साहित्य आजतक 2019: 'चेहरे बदल-बदल के वो बर्बाद कर गया, हम सोचते ही रह गए किरदार कौन है..'

साहित्य आजतक 2019 के तीसरे और आखिरी दिन मुशायरे की महफिल सजी. इस मुशायरे में कई जाने-माने शायर शामिल हुए.

साहित्य आजतक 2019 के मुशायरे में कुंवर रंजीत चौहान
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 03 नवंबर 2019,
  • अपडेटेड 6:14 PM IST

  • 'साहित्य आजतक 2019' के तीसरे दिन सजी मुशायरे की महफिल
  • साहित्य आजतक 2019 में मुशायरे में कुंवर रंजीत चौहान ने की शिरकत
'साहित्य आजतक 2019' के तीसरे और आखिरी दिन मुशायरे की महफिल सजी. इस मुशायरे में कई जाने-माने शायर शामिल हुए. मुशायरे में वसीम बरेलवी, राहत इंदौरी, नवाज देवबंदी, अभिषेक शुक्ला, जीशान नियाजी, कुंवर रंजीत चौहान ने शिरकत की और अपने शेरों से खूब वाहवाही लूटी. साहित्य आजतक 2019 में हुए मुशायरे में कुंवर रंजीत चौहान ने कई शानदार शेर पढ़े. कुंवर रंजीत चौहान के शेर इस तरह से रहे...

उस दिलनशीं को देखकर हम बस वहीं ठहर गएये भी नहीं कि जिंदा हैं, ये भी नहीं कि मर गएजो रिंद तेरे दर के थे, वो मयकशी में मर गएवो लोग कोई और थे, जो पीके अपने घर गएकल तक तो ये सवाल था हम हैं किसी का आईनाऔर आज ये सवाल है, कि हम कहां बिखर गएदेकर के उसने दिल हमें, एक रोज जान मांग लीहम भी तो बादशाह थे, जो कह गए सो कर गएदरिया तलाशना कहीं, सहरा तलाशनामुश्किल है खुद के जैसी ही दुनिया तलाशनादेखे हुए से ख्वाब का एक ख्वाब देखनाफिर ख्वाब में भी ख्वाब के जैसा तलाशनाजब उमड़ते हो मेरी आंख में बादल होकररक्स करता है ये दिल मोर सा पागल होकरमैं लहू तक तेरी तस्वीर को दे आया हूंबोल दे अब तो मेरी जान मुकम्मल होकरये नए लोग जिन्हें इश्क का दावा है बहुतकोई दिखलाए तो रंजीत का पागल होकरदिल ये तो जानता है कि गुनहगार कौन हैआए जो नाम उसका तो तैयार कौन हैचेहरे बदल-बदल के वो बर्बाद कर गयाहम सोचते ही रह गए किरदार कौन हैतुम जख्म ले तो आए हो बाजार में लेकिन ये भी तो देख लो कि खरीदार कौन हैदी बार-बार किसने मेरे दिल पर दस्तकेंचीखा मैं बार-बार कि इस बार कौन हैन आरजू, न जुस्तजू तो गुप्तगू कहांजो मैं ही मैं न रहा तो तू ही तू कहांटपका जो था जो यहां कभी गालिब की आंख सेअब इन रगों में दौड़ता वैसा लहू कहांतस्वीर की नजर से तुझे देखता हूं मैंतू रूबरू है मगर हूबहू कहां

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