, बड़ी पूंजी की जरूरत समेत कई चुनौतियां इस बिजनेस को जोखिम वाला बना देती हैं. यही कारण है कि एयरलाइन सेक्टर का इतिहास असफलता की कहानियों से भरा हुआ है. पिछले कुछ सालों के दौरान किंगफिशर (Kingfisher) और जेट एयरवेज (Jet Airways) को जमींदोज होते हुए सभी देख चुके हैं. अब इस कड़ी में एक नया नाम स्पाइसजेट (Spicejet) का जुड़ने का खतरा सिर पर मंडरा रहा है. कभी भारतीय एयरलाइन सेक्टर (Indian Airline Sector) में तेज सफलता का पर्याय रही विमानन कंपनी स्पाइसजेट पिछले कुछ महीनों से एक के बाद एक नए संकटों का सामना कर रही है. आइए आज विस्तार से जानते हैं कि स्पाइसजेट के सामने किस तरह की चुनौतियां हैं और इस विमानन कंपनी का भविष्य कैसा होने वाला है...

बिना वेतन छुट्टी पर भेजे जा रहे पायलट

स्पाइसजेट के संकट में ताजा अध्याय जुड़ा है पायलटों के साथ. कंपनी करीब 80 पायलटों को बिना वेतन के छुट्टी पर भेजने वाली है. इनमें से करीब 40 पायलट बोइंग 737 (Boeing 737) बेड़े के हैं, जबकि बाकी के करीब 40 पायलट क्यू400 (Q400) बेड़े के हैं. हालांकि कंपनी का इस बारे में कहना है कि उसके पास पायलट जरूरत से ज्यादा हो गए हैं, इस कारण वह इन्हें छुट्टी पर भेज रही है, लेकिन इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि स्पाइसजेट का यह कदम उसके वित्तीय संकट से जुड़ा हुआ है.

कंपनी को रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में भी वित्तीय दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. हाल के दिनों में स्पाइसजेट को कई उड़ानें रद्द करने पर भी मजबूर होना पड़ा है. जिन पायलटों को स्पाइसजेट ने बिना वेतन के तीन महीने की छुट्टी पर जाने को कहा है, उनमें से ज्यादातर घरेलू उड़ानों के हैं.

उड़ानों से बाहर हैं आधे से ज्यादा विमान

कंपनी की मानें तो छुट्टी पर भेजे गए पायलटों को धीरे-धीरे नए विमानों पर बहाल किया जाएगा. कंपनी की योजना अपने बेड़े में सात नए बोइंग 737 मैक्स विमान शामिल करने की है. ये विमान कंपनी के बेड़े में दिसंबर से शामिल होने लगेंगे. कंपनी के पास साल 2021 की शुरुआत में 95 एयरक्राफ्ट थे, जो अभी कम होकर 50 रह गए हैं. कंपनी को कल-पुर्जों की कमी और रखरखाव के कारण कई विमानों को खड़ा करना पड़ा है. कंपनी के करीब 10 क्यू400 विमान कल-पुर्जों की कमी के चलते उड़ान नहीं भर पा रहे हैं. वहीं जेट एयरवेज के बेड़े से शामिल किए गए पुराने 737 विमानों को स्पाइसजेट वापस लौटा रही है.

खराब है स्पाइसजेट की वित्तीय स्थिति

एयरलाइन इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि स्पाइसजेट के सामने गंभीर फाइनेंशियल चुनौतियां हैं. कंपनी ने अभी तक किसी तरह से मुश्किलों का सामना किया है, लेकिन अब उसे संकट से बाहर निकलने के लिए पूंजी की सख्त जरूरत है. स्पाइसजेट की चुनौतियां हाल के महीने में गंभीर भले हुई है, लेकिन कंपनी पिछले तीन सालों से दिक्कतों में हैं. सबसे पहले दो भयावह दुर्घटनाओं के बाद कंपनी को मार्च 2019 में बोइंग 737 मैक्स विमानों को परिचालन से हटाना पड़ा था. ये विमान ईंधन की खपत मामले में किफायती थे, ऐसे में इनके बाहर होने से स्पाइसजेट की लागत बढ़ गई.

