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Pakistan Economic Crisis: बेहाल पाकिस्तान अब दूसरे देशों को बेचने लगा सरकारी कंपनियां, कहा- मजबूरी है!

पाकिस्तान के वित्त मंत्री मिफ्ताह इस्माइल (Miftah Ismail) ने सरकारी कंपनियों के कॉरपोरेट गवर्नेंस पर एक सेमिनार को संबोधित करते हुए इस बात का ऐलान किया. उन्होंने कहा कि आईएमएफ ने इस फाइनेंशियल ईयर (FY23) के लिए 4 बिलियन डॉलर के फाइनेंस गैप की भरपाई करने को कहा है. ऐसा करने के लिए सरकार मित्र देशों को लिस्टेड कंपनियों के शेयर बेचने के लिए कानून को संशोधित कर रही है.

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पाकिस्तान के वित्त मंत्री ने किया ऐलान (Photo: PID)
पाकिस्तान के वित्त मंत्री ने किया ऐलान (Photo: PID)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • आर्थिक बदहाली के दौर से गुजर रहा पाकिस्तान
  • सरकारी कंपनियों के शेयर बेचने से होगी कमाई

पड़ोसी देश पाकिस्तान पिछले कुछ समय से भारी आर्थिक संकट (Pakistan Economic Crisis) में फंसा हुआ है. पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार (Pakistan Forex Reserve) समाप्त होने की कगार पर है और महंगाई (Pakistan Inflation) चरम पर है. डीजल-पेट्रोल रिकॉर्ड दरों (Pakistan Diesel-Petrol Prices) पर बिक रहे हैं और रोज कई-कई घंटों की बिजली कटौती (Pakistan Power Cut) हो रही है. इन सब के बीच पाकिस्तान के सामने आईएमएफ (Pakistan IMF Deal) से पैसे पाने के लिए 4 बिलियन डॉलर जुटाने का टारगेट है. इस खाई को पाटने के लिए पाकिस्तान ने अब अन्य देशों को सरकारी कंपनियों के शेयर बेचने की तैयारी की है.

आईएमएफ डील के लिए ये कदम जरूरी

न्यूज एजेंसी पीटीआई (PTI) की एक रिपोर्ट में स्थानीय अखबार डॉन (Dawn) के हवाले से ये जानकारी दी गई है. खबर के अनुसार, पाकिस्तान के वित्त मंत्री मिफ्ताह इस्माइल (Miftah Ismail) ने सरकारी कंपनियों के कॉरपोरेट गवर्नेंस पर एक सेमिनार को संबोधित करते हुए इस बात का ऐलान किया. उन्होंने कहा कि आईएमएफ ने इस फाइनेंशियल ईयर (FY23) के लिए 4 बिलियन डॉलर के फाइनेंस गैप की भरपाई करने को कहा है. ऐसा करने के लिए सरकार मित्र देशों को लिस्टेड कंपनियों के शेयर बेचने के लिए कानून को संशोधित कर रही है. ये शेयर इस शर्त के साथ बेचे जाएंगे कि बाद में पाकिस्तान इन्हें वापस खरीद सके.

मंत्रिमंडल ने कानून में संशोधन को दी मंजूरी

मंत्री ने कहा कि आयात पर लगा प्रतिबंध अगले कुछ सप्ताह में हटा लिया जाएगा. आईएमएफ के साथ स्टाफ लेवल पर एग्रीमेंट में जिन बातों पर सहमति बनी, वे सारे कदम पहले ही उठाए जा चुके हैं. अब अगस्त में आईएमएफ से फंडिंग की पहली किस्त मिलने की राह में कोई बाधा नहीं बची है. डॉन ने खबर में बताया कि मंत्रिमंडल ने बुधवार को ही बाद में इंटर-गवर्नमेंट कॉमर्शियल ट्रांजेक्शन एक्ट 2022 (Inter-Government Commercial Transaction Act 2022) को मंजूरी दी. हालांकि मंत्री ने अपने संबोधन में इस कानून का नाम नहीं लिया. उन्होंने बस इतना कहा कि कानून में संशोधन जरूरी है क्योंकि निजीकरण को लेकर पहले से मौजूद कानूनों में गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट बेसिस (G2G Basis) पर इस तरह के कॉमर्शियल ट्रांजेक्शन का कोई प्रावधान नहीं है.

कानून बदलने से बढ़ेगा विदेशी निवेश

बुधवार को मंत्रिमंडल की बैठक के बाद एक आधिकारिक बयान में बताया गया कि मिनिस्ट्री ऑफ लॉ एंड जस्टिस (Ministry Of Law&Justice) के द्वारा प्रस्तावित 'इंटर-गवर्नमेंट कॉमर्शियल ट्रांजेक्शन एक्ट 2022' को मंजूरी दे दी गई है. अब विधेयक को संसद की संबंधित स्थाई समिति के पास भेज दिया गया है. मंत्रिमंडल को बताया गया है कि इस कानून से फॉरेन इन्वेस्टर्स (Foreign Investors) का भरोसा बढ़ेगा. इसके अलावा विकास के एग्रीमेंट में गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट बेसिस पर विदेशी निवेश (Foreign Investment) भी बढ़ेगा.

 

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