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सरकार को ये अधिकार नहीं, Service Charge पर बैन के फैसले को बताया अवैध!

CCPA ने अपने आदेश में कहा है कि मनमाना Service Charge लगाकर ग्राहकों को ठगा जा रहा है. ग्राहक के पास रेस्तरां द्वारा दी जाने वाली सेवा की गुणवत्ता के आधार पर सेवा शुल्क का भुगतान करने या न करने का विकल्प होना चाहिए.

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Service Charge बैन के फैसले से नाराज रेस्टोरेंट उद्योग
Service Charge बैन के फैसले से नाराज रेस्टोरेंट उद्योग
स्टोरी हाइलाइट्स
  • CCPA ने सोमवार को जारी किए थे सेवा शुल्क के नए नियम
  • NRAI ने कहा, सरकार के पास दखल देने का अधिकार नहीं

होटल और रेस्टोरेंट में वसूले जाने वाले Service Charge को लेकर सरकार के नए दिशा-निर्देशों के खिलाफ रेस्टोरेंट उद्योग एकजुट हो गया है. रेस्तरां संचालकों के शीर्ष निकाय भारतीय राष्ट्रीय रेस्टोरेंट संघ (NRAI) ने फैसले को अवैध करार दिया है. 

आदेश की कानूनी वैधता पर सवाल
बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय राष्ट्रीय रेस्टोरेंट संघ (NRAI) ने केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) के Service Charge को बैन करने के दिशा-निर्देशों को अवैध बताते हुए आदेश की कानूनी वैधता पर सवाल उठाया है. निकाय के बयान में कहा गया है कि सरकार का यह फैसला केवल व्यावसायिक गतिविधियों में व्यवधान पैदा करने वाला है.

CCPA ने सोमवार को लगाया था बैन
होटल और रेस्टोरेंट द्वारा मनमाना सर्विस चार्ज वसूलने की लगातार मिल रही शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए CCPA बीते सोमवार को Service Charge को गैर कानूनी बताया था. नए दिशा-निर्देशों में कहा गया कि कोई भी रेस्टोरेंट अपने यहां आने वाले को ग्राहक को सेवाएं मुहैया कराने के नाम पर सर्विस चार्ज नहीं वसूल सकता. ऐसा होने पर उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1915 पर अपनी शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं. 

उपभोक्ता को नहीं कर सकते बाध्य
सीसीपीए ने सर्विस चार्ज को अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस करार देते हुए ऐसे स्थानों पर स्वचालित रूप से या बिल में डिफॉल्ट रूप से सर्विस चार्ज लगाने पर रोक लगाई है. दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि होटल और रेस्टोरेंट में दिए जाने वाले खाने की कीमत में फूड और सर्विस पहले से ही शामिल होते हैं. अथॉरिटी ने साफ तौर पर कहा कि उपभोक्ता को Service Charge का भुगतान करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता. 

सरकार के आदेश पर पलटवार
NRAI ने सरकार के आदेश पर पलटवार करते हुए कहा कि इस तरह के दिशा-निर्देशों से बिना किसी कानूनी आधार के रेस्टोरेंट उद्योग के खिलाफ एक अभियान शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है. बयान में तर्क दिया गया कि सेवा शुल्क उत्पाद की कुल कीमत के घटकों में से एक है और इस प्रकार यह वैकल्पिक कतई नहीं हो सकता. ग्राहकों द्वारा भुगतान किया गया स्वैच्छिक सेवा शुल्क उन फ्रंट एंड कर्मचारी की पॉकेट में जाता है, जिन्होंने सीधे ग्राहकों को सेवा दी हैं, बैक एंड कर्मचारी को इससे कुछ नहीं मिलता.  

इस मामले में दखल देना गलत
भारतीय राष्ट्रीय रेस्टोरेंट संघ ने अपना विरोध जताते हुए कहा कि सरकार के पास इस मामले में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है. इस संबंध में न तो सरकार और न ही कोई प्राधिकरण व्यवसायी के निर्णय में हस्तक्षेप कर सकता है. यह उसके विवेक पर निर्भर करता है कि वह अपना व्यवसाय कैसे चलाए और उत्पाद के मूल्य निर्धारण के संबंध में कौन सी नीति लागू करे। NRAI ने कहा कि सरकार दिशा-निर्देश बनाकर सेवा शुल्क के संबंध में कोई बदलाव नहीं ला सकती है.

 

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