एक के बाद एक लगते रहे हैं झटके

स्पाइसजेट इस संकट से उबरने का प्रयास ही कर रही थी कि साल 2020 की शुरुआत में कोविड महामारी आ गई, जो विमानन सेक्टर के लिए बुरे दिन लेकर आई. इसके चलते कुछ समय के लिए सभी एयरलाइन कंपनियों का परिचालन पूरी तरह से ठप हो गया. अन्य विमानन कंपनियों की तरह स्पाइसजेट ने भी महामारी का सामना जैसे-तैसे किया. इसके बाद जब विमानन सेक्टर महामारी के असर से उबरने का प्रयास कर रहा था, स्पाइसजेट के सामने नियामकीय पाबंदियों की चुनौतियां आ गईं. तकनीकी खामियों के चलते लगी उक्त पाबंदी के कारण कंपनी को अपने बेड़े के करीब आधे विमानों को परिचालन से बाहर करना पड़ गया था. स्पाइसजेट की स्थिति ऐसी हो गई कि वह पट्टे लिए गए विमानों की किस्तें चुकाने में डिफॉल्ट करने लग गई. इस कारण पिछले साल अगस्त में कंपनी को 6 एयरक्राफ्ट डिजरिस्टर करने पर मजबूर होना पड़ा.

कर्मचारियों को मिल रहे प्री-कोविड से कम पैसे

स्पाइसजेट की मुश्किलें इतने पर ही समाप्त नहीं हुईं. कंपनी के सर्वर पर मई में एक रैंसमवेयर अटैक हुआ, जिसके बाद कंपनी को मार्च और जून तिमाही का परिणाम टालना पड़ गया. कंपनी ने महीनों की देरी के बाद 31 अगस्त को फाइनेंशियल रिजल्ट तो इश्यू किया, लेकिन उसे सालाना आम बैठक के लिए अतिरिक्त समय मांगने पर मजबूर होना पड़ा. कंपनी को कर्मचारियों के मोर्चे पर भी समस्याएं हुईं. वित्तीय संकटों के कारण स्पाइसजेट अपने कर्मचारियों की सैलरी नहीं बढ़ा पा रही थी. इसके चलते स्पाइसजेट के कर्मचारी कोविड महामारी से पहले की सैलरी से कम पैसे पर काम कर रहे थे. इस कारण उनमें नाराजगी थी.

लगातार हो रहा है भारी-भरकम घाटा

स्पाइसजेट के परिचालन पर भी गौर करें तो समस्याओं का असर साफ दिख जाता है. घरेलू विमानन बाजार में एक समय स्पाइसजेट की हिस्सेदारी 10 फीसदी से ज्यादा थी, जो कम होकर 8 फीसदी से नीचे आ गई है. कंपनी एक समय भारतीय बाजार में दूसरे नंबर पर काबिज पर थी, लेकिन महज छह महीने में यह फिसलकर पांचवें स्थान पर चली गई. कंपनी को मार्च 2022 तिमाही में 458 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था, जो जून 2022 तिमाही में और बढ़कर 789 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. फाइनेंशियल ईयर 2021-22 के दौरान कंपनी को 1,725 करोड़ रुपये का भारी-भरकम घाटा हुआ था, जो ठीक एक साल पहले की तुलना में 73 फीसदी ज्यादा था. ये आंकड़े इस कारण गंभीर हो जाते हैं कि भले ही एयर ट्रैफिक बढ़ने लगा हो, स्पाइसजेट इसका फायदा उठा पाने की स्थिति में नहीं है.

इन कारणों से धुंधला है कंपनी का भविष्य

एयरलाइन इंडस्ट्री के कुछ ताजा घटनाक्रम भी स्पाइसजेट के लिए मुश्किलों भरे रहे हैं. टाटा समूह ने सरकारी विमानन कंपनी एअर इंडिया को सबसे बड़ी बोली लगाकर अपने नाम कर लिया है. इसके बाद एअर इंडिया का परिचालन सुधरने लगा है. टाटा समूह आक्रामक तरीके से एअर इंडिया की हिस्सेदारी बढ़ाने पर काम कर रही है. दूसरी ओर एक नई विमानन कंपनी आकासा एयर का भी परिचालन शुरू हो चुका है. इस कंपनी में दिग्गज दिवंगत इन्वेस्टा राकेश झुनझुनवाला का पैसा लगा है. मतलब साफ है कि एअर इंडिया और अकासा एयर दोनों के पास फाइनेंस की कोई दिक्कत नहीं है, जबकि स्पाइसजेट की स्थिति एक दम उलट है.

स्पाइसजेट के पक्ष में सिर्फ एक बात है और वह है प्रमोटर अजय सिंह की छवि. अजय सिंह को डूबता बिजनेस उबारने में महारत हासिल है. वह पहले भी स्पाइसजेट की किस्मत को बदल चुके हैं. अब देखना है कि इस बार अजय सिंह स्पाइसजेट को बचा पाते हैं या नहीं...

 

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