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क्या है नेशनल लॉजिस्टिक पॉलिसी? भारतीय Economy को ऐसे होगा फायदा

National Logistics Policy: भारत लॉजिस्टिक्स कॉस्ट के मामले में 44 वें स्थान पर है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन जैसे देशों से बहुत पीछे है. देश में 10,000 से ज्यादा प्रोडक्ट्स का लॉजिस्टिक कारोबार लगभग 160 अरब डॉलर का है. इसके साथ ही यह सेक्टर 2.2 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मुहैया कराता है.

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नेशनल लॉजिस्टिक पॉलिसी
नेशनल लॉजिस्टिक पॉलिसी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने 17 सितंबर को अपने जन्मदिन के मौके पर नई नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी (National Logistics Policy) लॉन्च की. सरकार का यह कदम विकसित भारत की अर्थव्यवस्था में तेजी लाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया जा रहा है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि क्या है यह पॉलिसी और कैसे काम करती है?. इसके अलावा Economy पर इसका क्या असर होगा?. तो हम आपको बता रहे हैं इससे जुड़ी हर जानकारी. 

आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी नई उड़ान
यह पॉलिसी दरअसल, कॉरपोरेट सेक्टर के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी. खुद प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) ने इसे लॉन्च करते हुए तेजी से ग्रोथ करते भारत की इकोनॉमी (Indian Economy) में इसकी उपयोगिता और खूबियों को गिनाया. इसे लॉन्च करते हुए उन्होंने कहा कि यह पॉलिसी निचले स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक आत्मनिर्भर भारत (Atmnirbhar Bharat) को नई उड़ान देने वाली होगी. इससे सामानों की सप्लाई से लेकर माल ढुलाई की लागत में भी कमी आएगी. कुल मिलाकर कहा जाए तो नई नेशनल लॉजिस्टिक नीति कोरोना से प्रभावित अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए शुरू की गई है. 

जीडीपी पर ऐसे डालेगी असर
इंडियन इकोनॉमी पर इस पॉलिसी के सकारात्मक असर की बात करें तो इसके लिए पहले ये जान लें कि आखिर अर्थव्यवस्था में यह सेक्टर कैसे भूमिका निभाता है. बता दें, भारत अपने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का अनुमानित करीब 14 फीसदी तक हिस्सा लॉजिस्टिक्स पर खर्च करता है. जबकि दूसरे देशों से तुलना करें तो यह बहुत ज्यादा है. जर्मनी और जापान जैसे देशों में लॉजिस्टिक्स पर जीडीपी का करीब 8-9 फीसदी ही खर्च होता है. ऐसे में साफ है कि माल ढुलाई की लागत में कमी आने से इस क्षेत्र में खर्च होने वाले जीडीपी के हिस्से में कमी आएगी. 

इतना बड़ा है लॉजिस्टिक्स कारोबार  
विश्व बैंक लॉजिस्टिक्स इंडेक्स 2018 (World Bank Logistics Index 2018) के अनुसार, भारत लॉजिस्टिक्स कॉस्ट के मामले में 44 वें स्थान पर है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन जैसे देशों से बहुत पीछे है. देश में 10,000 से ज्यादा प्रोडक्ट्स का लॉजिस्टिक कारोबार लगभग 160 अरब डॉलर का है. इसके साथ ही यह सेक्टर 2.2 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मुहैया कराता है.

इस पॉलिसी के लागू होने से लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को भी मजबूती मिलेगी और इस पर खर्च भी कम हो जाएगा. सरकार की ओर से कहा गया कि इस क्षेत्र की हालत बेहतर होने से अप्रत्यक्ष लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी और इससे निर्यात में बढ़ोतरी होगी.

सप्लाई में आने वाली दिक्कतें होंगी दूर 
National Logistics Policy के जरिए सामानों की सप्लाई में आने वाली दिक्कतों को खत्म करने में मदद मिलने के साथ माल ढुलाई पर ईंधन की खपत को कम करने की दिशा में भी फायदा होगा. देशवासियों की जरूरत के सामान को विदेश से लाकर स्टोर करना और जरूरत की जगह पर पहुंचाने की इस लॉजिस्टिक्स प्रक्रिया में सड़क, जल परिवहन और हवाई यातायात का इस्तेमाल होता है और इस में सबसे ज्यादा खर्च फ्यूल पर होता है.

इसके अलावा सड़क के रास्ते माल ले जाने में टोल टैक्स, रोड टैक्स समेत कई ऐसे खर्च होते हैं, जो अन्य देशों की तुलना में ज्यादा खर्चीले हैं. नई नेशनल लॉजिस्टिक पॉलिसी इसे कम करने और डिस्ट्रीब्यूशन-ट्रांसपोर्टेशन संबंधी सभी चुनौतियों के समाधान के उद्देश्य से लॉन्च की गई है. 

 

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