साहित्य आजतक 2019: 'तूने कुछ ऐसी पिला दी है पिलाने वाले, होश वाले भी नहीं होश में आने वाले'

साहित्य आजतक 2019 के तीसरे और आखिरी दिन मुशायरे की महफिल सजी. इस मुशायरे में कई जाने-माने शायर शामिल हुए.

साहित्य आजतक 2019 के मुशायरे में जीशान नियाजी
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 03 नवंबर 2019,
  • अपडेटेड 6:13 PM IST

  • 'साहित्य आजतक 2019' के तीसरे दिन सजी मुशायरे की महफिल
  • साहित्य आजतक 2019 के मुशायरे में शामिल हुए जीशान नियाजी
'साहित्य आजतक 2019' के तीसरे और आखिरी दिन मुशायरे की महफिल सजी. इस मुशायरे में कई जाने-माने शायर शामिल हुए. मुशायरे में वसीम बरेलवी, राहत इंदौरी, नवाज देवबंदी, अभिषेक शुक्ला, जीशान नियाजी, कुंवर रंजीत चौहान ने शिरकत की और अपने शेरों से खूब वाहवाही लूटी. साहित्य आजतक 2019 में हुए मुशायरे में शायर जीशान नियाजी भी शामिल हुए. जिन्होंने अपनी नज्मों से काफी वाहवाही लूटी. उनके शेर कुछ इस तरह से रहे...

मुद्दतों खुद से मुलाकात नहीं होती है,रात होती है मगर रात नहीं होती है.शहर में अब कोई दरवेश नहीं है शायद,अब कहीं कोई करामात नहीं होती है.उससे कह दो की जल्द लौट आए,आरजू देर तक नहीं रहती.मैं दिन के उजाले में तुझे सोच रहा हूं,महसूस ये होता है कि कुछ रोशनी कम है.

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तूने कुछ ऐसी पिला दी है पिलाने वाले,होश वाले भी नहीं होश में आने वाले.देखते हैं जो तमाशा सरे साहिल मेरा.कल यही लोग थे मौजों से बचाने वाले.जब तसव्वुर तेरा नहीं होताजिंदगी में मजा नहीं होतावादे वो रोज करते हैं लेकिनकोई वादा वफा नहीं होताकैसी आई बहार गुलशन मेंकोई पत्ता हरा नहीं होताचेहरे होते हैं बेवफा जीशानआईना बेवफा नहीं होताकिसी बाजार में सौदा नहीं होने देतेवो हमें और किसी का नहीं होने देतेजब संभलती है तबीयत तो चले आते हैं आपअपने बीमार को अच्छा नहीं होने देतेतुमने क्यों देखा पलटकर हमें वक्ते रख्सतक्यों किसी हाल में तन्हा नहीं होने देते

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