क्या टैरिफ से वसूली रकम वापस करेंगे ट्रंप? कैलिफोर्निया के गर्वनर ने कर दी ये मांग

अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति को गैरकानूनी करार दिया है. इस फैसले से टैरिफ को लेकर वैश्विक चर्चा तेज हो गई है, खासकर यह सवाल कि क्या अमेरिका द्वारा वसूले गए शुल्क वापस किए जाएंगे. कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूज़ॉम ने ट्रंप से अवैध टैरिफ राशि तुरंत सभी अमेरिकी नागरिकों को लौटाने की मांग की है.

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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से राष्ट्रपति ट्रंप को टैरिफ़ पर लगा बड़ा झटका (Photo: AFP) अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से राष्ट्रपति ट्रंप को टैरिफ़ पर लगा बड़ा झटका (Photo: AFP)

अनीषा माथुर / प्रणय उपाध्याय

  • नई दिल्ली,
  • 20 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:37 PM IST

अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट की ओर से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को टैरिफ़ नीति पर बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने इस टैरिफ़ नीति को गैरकानूनी करार दिया है. कोर्ट के इस फैसले को लेकर दुनियाभर में टैरिफ़ को लेकर चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं. अब यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या अमेरिका दूसरे मुल्कों से वसूले गए टैरिफ़ के रकम को वापस करेगा?

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इन सब के बीच कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूज़ॉम ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से टैरिफ को लेकर एक सख्त मांग की है. उन्होंने कहा कि जिन टैरिफ को अवैध करार दिया गया है, उनकी वसूली गई रकम तुरंत सभी अमेरिकियों को वापस लौटाई जानी चाहिए. न्यूज़ॉम ने अपने बयान में कहा, "अपने अवैध टैक्स का तुरंत सभी अमेरिकियों को रिफंड जारी करें. अभी."

यह बयान उस समय दिया गया है जब टैरिफ को लेकर देश में राजनीतिक और कानूनी बहस तीव्र होती जा रही है. टैरिफ के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई और कई पक्ष इसे अवैध घोषित कर चुके हैं. ऐसे में कैलिफोर्निया के गवर्नर की यह मांग काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसके माध्यम से वे जनता के हित की आवाज उठा रहे हैं.

यह भी पढ़ें: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से ट्रंप को बड़ा झटका, अदालत ने राष्ट्रपति के टैरिफ को बताया गैरकानूनी

गैविन न्यूज़ॉम ने कहा कि अगर कोई टैक्स या टैरिफ अवैध घोषित हुआ है, तो उससे वसूली गई राशि नागरिकों की संपत्ति है और उसे बिना देरी के वापस किया जाना चाहिए. उनका यह कहना है कि सरकार का दायित्व है कि वह अपने नागरिकों के साथ पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करे. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सरकार को इस मामले में जिम्मेदारी लेते हुए शीघ्र कार्रवाई करनी चाहिए.

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यूएस चैम्बर ने टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत किया

यूएस चैम्बर ऑफ कॉमर्स के कार्यकारी उपाध्यक्ष और मुख्य नीति अधिकारी नील ब्रैडली ने अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियों अधिनियम (IEEPA) के तहत टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर बयान जारी किया. 

ब्रैडली ने कहा, "यह निर्णय व्यवसायों और उपभोक्ताओं के लिए बहुत अच्छी खबर है. पिछले एक साल में, चैम्बर देशभर के छोटे और मझोले व्यवसायों के साथ काम करता रहा है, जो इन टैरिफों के कारण लागत वृद्धि और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान का सामना कर रहे थे. इन अनधिकृत टैरिफों की त्वरित वापसी 2 लाख से अधिक छोटे व्यवसायों के लिए काफी मददगार साबित होगी और इस साल मजबूत आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करेगी."

क्या भारतीय निर्यातकों को मिलेगा रिफंड?

टैरिफ़ नीति पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ नहीं किया कि पहले वसूले गए टैरिफ की राशि वापसी के पात्र है या नहीं. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी कंपनियों ने अरबों डॉलर का टैरिफ चुकाया है, जिनमें कॉस्टको जैसी बड़ी कंपनियां रिफंड के लिए अदालत में आवेदन कर चुकी हैं. जज ब्रेट कैवनॉ ने अपने नोट में कहा कि अरबों डॉलर वापस करने की प्रक्रिया जटिल हो सकती है. 

भारत उन देशों में शामिल था जिन पर 2 अप्रैल 2025 को घोषित रेसिप्रोकल टैरिफ का असर हुआ था. रूस से तेल खरीद पर लगे दंडात्मक टैरिफ ने दर को 50 प्रतिशत तक पहुंचा दिया था, जिसे बाद में भारत-अमेरिका ट्रेड डील के तहत जनवरी में घटाकर 18 प्रतिशत किया गया.

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विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ का भुगतान मुख्यतः अमेरिकी आयातकों ने किया, न कि भारतीय निर्यातकों ने. इससे अमेरिकी बाजार में महंगाई बढ़ी. अर्थशास्त्री अजित रानाडे के अनुसार, भले ही टैरिफ अवैध घोषित हो जाए, लेकिन मुआवजे का कोई साफ़ प्रावधान नहीं है और पहले किए गए निवेश की भरपाई मुश्किल है.

आनंद सिंह के इनपुट के साथ.

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