scorecardresearch
 

Small Saving Schemes: फिर नहीं बढ़ीं PPF, NSC, सुकन्या समृद्धि योजना की ब्याज दरें

छोटी बचत योजनाओं पर कितना ब्याज मिलेगा, इसके लिए गोपीनाथ समिति ने सरकारी बॉन्ड से जुड़ा एक फॉर्मूला दिया था. अगर इस फॉर्मूले पर अमल किया जाता तो इन योजनाओं के इन्वेस्टर्स को तुरंत बड़ा फायदा मिलता. हालांकि सरकार ने इस बार भी ऐसा नहीं किया.

X
बढ़ सकती हैं ब्याज की दरें बढ़ सकती हैं ब्याज की दरें
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 12 महीने में तेजी से बढ़ा सरकारी बॉन्ड का यील्ड
  • गोपीनाथ समिति के फॉर्मूले से तय होता है ब्याज

शेयर बाजारों (Share Market) में लगातार गिरावट आ रही है और क्रिप्टो (Crypto Currencies) के इन्वेस्टर्स का तो हाल बेहाल है. ऐसे में इन्वेस्टर्स पैसे कमाने के अलग साधनों की तलाश कर रहे हैं. ऐसे इन्वेस्टर्स छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद लगाए बैठे थे, क्योंकि पिछले एक साल में सरकारी बॉन्ड (Govt Bond) पर रिटर्न में तेजी आई है. बॉन्ड यील्ड (Bond Yield) के बढ़ने से पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (Public Privident Fund), नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (National Saving Certificate) और सुकन्या समृद्धि योजना (Sukanya Samriddhi Yojana) जैसी छोटी बचत योजनाओं (Small Saving Schemes) पर मिलने वाले ब्याज को भी बढ़ाये जाने की उम्मीद थी. हालांकि सरकार ने 2022-23 की दूसरी तिमाही के लिए भी इन योजनाओं की ब्याज दरों को स्थिर रखने का निर्णय लिया है.

सरकार ने किया ये ऐलान

सरकार ने गुरुवार को बताया कि NSC, PPF समेत अन्य छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों को स्थिर रखा गया है. इन छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में 2020-21 की पहली तिमाही के बाद से कोई बदलाव नहीं किया गया है. वित्त मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन में कहा, 'एक जुलाई 2022 से शुरू हो रही और 30 सितंबर 2022 को समाप्त हो रही दूसरी तिमाही के लिए छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों को पुराने स्तर पर ही बरकरार रखा गया है. ये दरें पहली तिमाही के लिए किए गए ऐलान के स्तर पर ही रहेंगी.'

ये है ब्याज का फॉर्मूला

इससे पहले लोग कयास लगा रहे थे कि छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरें बढ़ सकती हैं. दरअसल छोटी बचत योजनाओं के ब्याज को लेकर गोपीनाथ समिति ने साल 2011 में फॉर्मूला सुझाया था. फॉर्मूले में कहा गया था कि सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़ने पर छोटी बचत योजनाओं का ब्याज भी बढ़ाया जाना चाहिए. समिति ने किसी भी अवधि में सरकारी प्रतिभूतियों (Govt Securities) की औसत यील्ड की तुलना में इन बचत योजनाओं का ब्याज 0.25 से 01 फीसदी तक ज्यादा रखने की सिफारिश की थी.

इतना बढ़ सकता है ब्याज

पिछले एक साल में बेंचमार्क 10-ईयर बॉन्ड की यील्ड 6.04 फीसदी से बढ़कर 7.46 फीसदी हो गई है. अप्रैल-जून तिमाही में इसका औसत 7.31 फीसदी रहा है. अगर गोपीनाथ समिति की सिफारिशों के हिसाब से ब्याज दरें तय होतीं, तो पीपीएफ पर मिल रहे ब्याज (Interest on PPF) को बढ़ाकर 7.81 फीसदी किया जाता. हालांकि अब भी पीपीएफ (PPF) पर 7.10 फीसदी की दर से ही ब्याज मिलेगा. इसी तरह सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) और सिनीयर सिटीजन्स सेविंग स्कीम की ब्याज दरें बढ़कर 08 फीसदी के पार निकलने के अनुमान थे. सुकन्या समृद्धि योजना के मामले में ब्याज दर मौजूदा 7.60 फीसदी से बढ़कर 8.06 फीसदी और सिनीयर सिटीजन्स सेविंग स्कीम के मामले में यह दर 7.40 फीसदी से बढ़कर 8.31 फीसदी हो सकती थीं.

इन लोगों को भी हो जाता लाभ

अगर स्मॉल सेविंग स्कीम्स की दरें बढ़ाई जातीं, तो इससे रिजर्व बैंक के फ्लोटिंग रेट बॉन्ड (RBI Floating Rate Bond) के इन्वेस्टर्स को भी फायदा होता. इस तरह के बॉन्ड की दरें नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC) की ब्याज दर से जुड़ी होती हैं. ये बॉन्ड नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट की तुलना में 0.35 फीसदी ज्यादा रेट देते हैं. अभी एनएससी पर 6.8 फीसदी ब्याज मिल रहा है और इस कारण आरबीआई के फ्लोटिंग बॉन्ड के रेट 7.15 फीसदी है. फॉर्मूले पर अमल करने के बाद एनएससी की दरें 7.15 फीसदी होने के अनुमान थे. हालांकि सरकार के ऐलान के बाद अब ये सारे कयास थम चुके हैं.

 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें