scorecardresearch
 

Parle-G ने लिया बड़ा फैसला, अब बिस्किट की कीमतों में होगी इतनी कटौती!

इंडस्ट्री के सीनियर अधिकारियों के अनुसार, जैसे-जैसे कृषि-वस्तुओं की कीमतें नरम हो रही हैं, बिस्किट जैसे दैनिक उपभोग वाले पैकज्ड खाद्य पदार्थ के फिर से सस्ते होने की उम्मीद है. पिछले डेढ़ साल में कंपनियों के पास कीमतों में बढ़ोतरी के अलावा कोई विकल्प नहीं था.

X
कम हो सकती हैं पारले-जी बिस्किट की कीमतें
कम हो सकती हैं पारले-जी बिस्किट की कीमतें

करोड़ों भारतीयों का पसंदीदा बिस्किट पारले-जी (Parle-G) अब सस्ता होने वाला है. कीमतों में कटौती करने के साथ ही कंपनी आने वाले दिनों में बिस्किट के पैकेट के वजन में इजाफा भी कर सकती है. अगर कंपनी ऐसा करती है, तो बढ़ती महंगाई के दौर में लोगों को जरूर थोड़ी राहत मिलेगी. इंडस्ट्री के सीनियर अधिकारियों के अनुसार, जैसे-जैसे कृषि-वस्तुओं की कीमतें नरम हो रही हैं, बिस्किट जैसे दैनिक उपभोग वाले पैकज्ड खाद्य पदार्थ के फिर से सस्ते होने की उम्मीद है.

पारले प्रोडक्ट्स के रेट कम हो सकते हैं

बिस्किट बनाने वाली बड़ी कंपनी पारले प्रोडक्ट्स (Parle Products) के सीनियर कैटेगरी हेड मयंक शाह के मुताबिक, पिछले दो वर्षो में बार-बार कीमतों में बढ़ोतरी हुई. इसके बाद रोजमर्रा की इस्तेमाल होने वाली पैकज्ड वस्तुओं की कीमतों में कटौती का दौर शुरू हो सकता है. पारले प्रोडक्ट्स पारले-जी, क्रैकजैक, मोनाको, हाईड एंड सीक, मेलोडी और मैंगो बाइट जैसे प्रोडक्ट का उत्पादन और मार्केटिंग करता है.

कितनी कम होंगी कीमतें

मयंक शाह ने बिजनेस टुडे को एक विशेष बातचीत में बताया- 'यदि मौजूदा ट्रेंड जारी रहते हैं और वस्तुओं की कीमतों में गिरावट जारी रही, तो आने वाले दिनों में बिस्किट की कीमतों में 10 से 20 फीसदी की कौटती हो सकती है. अगर कीमतें कम नहीं होती है, तो बिस्किट के पैकट के साइज को बढ़ाया जा सकता है'. 

क्यों कम होने वाली हैं कीमतें

उन्होंने कहा कि  कृषि-वस्तुओं की कीमतों में गिरावट जारी रही, तो पारले प्रोडक्ट जल्द ही अपने पैक की कीमतों में कौटती की शुरुआत कर देगा या फिर पैक का वजन बढ़ाएगा. शाह ने कीमतों में कौटती के पीछे तर्क देते हुए कहा कि इस साल की शुरुआत में अब तक के उच्चतम स्तर को छूने के बाद प्रमुख कृषि जिंसों की कीमतें अब नीचे आ रही हैं. गेहूं की कीमतों में गिरावट आ रही है. इसके अतिरिक्त, पाम तेल की कीमतों में गिरावट शुरू हो गई है और कच्चे तेल की कीमते भी कम हुई हैं.

मार्जिन में गिरावट

शाह कहते हैं कि पिछले डेढ़ साल में कंपनियों के पास कीमतों में बढ़ोतरी के अलावा कोई विकल्प नहीं था. यहां तक ​​कि वॉल्यूम में बढ़ोतरी के बावजूद ग्राहकों ने अपने खर्च में कौटती करना शुरू कर दिया. हिंदुस्तान यूनिलीवर और नेस्ले इंडिया जैसे पैकेज्ड सामानों के निर्माताओं ने इस अवधि के दौरान न केवल अपने वॉल्यूम में गिरावट देखी, बल्कि इस अवधि के दौरान मार्जिन में भी कमी दर्ज की गई.

कीमतों में क्यों हुई थी बढ़ोतरी?

कोविड के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुआ था. कंटेनर की कमी के कारण कच्चे तेल और अन्य वस्तुओं की कीमतों में भारी वृद्धि हुई थी. रूस-यूक्रेन संकट के कारण गेहूं और सूरजमुखी के तेल की कीमतों में भी इजाफा हुआ था. इस तरह की तमाम वजहों की चलते पारले प्रोडक्ट्स जैसी कंपनियों का उत्पादन लागत 35 फीसदी तक बढ़ गया था.

शाह ने कहा कि भारत से गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने से घरेलू मार्केट में कीमतों में कमी आई है. इंडोनेशिया द्वारा पाम ऑयल के निर्यात पर से प्रतिबंध को हटाने से आपूर्ति में सुधार हुआ है. हाल ही में कीमतों में अस्थिरता भी कम हुई है, जिससे निर्माताओं को राहत मिली है.

 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें