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Petrol-Diesel rate: चुनाव खत्म होते ही बढ़ गए पेट्रोल-डीजल के दाम, जानें प्रमुख शहरों के रेट

मंगलवार को दिल्ली में पेट्रोल जहां 15 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ तो डीजल में भी 18 पैसे प्रति लीटर की बढ़त हुई. पिछले दो महीने के दौरान कई बार कच्चा तेल महंगा होने के बाद भी पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई.

बढ़ गए पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ गए पेट्रोल-डीजल के दाम
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पेट्रोल-डीजल के दाम में बढ़त
  • करीब दो महीने बाद हुई यह बढ़त

​पिछले दो महीने में देश के कई राज्यों में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया चल रही थी. इस दौरान करीब दो महीने तक पेट्रोल-डीजल के दाम में जनता को राहत मिलती रही. लेकिन अब चुनाव खत्म होते ही तेल कंपनियों ने फिर से दाम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं. मंगलवार को दिल्ली में पेट्रोल जहां 15 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ तो डीजल में भी 18 पैसे प्रति लीटर की बढ़त हुई. 

गौरतलब है कि पांच राज्यों में विधानसभा और उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के नतीजे आ चुके हैं. सरकारी तेल कंपनियों ने आज पेट्रोल और डीजल के दाम में बढ़ोतरी कर दी. 

ये हैं प्रमुख शहरों के रेट 

इस बढ़त के साथ ही दिल्ली में पेट्रोल 90.55 रुपये लीटर और डीजल 80.91 रुपये लीटर, मुंबई में पेट्रोल 96.95 रुपये और डीजल 87.98 रुपये लीटर, चेन्नई में पेट्रोल 92.55 रुपये और डीजल 85.90 रुपये लीटर तथा कोलकाता में पेट्रोल 90.76 रुपये और डीजल 83.78 रुपये लीटर हो गया है. 

करीब दो महीने से नहीं बढ़े थे दाम

इससे पहले, बीते 27 फरवरी को पेट्रोल 24 पैसे तो डीजल 17 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ था. पिछले दो महीने के दौरान कई बार कच्चा तेल महंगा होने के बाद भी पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई. हालांकि, इस बीच कच्चा तेल सस्ता होने के बाद चार किस्तों में पेट्रोल-डीजल के दाम घटे हैं. इससे पेट्रोल 77 पैसे प्रति लीटर सस्ता हुआ था. इस दौरान डीजल 74 पैसे प्रति लीटर सस्ता हो चुका है. 

जीएसटी में शामिल करने की मांग 

पेट्रोल, डीजल के दाम आसमान छूने लगे तो इस बात के लिए मांग बढ़ने लगी थी कि इन्हें जीएसटी में शामिल किया जाए ताकि इनके दाम में भारी कटौती हो सके. एक अनुमान के अनुसार, पेट्रोल के दाम जीएसटी में आए तो यह अचानक 75 रुपये लीटर तक आ सकता है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कह चुकी हैं कि वह इसके लिए तैयार हैं कि जीएसटी काउंसिल में चर्चा हो. लेकिन अभी यह इतना आसान नहीं लगता और इस पर अंतिम निर्णय जीएसटी काउंसिल को ही लेना है.

 

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