30 जुलाई को पुत्रदा एकादशी, व्रत में 'संतान गोपाल मंत्र' का करें जाप

पुत्रदा एकादशी का व्रत व्रत दो प्रकार से रखा जाता है-निर्जल व्रत और फलाहारी या जलीय व्रत. निर्जल व्रत पूर्ण रूप से स्वस्थ्य व्यक्ति को ही रखना चाहिए. अन्य या सामान्य लोगों को फलाहारी या जलीय उपवास रखना चाहिए.

पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान प्राप्ति और उसकी समस्याओं के निवारण के लिए किया जाता है.
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 28 जुलाई 2020,
  • अपडेटेड 1:41 PM IST

व्रतों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण व्रत एकादशी का होता है. एकादशी का नियमित व्रत रखने से मन कि चंचलता समाप्त होती है. धन और आरोग्य की प्राप्ति होती है. पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान प्राप्ति और संतान की समस्याओं के निवारण के लिए किया जाता है. सावन की पुत्रदा एकादशी विशेष फलदायी मानी जाती है. इस बार सावन की पुत्रदा एकादशी 30 जुलाई को है.

क्या है व्रत के नियम?

इस उपवास को रखने से संतान से जुड़ी हर समस्या का निवारण हो जाता है. यह व्रत दो प्रकार से रखा जाता है-निर्जल व्रत और फलाहारी या जलीय व्रत. निर्जल व्रत पूर्ण रूप से स्वस्थ्य व्यक्ति को ही रखना चाहिए. अन्य या सामान्य लोगों को फलाहारी या जलीय उपवास रखना चाहिए.

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बेहतर होगा कि इस दिन केवल जल और फल का ही सेवन किया जाए. संतान संबंधी मनोकामनाओं के लिए इस एकादशी के दिन भगवान कृष्ण या श्री नारायण की उपासना करनी चाहिए. इस दिन सुबह के वक्त पति-पत्नी संयुक्त रूप से श्री कृष्ण की उपासना करें. उन्हें पीले फल, पीले फूल, तुलसी और पंचामृत अर्पित करें.

इसके बाद संतान गोपाल मंत्र (ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः) का जाप करें. मंत्र जाप के बाद पति पत्नी संयुक्त रूप से प्रसाद ग्रहण करें अगर इस दिन उपवास रखकर प्रक्रियाओं का पालन किया जाय तो ज्यादा अच्छा होगा.

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