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Cox & Kings के प्रमोटर पीटर केरकर 3 दिसंबर तक ED की हिरासत में 

कई बैंकों से करीब 5,500 करोड़ रुपये के लोन धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में केरकर को गिरफ्तार किया गया है. सबसे ज्यादा 2,267 करोड़ रुपये का बकाया येस बैंक का है. Cox & Kings कंपनी को अक्टूबर 2019 में बैंकरप्शी कोर्ट में भेजा गया था.

Cox & Kings पर शिकंजा Cox & Kings पर शिकंजा
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कई बैंकों से लोन धोखाधड़ी का मामला
  • ईडी ने पीटर केरकर को गिरफ्तार किया
  • Cox & Kings के प्रमोटर रहे हैं पीटर केरकर

ट्रैवल ऐंड टूर्स कंपनी Cox & Kings के प्रमोटर पीटर केरकर को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार कर लिया है. कई बैंकों से करीब 5,500 करोड़ रुपये के लोन धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया है. कोर्ट ने उन्हें 3 दिसंबर तक प्रवर्तन निदेशालय के हिरासत में रखने की इजाजत दे दी है. इस दौरान उनसे इस मामले में पूछताछ की जाएगी. 

सबसे ज्यादा 2,267 करोड़ रुपये का बकाया येस बैंक का है. गौरतलब है कि ट्रैवल कंपनी कॉक्स ऐंड कंपनी दिवालिया हो चुकी है. कंपनी को अक्टूबर 2019 में बैंकरप्शी कोर्ट में भेजा गया था. इस कंपनी की स्थापना केरकर और उनके परिवार द्वारा की गयी थी. 

सीबीआई ने भी किया है मामला दर्ज 

इसी महीने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कॉक्स ऐंड किंग की सहयोगी कंपनी ईजीगो वन ट्रैवल ऐंड टूर्स लिमिटेड के खिलाफ मामला दर्ज किया था. येस बैंक को 900 करोड़ रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी के मामले में यह मामला दर्ज किया गया था. गौरतलब है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने 14 फरवरी, 2020 को येस बैंक के इस 946.44 करोड़ रुपये के लोन को फ्रॉड घोषित कर दिया था. येस बैंक की शिकायत पर सीबीआई ने यह मामला दर्ज किया था. 

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लोन नहीं चुकाने का मामला

ईडी ने जांच के दौरान पाया कि कॉक्स ऐंड किंग्स ने काल्पनिक ग्राहकों का इस्तेमाल कर येस बैंक से हजारों करोड़ रुपये उधार लिए. जो बाद में नहीं चुकाया गया. गौरतलब है कि 8 मार्च को ईडी ने येस बैंक के पूर्व अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक राणा कपूर को गिरफ्तार कर लिया था. 

सीबीआई ने कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों अजय अजित पीटर केरकर, उर्शिला केरकर, नीलू सिंह, अरुप सेन, मनीषा अमरापुरकर, प्रेसी पटेल और कार्तिक वेंकटरमन के खिलाफ मामला दर्ज किया है. 

एफआईआर के मुताबिक येस बैंक ने Ezeego को साल 2017 में 650 करोड़ रुपये का लोन दिया था, जिसे सितंबर 2018 में बढ़ाकर 1,015 करोड़ रुपये कर दिया गया था. लेकिन यह ट्रैवल कंपनी लोन चुकाने में नाकाम रही और जून 2019 में इस खाते को एनपीए घोषित कर दिया गया. 

फंड का डायवर्जन 

सीबीआई की जांच से यह पता चला कि कंपनी ने इस फंड को अपनी सहयोगी कंपनी कॉक्स ऐंड किंग्स को ट्रांसफर कर दिया. ईजीगो वन ट्रैवल ऐंड टूर्स की स्थापना साल 2006 में की गयी थी. यह कंपनी फ्लाइट बुकिंग, होटल एवं हॉलिडे पैकेज बुकिंग जैसे कई तरह के ट्रांसपोर्ट और ट्रैवल सेवाओं में लगी थी. 

 

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