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क्या अब सस्ता हो जाएगा पेट्रोल-डीजल? 7 माह के निचले स्तर पर कच्चा तेल

एनर्जी मार्केट में Brent Crude Future 4.83 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट के साथ 88 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जो 8 फरवरी के बाद का निचला स्तर है. इसके अलावा यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 4.94 डॉलर कम होकर 81.94 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जो जनवरी के बाद से सबसे कम भाव है.

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 7 माह के निचले स्तर पर कच्चा तेल
7 माह के निचले स्तर पर कच्चा तेल

देश में लोगों के खर्च पर नजर डालें तो एक बड़ा हिस्सा पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel) में खप जाता है. देश में पेट्रोल 95 से 106 रुपये प्रति लीटर के दायरे में बिक रहा है, जबकि डीजल की बिक्री 89 से 95 रुपये प्रति लीटर में की जा रही है. लेकिन इन कीमतों में जल्द गिरावट देखने को मिल सकती है. ये हम नहीं कह रहे, बल्कि कच्चे तेल (Crude Oil) के भाव में आई गिरावट से ये संकेत मिल रहे हैं.   

90 डॉलर के नीचे आई कीमत
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल का भाव सात महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है. Brent Crude Future की कीमत कम होकर 90 डॉलर प्रति बैरल के नीच आ गई है. यह फरवरी 2022 के बाद से इसका निचला स्तर है. डॉलर की कीमत में जोरदार इजाफा और मांग में कमी के चलते इसके दाम में गिरावट देखने को मिल रही है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मांग में कमी के प्रमुख कारण रूस और यूक्रेन (Russia-Ukraine War) के बीच लंबे समय से जारी युद्ध के साथ ही अगस्त में चीन की एक्सपोर्ट ग्रोथ (China Export Growth) में आई कमी है. 

7 महीने का निचला स्तर छुआ
रिपोर्ट के मुताबिक, एनर्जी मार्केट में ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 4.83 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट के साथ 88 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जो 8 फरवरी के बाद पहली बार 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आया है. यानी यह बीते सात महीने में इसका सबसे निचला स्तर है. इसके अलावा यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 4.94 डॉलर या 5.7 फीसदी की गिरावट के साथ 81.94 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जो जनवरी के बाद से इसका सबसे निचला स्तर है. 

इसी साल हाई पर पहुंची थीं कीमतें
गौरतलब है कि इसी साल जब यूक्रेन पर रूस ने हमला शुरू किया था, तो उसके बाद मार्च 2022 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 139 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई थी. यह क्रूड का 2008 के बाद सबसे उच्चतम स्तर था. लेकिन, हाई पर पहुंचने के बाद इसमें गिरावट का सिलसिला शुरू हुआ, जो अभी तक जारी है. ऐसे में इसका भाव टूटने से देश में पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद बढ़ गई है. 

पेट्रोल-डीजल पर क्रूड का असर
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ता है. विशेषज्ञों की मानें तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अगर कच्चे तेल की कीमतों में एक डॉलर का इजाफा होता है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल का दाम 50 से 60 पैसे तक बढ़ सकता है. इसी तरह से अगर कच्चे तेल के दाम में गिरावट आती है, तो इसी क्रम में देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें में कमी आने की संभावना भी बढ़ जाती है. फिलहाल, क्रूड का भाव गिरने से यही संकेत मिल रहे हैं कि देश की जनता को ईंधन के मोर्चे पर राहत मिल सकती है. 

देश में लंबे समय से कीमतें स्थिर
बता दें कि देश में बीते कई महीनों से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. जहां राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 96.72 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है, तो डीजल की कीमत 89.62 रुपये प्रति लीटर बनी हुई है. मुंबई में पेट्रोल 106.31 रुपये प्रति लीटर और डीजल 94.27 रुपये प्रति लीटर है. चेन्नई में पेट्रोल 102.63 रुपये प्रति लीटर और डीजल 94.24 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. इसके अलावा कोलकाता में पेट्रोल 106.03 रुपये प्रति लीटर और डीजल 92.76 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर बना हुआ है. 

डॉलर 24 साल के शिखर पर पहुंचा
इस बीच डॉलर की कीमत में दुनिया की अन्य करेंसियों की तुलना में तेजी का रुख जारी है. रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी डॉलर, येन के मुकाबले 24 साल के हाई पर पहुंच गया है. इसके अलावा डॉलर के मुकाबले यूरो 20 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया. गौरतलब है कि बीते दिनों डॉलर के मुकाबले भारतीय करेंसी रुपये ने भी अपना ऑल टाइम लो स्तर छुआ था. 29 अगस्त को पहली बार डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत 80 के पार पहुंच गई थी. 

 

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