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उम्‍मीदों-आशंकाओं के बीच प्रणब दा पर निगाहें

इस समय सरकार की हालत आमदनी अट्ठनी और खर्चा रुपया वाली है. एक तरफ कार्पोरेट जगत है जो बजट को और टाइट करना चाहता है, दूसरी तरफ आम आदमी है जो महंगाई से त्रस्‍त है और उससे निजात पाने के लिए प्रणब दा की और उम्‍मीदभरी निगाह से देख रहा है.

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