Chanakya Niti: ऐसे व्यक्ति को कभी नहीं मिलती विद्या, सत्य से भी होते हैं दूर

चाणक्य एक श्लोक के माध्यम से बताते हैं कि किस प्रकार के लोगों को विद्या नहीं मिलती, किसमें दया नहीं होती और कैसे लोग सत्य से दूर रहते हैं. आइए जानते हैं चाणक्य की इस नीति के बारे में...

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Chanakya Niti in Hindi Chanakya Niti in Hindi

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 नवंबर 2020,
  • अपडेटेड 12:33 PM IST

चाणक्य ने मनुष्य के जीवन से जुड़ी उलझनों को सुलझाने के लिए कई नीतियों का बखान किया है. चाणक्य नीति में इन नीतियों को श्लोक के माध्यम से वर्णित किया गया है. इसमें चाणक्य एक श्लोक के माध्यम से बताते हैं कि किस प्रकार के लोगों को विद्या नहीं मिलती, किसमें दया नहीं होती और कैसे लोग सत्य से दूर रहते हैं. आइए जानते हैं चाणक्य की इस नीति के बारे में...

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गृहासक्तस्य नो विद्या नो दया मांसभोजिन:|
द्रव्यलुब्धस्य नो सत्यं स्त्रैणस्य न पवित्रता ||

चाणक्य के मुताबिक जिस व्यक्ति का घर से ज्यादा लगाव होता है या फिर जो व्यक्ति घर के मोह में बंध जाता है उसे कभी विद्या नहीं मिल पाती. उसका पढ़ाई से मन हट जाता है. पारिवारिक मोह में उलझने के कारण वो पढ़ाई में अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते. इसलिए पढ़ने वाले बच्चों को घर के मामलों से दूर ही रहना चाहिए.

चाणक्य के मुताबिक मांसाहारी व्यक्ति से दया की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए. वो कहते हैं कि दया की उम्मीद शाकाहारी व्यक्ति से ही करनी चाहिए क्योंकि उनमें दया की भावना भरी रहती है.

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आचार्य के अनुसार धन के लोभी इंसान पर कभी भरोसा नहीं करना चाहिए. धन के लोभी इंसान हमेशा इसी फेर में रहते हैं कि किस तरह ज्यादा से ज्यादा धन एकत्रित हो जाए. ऐसे लोग सत्य से काफी दूर रहते हैं. इसी कारण ऐसे लोगों पर कभी भरोसा नहीं करना चाहिए.

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दुराचारी, व्यभिचारी और भोगविलास में लगे रहने वाले मनुष्य में पवित्रता का अभाव होता है. जिस इंसान का आचरण सही नहीं होता, वह मन से भी अपवित्र होता है. 

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