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NLEM 2022: ये 34 दवाइयां हो सकती हैं सस्ती, Essential Medicines की लिस्ट में होगी एंट्री

NLEM में शामिल दवाइयों को शेड्यूल दवा कहा जाता है. NPPA इन दवाओं की कीमतों को थोक प्राइस इंडेक्श के आधार पर तय करता है. आमतौर पर हर तीन साल में सूची को संशोधित किया जाता है. लेकिन इस बार सात साल बाद लिस्ट में बदलाव किया जा रहा है.

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जरूरी दवाइयों की कीमतें कम हो सकती हैं.
जरूरी दवाइयों की कीमतें कम हो सकती हैं.

जरूरी एंटीबायोटिक्स दवाइयों की कीमतों को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. सरकार आवश्यक दवाओं (Essential Medicines) की नई लिस्ट जारी करने वाली है. सरकार के इस फैसले के बाद पेन किलर, एंटीबायोटिक्स दवाओं समेत निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी प्रोडक्ट की कीमतों का कम होने का अनुमान है. सरकार ने मंगलवार को कहा कि 34 नई दवाओं को लिस्ट में जोड़ा गया और 26 को आवश्यक दवाओं की सूची से हटा दिया गया है. लिस्ट में शामिल दवाइयों की कीमतों में बदलाव हो सकता है.

नई लिस्ट में 384 दवाएं शामिल

आवश्यक दवाओं की राष्ट्रीय सूची (NLEM 2022) में 384 दवाएं हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया (Mansukh Mandaviya) ने कहा कि इस सूची का मसौदा तैयार करना एक लंबी प्रक्रिया है और पूरे भारत के लगभग 350 विशेषज्ञों ने NLEM 2022 का मसौदा तैयार किया है. इसके लिए उन्होंने 140 से अधिक कंसल्टेशन मीटिंग्स की हैं.

आवश्यक दवाओं की नेशनल लिस्ट (NLEM) में शामिल की जाने वाली दवाएं और उपकरणों की कीमतें नेशनल फार्मास्युटिकल्स प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) द्वारा तय किया जाएगा. इसके बाद लिस्ट में शामिल दवाएं और उपकरण तय कीमत पर मार्केट में बिकेंगे. इस सूची में जो दवाएं शामिल नहीं हैं, उनकी कीमतों में हर साल 10 फीसदी बढ़ोतरी करने की अनुमति है.

कोविड की दवाइयां और टीके शामिल नहीं

एंटी-इन्फेक्टिव (एंटीबायोटिक्स, एंटीफंगल आदि), मधुमेह के इलाज के लिए दवाएं, एचआईवी, टीबी, गर्भनिरोधक और हार्मोनल दवाएं NLEM 2022 का हिस्सा हैं. कोविड -19 की दवाओं और टीकों को NLEM 2022 की लिस्ट में शामिल नहीं किया गया है. क्योंकि ये इमरजेंसी इस्तेमाल अथॉरिटी (EUA) के तहत आती हैं. आवश्यक दवाओं की नेशनल लिस्ट को हर तीन साल में रिवाइज किया जाता है. पिछली बार कोविड की वजह से लिस्ट को रिवाइज नहीं किया जा सका था.

कैसे तय होती हैं कीमतें?

NLEM में शामिल दवाइयों को शेड्यूल दवा कहा जाता है. NPPA इन दवाओं की कीमतों को थोक प्राइस इंडेक्श के आधार पर तय करता है. केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि NLEM सुरक्षा, प्रभावकारिता और लागत (किफायती) पर तैयार किया गया है. इसमें केवल वे दवाएं शामिल हैं, जिन्हें भारतीय नियामक ने अप्रूव किया है. नई सूची को देश में बीमारी के बोझ और वर्तमान के इलाज को प्रोसेस को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है.

हर तीन साल पर अपडेट होती है लिस्ट

1996 में पहली NLEM लिस्ट में 279 दवाएं शामिल थीं. इस लिस्ट को समय-समय पर अपडेट किया गया है. आमतौर पर हर तीन साल में सूची को संशोधित किया जाता है. लेकिन इस बार सात साल बाद लिस्ट में बदलाव किया जा रहा है. कोविड की वजह से लिस्ट को अपडेट नहीं किया जा सका था. इससे पहले साल 2015 में NLEM लिस्ट में बदलाव किया गया था. इस बार 2015 की सूची में से 26 दवाइयों को हटाया गया है और 34 नई दवाइयों को लिस्ट में शामिल किया गया है.

 

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